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Home बिहार मधुबनी बलिराजगढ़ में खुदाई का काम प्रभावित, बिना शेड उत्खनन पर उठे सवाल; ASI को भेजी गई शिकायत

बलिराजगढ़ में खुदाई का काम प्रभावित, बिना शेड उत्खनन पर उठे सवाल; ASI को भेजी गई शिकायत

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बलिराजगढ़ में खुदाई का काम प्रभावित, बिना शेड उत्खनन पर उठे सवाल; ASI को भेजी गई शिकायत
AI जेनरेटेड फोटो

Balirajgarh Archaeological Excavation: मधुबनी जिले के ऐतिहासिक बलिराजगढ़ में चल रहा पुरातात्विक उत्खनन लगातार बारिश के कारण प्रभावित हो गया है. 28 मार्च से शुरू हुए इस अभियान में अब तक बनाए गए छह ट्रंच में से केवल एक ट्रंच में ही खुदाई का कार्य जारी है, जबकि शेष पांच ट्रंचों में काम फिलहाल रोक दिया गया है.

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बारिश के बीच शेड लगाने और भराई का काम

सूत्रों के अनुसार, जिन ट्रंचों की खुदाई हो चुकी है, वहां फिलहाल बिसात बत्ती (सुरक्षात्मक) शेड लगाने और निकली हुई मिट्टी से भराई का कार्य किया जा रहा है, ताकि बारिश से उत्खनन स्थल को नुकसान न पहुंचे.

तीन महीने की खुदाई में मिले कई दुर्लभ पुरावशेष

करीब तीन महीने से चल रहे उत्खनन के दौरान कई दुर्लभ पुरावशेष मिलने की जानकारी सामने आई है. इसे ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है. हालांकि, इसी बीच उत्खनन की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं.

बिना शेड खुदाई पर विशेषज्ञ ने जताई आपत्ति

पुरातत्व विभाग (स्टेट) के कन्वेंशनल शिवकुमार मिश्र ने उत्खनन में बरती जा रही कथित लापरवाही पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है. उन्होंने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के महानिदेशक को पत्र भेजकर कहा है कि बिना सुरक्षात्मक शेड के उत्खनन कराने से पुरावशेषों के क्षतिग्रस्त होने और महत्वपूर्ण अवशेषों के नष्ट होने की आशंका है.

उन्होंने यह भी कहा कि लगातार बारिश से लेयर मार्किंग को भी नुकसान पहुंच सकता है, जिससे वैज्ञानिक अध्ययन प्रभावित हो सकता है.

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सुरक्षा बढ़ाई गई, एक ही गेट से हो रहा प्रवेश

सूत्रों के अनुसार सुरक्षा कारणों से बलिराजगढ़ के सभी प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए हैं. अब उत्खनन कार्य में लगे कर्मियों का प्रवेश केवल एक निर्धारित गेट से कराया जा रहा है. इससे गढ़ परिसर में मवेशियों और अनधिकृत लोगों की आवाजाही भी बंद हो गई है.

आगे मौसम पर रहेगी नजर

फिलहाल उत्खनन कार्य काफी हद तक मौसम पर निर्भर हो गया है. बारिश थमने के बाद ही बंद पड़े ट्रंचों में दोबारा खुदाई शुरू होने की संभावना है. वहीं, उत्खनन स्थल की सुरक्षा और पुरावशेषों के संरक्षण को लेकर विशेषज्ञों की आपत्तियों पर संबंधित विभाग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है.

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