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Home बिहार नवादा ‘गो डिजिट’ इंश्योरेंस कंपनी नवादा की महिला को देगी ₹15 लाख, पति का ओरिजिनल DL नहीं मिलने पर रिजेक्ट किया था क्लेम

‘गो डिजिट’ इंश्योरेंस कंपनी नवादा की महिला को देगी ₹15 लाख, पति का ओरिजिनल DL नहीं मिलने पर रिजेक्ट किया था क्लेम

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‘गो डिजिट’ इंश्योरेंस कंपनी नवादा की महिला को देगी ₹15 लाख, पति का ओरिजिनल DL नहीं मिलने पर रिजेक्ट किया था क्लेम
उपभोक्ता आयोग, नवादा की फाइल फोटो.

Nawada Consumer Court Decision : नवादा में सड़क हादसे में पति को खोने के बाद न्याय की लड़ाई लड़ रही एक महिला को आखिरकार राहत मिल गई है. जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में बीमा कंपनी के निर्णय को गलत ठहराते हुए मृतक की पत्नी के पक्ष में आदेश सुनाया है.

आयोग ने ‘गो डिजिट’ जनरल इंश्योरेंस कंपनी को निर्देश दिया है कि वह मृतक चालक-सह-वाहन स्वामी की पत्नी को 15 लाख रुपये की बीमित राशि दे. साथ ही 30 हजार रुपये मानसिक और आर्थिक क्षति के रूप में तथा 10 हजार रुपये वाद व्यय के तौर पर भुगतान करे. साथ ही आयोग ने स्पष्ट किया कि आदेश की प्रति मिलने के 60 दिनों के भीतर भुगतान नहीं होने पर निर्धारित दर से ब्याज भी देना होगा.

बर्थडे पार्टी से लौटते समय हुआ था भीषण हादसा

मामला वर्ष 2023 के एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना से जुड़ा है. 21 दिसंबर की सुबह करीब 4 बजे 27 वर्षीय रौशन कुमार अपनी स्कॉर्पियो (DL-8CAC-1551) से पांच दोस्तों के साथ बर्थडे पार्टी से लौट रहे थे. इसी दौरान रजौली–सिरदला मार्ग (एसएच-70) पर बैरियामोड़ के पास अचानक नीलगायों का झुंड सामने आ गया.

जानवरों को बचाने की कोशिश में गाड़ी अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पेड़ से जा टकराई. हादसा इतना भयानक था कि मौके पर ही रौशन के दो दोस्तों विवेक कुमार (खनवां गांव) और चंदन कुमार (नरौली) की मौत हो गई. वहीं गंभीर रूप से घायल रौशन कुमार ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. इस दुर्घटना में दो अन्य युवक भी गंभीर रूप से घायल हुए थे.

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हादसे के वक्त की फाइल फोटो.

पति की मौत के बाद उनकी पत्नी कुमारी देवी ने बीमा क्लेम के लिए आवेदन किया. लेकिन बीमा कंपनी ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि मृतक-सह-वाहन चालक का ओरिजिनल ड्राइविंग लाइसेंस प्रस्तुत नहीं किया गया था. इसी आधार पर कंपनी ने भुगतान से इंकार कर दिया.

Consumer Court : थाना के सन्हा ने बदल दी केस की दिशा

बीमा कंपनी के इस फैसले के खिलाफ कुमारी देवी ने जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया. सुनवाई के दौरान उन्होंने रजौली थाना में दर्ज सन्हा को महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में पेश किया. इसमें साफ उल्लेख था कि दुर्घटना के बाद घटनास्थल से कुछ सामान गायब हुआ था, उसमें मृतक का ओरिजिनल ड्राइविंग लाइसेंस भी शामिल था.

आयोग ने सभी दस्तावेजों, पुलिस रिकॉर्ड और दोनों पक्षों की दलीलों का गहराई से अध्ययन किया. आयोग ने माना कि सिर्फ लाइसेंस की मूल प्रति नहीं मिलने से यह नहीं कहा जा सकता कि मृतक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था.

Go Digit : तकनीकी आधार पर क्लेम खारिज करना सेवा में कमी

आयोग ने बीमा कंपनी की दलील को खारिज करते हुए इसे उपभोक्ता के प्रति ‘सेवा में कमी’ करार दिया. आयोग ने कहा कि केवल तकनीकी आधार पर वैध बीमा दावों को अस्वीकार करना उचित नहीं है.

उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करने का दिया संदेश

यह फैसला सिर्फ एक विधवा को न्याय दिलाने तक सीमित नहीं है. बल्कि उन सभी बीमाधारकों के लिए एक मजबूत संदेश है, जिनके दावे अक्सर तकनीकी कारणों से खारिज कर दिए जाते हैं. आयोग ने साफ किया कि बीमा कंपनियां औपचारिक आपत्तियों के आधार पर उपभोक्ताओं के अधिकारों का हनन नहीं कर सकतीं.

यह निर्णय नवादा ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है. यह बताता है कि न्याय केवल कागजी औपचारिकताओं का नहीं, बल्कि तथ्यों, साक्ष्यों और न्याय के मूल सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए.

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