मोतिहारी से शशि चंद्र तिवारी की रिपोर्ट
Mehsi History Champaran: पूर्वी चंपारण का मेहसी केवल एक आधुनिक प्रखंड नहीं है,बल्कि मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था का भी महत्वपूर्ण केंद्र रहा है.अकबरनामा के अनुसार वर्ष 1582 ई.में चंपारण तीन प्रमुख परगनों—मझौआ,सिमरौन और मेहसी—में विभाजित था.यह ऐतिहासिक उल्लेख दर्शाता है कि 16वीं शताब्दी में मेहसी प्रशासनिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता था.
क्या होता था मुगलकाल में परगना
16वीं शताब्दी में मुगल सम्राट अकबर ने अपने विशाल साम्राज्य को सूबों यानी प्रांतों में विभाजित किया था.प्रत्येक सूबे को कई सरकारों (वर्तमान जिलों के समान) में बांटा गया था और हर सरकार के अंतर्गत कई परगने आते थे.आज की प्रशासनिक शब्दावली में परगना को तहसील या अनुमंडल जैसी स्थानीय इकाई माना जा सकता है.परगना केवल राजस्व वसूली का केंद्र नहीं था,बल्कि स्थानीय प्रशासन,भूमि अभिलेख,कृषि व्यवस्था और न्यायिक कार्यों का भी प्रमुख आधार था.प्रत्येक परगना की अपनी राजस्व व्यवस्था,कर,मजदूरी और नाप-तौल के नियम होते थे,जिन्हें परगना दस्तूर और परगना निरिख कहा जाता था.इसके अंतर्गत कई तराफ (उप-क्षेत्र) होते थे,जिसमें गांवों के साथ जंगल और पहाड़ी भूमि भी शामिल थी.
चंपारण का विभाजन और ऐतिहासिक सफर
बम बहादुर सिंह ‘नेपाली’ की पुस्तक ‘चंपारण का इतिहास’ के अनुसार तत्कालीन चंपारण तीन परगनों और 32 तप्पों में विभाजित था.मझौआ,सिमरौन और मेहसी मुख्य परगने थे,जबकि अन्य क्षेत्र तप्पों के रूप में व्यवस्था का हिस्सा थे.इतिहासकार सच्चिदानंद धूमकेतु के अनुसार वर्ष 1816 की सुगौली संधि के बाद चंपारण की भौगोलिक सीमाओं में बड़ा बदलाव हुआ और सिमरौन राज्य का हिस्सा नेपाल में चला गया.इसके बाद ब्रिटिश शासन के दौरान वर्ष 1866 में सारण और चंपारण को अलग-अलग जिले का दर्जा दिया गया.स्वतंत्र भारत में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री केदार पाण्डेय के कार्यकाल में अविभाजित चंपारण को पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण के रूप में दो जिलों में बांट दिया गया.अकबरकालीन अभिलेखों में मेहसी का प्रमुख स्थान होना इसके चार शताब्दियों से भी अधिक पुराने गौरवशाली इतिहास का जीवंत प्रमाण है.
ये भी पढ़ें: प्रेमी जोड़े को बंधक बनाकर मुंडन करने वाले सभी 7 आरोपी पुलिस गिरफ्त में
