Patna NEET Student Death: पटना हॉस्टल कांड में CBI जांच की एंट्री, सरकार पर विपक्ष का हमला
Patna NEET Student Death: नीट की तैयारी कर रही छात्रा की मौत अब सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह बिहार सरकार के लिए सियासी संकट बन चुका है. 20 दिनों की जांच के बाद भी जब जवाब नहीं मिले, तो अब मामला सीधे CBI तक पहुंच गया है.
Patna NEET Student Death: बिहार में नीट छात्रा की मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. राज्य की तमाम जांच एजेंसियां बीते 20 दिनों से सच्चाई तक पहुंचने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन मामला उलझता ही चला गया. पुलिस और गृह विभाग की चुप्पी के बीच अब CBI जांच का रास्ता साफ हो गया है, जिससे सियासी पारा और चढ़ गया है.
डीजीपी से लेकर विभाग के मुखिया तक मौन
नीट छात्रा की मौत मामले पर ना तो पुलिस के आला अधिकारी डीजीपी विनय कुमार ही कोई बयान देने की स्थिति में हैं और ना ही गृह विभाग के मुखिया सम्राट चौधरी. शुक्रवार को जब पीड़िता का परिवार इन दोनों से मिलने आया तो भी इनके पास देने के लिए कोई जवाब या आश्वासन नहीं था. लिहाजा अब यह जांच सीबीआई को सुपुर्द की जा रही है.
CBI जांच का नोटिफिकेशन जारी
छात्रा की मौत की जांच CBI से कराने को लेकर राज्यपाल सचिवालय की ओर से आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है. इसके तहत केंद्र सरकार को जांच की अनुशंसा भेजी गई है. आदेश में साफ कहा गया है कि CBI जांच में बिहार पुलिस के सभी अधिकारी पूरा सहयोग करेंगे और आवश्यक दस्तावेज तत्काल उपलब्ध कराए जाएंगे.
राज्य सरकार की जांच पर उठे सवाल
इस मामले में अब तक SIT समेत कई स्तरों पर जांच चल रही थी, लेकिन कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आ सका. यही वजह है कि विपक्ष लगातार सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहा है. हैरानी की बात यह है कि मामले पर न तो पुलिस के आला अधिकारी खुलकर बोल रहे हैं और न ही गृह विभाग के मुखिया कोई बयान देने की स्थिति में हैं.
सरकार और पुलिस पूरी तरह नाकाम
कांग्रेस प्रवक्ता स्नेहाशीष वर्धन ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि इतने दिनों तक SIT जांच करती रही, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने DGP के उस बयान का भी जिक्र किया, जिस पर पीड़िता के परिवार ने गंभीर आरोप लगाए थे. कांग्रेस का कहना है कि CBI जांच की मांग यह साबित करती है कि राज्य सरकार और उसकी पुलिस इस मामले को सुलझाने में पूरी तरह असफल रही है.
राजद की ओर से एजाज अहमद ने कहा कि सरकार ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा तो देती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है. उन्होंने आरोप लगाया कि जांच की प्रक्रिया न तो बेटी की अस्मिता बचा पा रही है और न ही न्याय की उम्मीद जगा रही है. सवाल यह है कि आखिर सरकार इतनी गंभीर घटना पर भी क्यों सोई हुई है.
अब निगाहें CBI जांच पर टिकी हैं. माना जा रहा है कि केंद्रीय एजेंसी की एंट्री से मामले की परतें खुलेंगी और पीड़िता के परिवार को इंसाफ मिल सकेगा
