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Home बिहार पटना बिहार में कोसी के कहर से बचने में अब एआई करेगा मदद, नया वॉर्निंग सिस्टम इस तरह करता है अलर्ट…

बिहार में कोसी के कहर से बचने में अब एआई करेगा मदद, नया वॉर्निंग सिस्टम इस तरह करता है अलर्ट…

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बिहार में कोसी के कहर से बचने में अब एआई करेगा मदद, नया वॉर्निंग सिस्टम इस तरह करता है अलर्ट…
सांकेतिक तस्वीर

AI Warning System: बिहार में मानसून के दौरान कई नदियों में उफान आ जाता है. कोसी नदी में बाढ़ के कारण हर साल लोग इसकी विभीषिका झेलते हैं. लोगों को अपना घर तक छोड़ना पड़ जाता है. ऐसे में अब कोसी के कहर से निपटने में एआई की मदद ली जाएगी. दशकों से उत्तर बिहार के लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त करने वाली इस नदी की बाढ़ पर नियंत्रण के लिए एक्सप्लेनेबल एआई की मदद ली जा रही है. जानकारी के मुताबिक, आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ऐसा सिस्टम तैयार किया है, जो कोसी नदी में बाढ़ के समय और इसकी विकरालता का समय रहते आंकलन कर सतर्क कर देगा.

समय रहते हो सकेगा बचाव

इस वार्निंग सिस्टम द्वारा उपलब्ध कराये गए आंकड़ों के आधार पर न सिर्फ बाढ़ से बचाव के इंतजाम, बल्कि लोगों को सुरक्षित स्थान पर भेजने की कार्रवाई भी समय रहते की जा सकेगी. इससे बाढ़ के दौरान जान-माल की हानि को कम किया जा सकेगा. आईआईटी रुड़की का यह शोध न सिर्फ तकनीकी तौर पर अत्याधुनिक है, बल्कि बिहार जैसे आपदाग्रस्त राज्य के लिए सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण से अत्यंत लाभकारी भी है. इस शोध का वास्तविक असर उन लाखों लोगों पर होगा जो हर साल बाद से प्रभावित होते हैं.

पहले ही कर देगा अलर्ट

वहीं, एआई मॉडल की बात करें तो, इसको इस तरह विकसित किया गया है कि यह बाढ़ के पहले सटीक अलर्ट जारी कर सकता है. इससे प्रशासन को समय रहते राहत बचाव टीमों को सक्रिय करने, संवेदनशील क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित निकालने और आपातकालीन संसाधन पहले से तैनात करने में बड़ी मदद मिलेगी.

सरकार को मिलेगी खास मदद

एआई की ओर से बनाये गये बाढ़ संभाव्यता मानचित्र की मदद से सरकार और स्थानीय निकाय अब यह तय कर पायेंगे कि कहां सड़कों, पुलों और आश्रयगृहों को मजबूत किया जाए या नये भवन कहां न बनें. इसके साथ ही बाढ़ के समय भूमि उपयोग नियमन के लिए भी यह डेटा महत्वपूर्ण आधार बनेगा.

रिसर्च की यह भी है खासियत…

इस रिसर्च की एक और खासियत यह बताई जा रही है, एक्सप्लेनेबल एआई . यह तकनीक यह भी बताती है कि किसी क्षेत्र को बाढ़ संभावित क्यों माना गया है, जिससे नीति-निर्माताओं को भरोसे के साथ निर्णय लेने में सुविधा होती है. इससे नीतिगत पारदर्शिता और जनता का विश्वास दोनों मजबूत होते हैं.

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प्रीति दयाल, प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर काम कर रहीं हैं. यूट्यूब पोर्टल सिटी पोस्ट लाइव से पत्रकारिता की शुरुआत की. इसके बाद डेलीहंट और दर्श न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में काम कर चुकीं हैं. डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग में साढ़े 3 साल का अनुभव है. खबरें लिखना, वेब कंटेंट तैयार करने और ट्रेंडिंग सब्जेक्ट पर सटीक और प्रभावी खबरें लिखने का काम कर रहीं हैं. प्रीति दयाल ने पत्रकारिता की पढ़ाई संत जेवियर्स कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी से की. इस दौरान पत्रकारिता से जुड़ी कई विधाओं को सीखा. मीडिया संस्थानों में काम करने के दौरान डिजिटल जर्नलिज्म से जुड़े नए टूल्स, तकनीकों और मीडिया ट्रेंड्स को सीखा. पहली बार लोकसभा चुनाव 2024 और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जैसे बड़े चुनावी कवरेज में काम करने का अवसर मिला. इस दौरान बिहार की राजनीति, चुनावी रणनीतियों, राजनीतिक दलों और प्रमुख नेताओं से जुड़े कई प्रभावशाली और पाठकों की रुचि के अनुसार कंटेंट तैयार किए. चुनावी माहौल को समझते हुए राजनीतिक विश्लेषण और ट्रेंडिंग मुद्दों पर आधारित खबरों को आसान और प्रभावी भाषा में तैयार करना कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है. कंटेंट रिसर्च, SEO आधारित लेखन, सोशल मीडिया फ्रेंडली कंटेंट तैयार करना और तेजी से बदलते न्यूज वातावरण में काम करना प्रमुख क्षमताओं में शामिल है. बिहार की राजनीति, सामाजिक मुद्दों, सिनेमा और देश-दुनिया की महत्वपूर्ण घटनाओं पर रुचि और समझ है. टीम के साथ बेहतर समन्वय बनाकर काम करना और समय सीमा के अंदर गुणवत्तापूर्ण काम पूरा करना कार्यशैली का हिस्सा है. प्रीति दयाल का उद्देश्य डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में लगातार सीखते हुए अपनी पत्रकारिता कौशल को और बेहतर बनाना और पाठकों तक विश्वसनीय और प्रभावशाली खबरें पहुंचाना है.
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