मोतिहारी से इंतेजारुल हक की रिपोर्ट
Anand Mohan Statement: शिवहर के पूर्व सांसद आनंद मोहन ने मोतिहारी में आयोजित महाराजा प्रताप सिंह जयंती पखवाड़ा समारोह के दौरान राजनीतिक हिस्सेदारी को लेकर बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र संख्या बल का गणित है. यदि राजपूत समाज की संख्या सर्वाधिक है और मुख्यमंत्री पद नहीं मिलता, तो कम से कम उपमुख्यमंत्री पद या प्रभावी मंत्रालय मिलना चाहिए. उन्होंने कहा, “हम लोग यहां झाल बजाने के लिए नहीं बैठे हैं.” उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
राजनीतिक हिस्सेदारी को लेकर सरकार को दी चेतावनी
मोतिहारी के बापू प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आनंद मोहन ने कहा कि यदि राजपूत समाज को सवर्ण आयोग, उपमुख्यमंत्री पद या मजबूत मंत्रालय में सम्मानजनक हिस्सेदारी नहीं मिलेगी तो समाज भविष्य में नया राजनीतिक विकल्प चुनने के लिए स्वतंत्र होगा. उन्होंने कहा कि समाज अब अपने अधिकारों के लिए मजबूती से आवाज उठाएगा.
2029 तक का दिया राजनीतिक अल्टीमेटम
पूर्व सांसद ने स्पष्ट कहा कि वर्ष 2029 तक जो राजनीतिक दल राजपूत समाज को सम्मान और उचित भागीदारी देगा, समाज उसी के साथ रहेगा. उन्होंने इसे समाज के स्वाभिमान से जुड़ा मुद्दा बताते हुए कहा कि सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा.
बेटे चेतन आनंद को मंत्री नहीं बनाए जाने पर जताई नाराजगी
आनंद मोहन ने अपने पुत्र एवं नवीनगर विधायक चेतन आनंद को मंत्री नहीं बनाए जाने पर भी नाराजगी व्यक्त की. उन्होंने हालिया सर्वे रिपोर्टों को “कड़वा” बताते हुए आरोप लगाया कि जानबूझकर ऐसी रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसमें चेतन आनंद की हार की संभावना दिखाई जा रही है. उन्होंने कहा कि पार्टी के लिए समर्पित लोगों की अनदेखी कर ऐसे लोगों को आगे बढ़ाया गया जिनका संगठन के प्रति कोई विशेष योगदान नहीं रहा.
सांसदों और पार्टी के नेताओं पर भी साधा निशाना
उन्होंने कहा कि जब भी वह अपने समाज के अधिकारों की बात करते हैं, पार्टी के भीतर ही कुछ लोग विरोध करने लगते हैं. साथ ही समाज के उन जनप्रतिनिधियों पर भी सवाल उठाया जो संसद तक तो पहुंचे, लेकिन समाज के मुद्दों को मजबूती से नहीं उठा सके.
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ बयान
आनंद मोहन के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. राजनीतिक गलियारों में भी उनके बयान को लेकर चर्चाएं तेज हैं. कई लोग इसे आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक संकेत के रूप में देख रहे हैं.
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