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नेपाल ने भारत-बांग्लादेश से मांगा सहयोग

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नेपाल ने भारत-बांग्लादेश से मांगा सहयोग

रक्सौल.नेपाल सरकार ने सिमलताल में भूस्खलन के बाद नदी में गिरी बसें व उसमें सवार यात्रियों की तलाश के लिए भारत और बांग्लादेश से सहयोग मांगा है. इसके पूर्व रविवार को सिमलताल का निरीक्षण करने पहुंचे नेपाल सरकार के गृह सचिव एकनारायण अर्याल ने कहा था कि हम विदेशी दूतावास से संपर्क में हैं. उनसे सहयोग मांग कर आगे खोजी अभियान को चलाया जायेगा. इस बीच खबर आयी है कि नेपाल सरकार ने भारत और बांग्लादेश से सहयोग मांगा है. सोमवार को सिमलताल से 50 किलोमीटर से अधिक के दायरे में अत्याधुनिक इको साउंडर तकनीक का प्रयोग करके खोजी कार्य शुरू किया गया है. निजी क्षेत्र की मदद से अत्याधुनिक ”इको साउंडर तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधक प्राधिकरण ने इसकी घोषणा की है. नेपाल पुलिस के प्रवक्ता दान बहादुर कार्की ने सोमवार को बताया कि सुबह से ही नई तकनीक के जरिए सर्च ऑपरेशन जारी है. पुलिस प्रवक्ता श्री कार्की ने कहा, सोनार कैमरा पहले भी उपयोग में था, लेकिन यह नया और पहले से उन्नत है.

यहां बता दे कि नारायणगढ़-मुग्लिन सड़क खंड के अंतर्गत सिमलताल में बीते शुक्रवार सुबह करीब साढ़े तीन बजे हुए भूस्खलन से दो बसें बह गईं और त्रिशुली नदी में गिर गईं. उसी दिन सुबह से ही उस बस और बस में सवार करीब 65 यात्रियों की तलाश जारी है. अब तक केवल 11 शव ही मिले हैं. अन्य यात्रियों और बस का पता नहीं चल पाया है. नेपाली सेना और नेपाल पुलिस की टीम सशस्त्र पुलिस गोताखोरों के साथ एयर ड्रोन, वॉटर ड्रोन, मैग्नेट, दूरबीन, दूरबीन, एंकर हुक और बांस की छड़ियों जैसे उपकरणों के साथ खोज कर रही है. आपदा प्रबंधन विभाग के एसपी जनक पुरी ने बताया कि इको साउंडर नदी में वस्तुओं के आकार के बारे में जानकारी प्रदान करता है, भले ही पानी गंदा क्यों न हो. एसपी श्री पुरी ने बताया कि यह सबकुछ बताता है कि वस्तु गोल है, आयताकार है या त्रिकोणीय है. उन्होंने बताया कि इसकी मदद से आज सुबह बस की तलाश शुरू की गई. फिलहाल बस की तलाश में सशस्त्र पुलिस के 40 प्रशिक्षित जवान राफ्टिंग और मोटरबोट के साथ काम कर रहे हैं. चितवन के सहायक मुख्य जिला अधिकारी के मुताबिक, डिवाइस को मोटर बोट से जोड़कर सर्च ऑपरेशन को आगे बढ़ाया गया है. उपकरण को चलाने वाले तकनीशियन के अनुसार, इसका उपयोग पानी के नीचे की भू-आकृतियों का सर्वेक्षण करने के लिए भी किया जा सकता है. यह एक विशेष प्रकार की ध्वनि उत्पन्न करता है और ध्वनि किसी वस्तु से टकराने के बाद ध्वनि के परावर्तन के आधार पर वस्तु के आकार का पता लगाया जा सकता है. ऐसा माना जा रहा है कि त्रिशुली नदी में लापता बस की तलाश को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है क्योंकि उपकरण द्वारा उत्पन्न ध्वनि और किसी वस्तु से परावर्तित ध्वनि के आधार पर बस के आकार का अनुमान लगाया जा सकता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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