बिहार के कॉलेजों में प्रिंसिपल बनने के नियम बदले, अब इतने साल का अनुभव जरूरी, आरोपित उम्मीदवारों को नहीं मिलेगी कुर्सी

Bihar College Principal Appointment: बिहार के अंगीभूत महाविद्यालयों में प्रधानाचार्य बनने के नियम और सख्त होने जा रहे हैं. अब इस पद के लिए 15 साल का शिक्षण अनुभव अनिवार्य होगा. साथ ही आरक्षण नियमों और यूजीसी गाइडलाइन का पालन करना होगा. गंभीर आरोप वाले अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं मिलेगी.

By Abhinandan Pandey | June 24, 2026 2:40 PM

Bihar College Principal Appointment: बिहार के अंगीभूत महाविद्यालयों में प्रधानाचार्यों की नियुक्ति को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं. अब प्रधानाचार्य बनने के लिए अभ्यर्थी के पास कम से कम 15 वर्ष का शिक्षण अनुभव होना अनिवार्य होगा. राज्यपाल सचिवालय ने सभी विश्वविद्यालयों को नियमों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है. नियुक्ति प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही पर संबंधित कुलपतियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है.

आरक्षण नियमों का पालन जरूरी

प्रधानाचार्य नियुक्ति में बिहार सरकार के आरक्षण प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य होगा. चयन प्रक्रिया के दौरान आरक्षण नियमों की अनदेखी नहीं की जा सकेगी. राजभवन ने स्पष्ट किया है कि सभी नियुक्तियां निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के अनुसार ही की जाएंगी.

आरोपित अभ्यर्थियों को नहीं मिलेगी नियुक्ति

यदि किसी अभ्यर्थी पर गंभीर आरोप लंबित हैं, तो उसे प्रधानाचार्य पद पर नियुक्त नहीं किया जाएगा. नियुक्ति से पहले अभ्यर्थियों की पृष्ठभूमि और पात्रता की भी जांच की जाएगी. इसका उद्देश्य संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है.

यूजीसी गाइडलाइन का होगा पालन

राजभवन सचिवालय के अनुसार, प्रधानाचार्य नियुक्ति में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की गाइडलाइन का पालन अनिवार्य रहेगा. विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया गया है कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह यूजीसी के मानकों के अनुरूप हो.

पांच साल का होगा कार्यकाल

प्रधानाचार्य पद पर नियुक्ति का कार्यकाल पांच वर्षों का होगा. हालांकि बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रधानाचार्य को पांच वर्ष का एक अतिरिक्त कार्यकाल दिया जा सकता है. यह अवधि सेवा विस्तार के रूप में दर्ज की जाएगी.

गंभीर आरोप लगने पर हटाए जा सकते हैं

नियमों के अनुसार, कार्यकाल के दौरान यदि किसी प्रधानाचार्य पर गंभीर आरोप साबित होते हैं, तो उन्हें पद से हटाया जा सकता है. यानी पांच वर्ष का कार्यकाल होने के बावजूद पद पर बने रहना प्रदर्शन और आचरण पर निर्भर करेगा.

बिहार की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें

साक्षात्कार और उम्र सीमा तय

प्रधानाचार्य पद के चयन में साक्षात्कार के लिए 20 अंक निर्धारित किए गए हैं. अभ्यर्थियों की अधिकतम आयु सीमा 60 वर्ष तय की गई है. इससे अधिक आयु वाले उम्मीदवार नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकेंगे.

तीन सदस्यीय समिति करेगी चयन

प्रधानाचार्य पद के लिए अभ्यर्थियों का चयन विश्वविद्यालय की तीन सदस्यीय समिति करेगी. यही समिति उम्मीदवारों की योग्यता, अनुभव और साक्षात्कार के आधार पर अंतिम चयन करेगी. नए नियमों का उद्देश्य कॉलेजों में योग्य, अनुभवी और जवाबदेह नेतृत्व सुनिश्चित करना है.

Also Read: भरत तिवारी के घर पहुंचे प्रशांत किशोर, महापंचायत में उमड़ा जनसैलाब, गांव में जुटे हजारों लोग