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Home बिहार मधुबनी मधुबनी: श्रीकृष्ण के मथुरा जाने के वियोग में सुध-बुध खो बैठीं गोपियां, भावुक हुए श्रद्धालु

मधुबनी: श्रीकृष्ण के मथुरा जाने के वियोग में सुध-बुध खो बैठीं गोपियां, भावुक हुए श्रद्धालु

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मधुबनी: श्रीकृष्ण के मथुरा जाने के वियोग में सुध-बुध खो बैठीं गोपियां, भावुक हुए श्रद्धालु
बरैयाटोल में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा

Madhubani News: मधुबनी नगर क्षेत्र के बरैयाटोल स्थित पंडित कुंजबिहारी मिश्र के आवास पर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन भगवान श्रीकृष्ण के मथुरा गमन, कंस वध तथा राधा-कृष्ण विरह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया गया. कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा.

गोपियों के विरह का किया मार्मिक वर्णन

कथावाचक आचार्य पंडित कुंजबिहारी मिश्र ने कहा कि जब भगवान श्रीकृष्ण कंस वध के उद्देश्य से मथुरा गए, तब नंदगांव की गोपियां विरह में अपनी सुध-बुध खो बैठीं. वे हर समय एक-दूसरे से कान्हा के लौटने की चर्चा करतीं और उनके वियोग में अश्रु बहाती रहती थीं.

उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण के बिना गोकुल का प्रत्येक क्षण गोपियों के लिए पीड़ादायक बन गया था.

विद्यापति की रचना से भावुक हुए श्रद्धालु

कथा के दौरान आचार्य ने महाकवि विद्यापति की प्रसिद्ध रचना—

“चानन भेल विषम सर रे, भूषण भेल भारी, सपनेहु हरि नहि आयल रे, गोकुल गिरधारी”

का भावपूर्ण गायन किया. इस प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया.

राधा की विरह-वेदना का किया चित्रण

कथावाचक ने राधा की विरह-वेदना का मार्मिक वर्णन करते हुए कहा कि श्रीकृष्ण के मथुरा चले जाने के बाद राधा का जीवन पूरी तरह बदल गया. विरह की अग्नि इतनी तीव्र थी कि उन्हें शीतल चंदन भी बाण की तरह चुभने लगा और आभूषण बोझ प्रतीत होने लगे.

उन्होंने बताया कि राधा अपनी पीड़ा उद्धव के माध्यम से श्रीकृष्ण तक पहुंचाना चाहती थीं और अपने प्रेम की गहराई का संदेश देना चाहती थीं.

संगीत और भजनों पर झूमे श्रद्धालु

कथा के दौरान कंस वध सहित अन्य प्रसंगों का भी विस्तार से वर्णन किया गया. बीच-बीच में प्रस्तुत भजन और संगीत ने श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया.

कथा के समापन पर श्रीमद्भागवत भगवान की भव्य आरती की गई तथा श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण किया गया.

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