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Home बिहार मधेपुरा सदर अस्पताल बना बीमारियों का गढ़, ऑक्सीजन प्लांट के पास खुले में फेंका जा रहा बायोमेडिकल कचरा

सदर अस्पताल बना बीमारियों का गढ़, ऑक्सीजन प्लांट के पास खुले में फेंका जा रहा बायोमेडिकल कचरा

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सदर अस्पताल बना बीमारियों का गढ़, ऑक्सीजन प्लांट के पास खुले में फेंका जा रहा बायोमेडिकल कचरा
ऑक्सीजन प्लांट के पास खुले में फेंका गया कचरा

Sadar Hospital Medical Waste: मधेपुरा जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल प्रबंधन की एक बेहद गंभीर और संवेदनहीन लापरवाही सामने आई है. मरीजों को जीवनदान देने वाला सदर अस्पताल खुद संक्रमण और जानलेवा बीमारियों का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है. अस्पताल परिसर के भीतर और बाह्य क्षेत्रों में चारों तरफ जैविक व रासायनिक अपशिष्ट पदार्थों (Medical Waste) का खुला जमावड़ा लगा हुआ है. स्थिति इतनी विकट हो गई है कि अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को यह डर सताने लगा है कि वे अपनी पुरानी बीमारी ठीक कराने के बजाय कहीं यहाँ से कोई नया घातक संक्रमण लेकर न लौटें.

सफाई के नाम पर लाखों का वारा-न्यारा; ऑक्सीजन प्लांट के पास लगा अंबार

  • बजट की बर्बादी: ज्ञात हो कि सदर अस्पताल में प्रतिमाह साफ-सफाई के नाम पर प्रशासनिक स्तर से लाखों रुपये की मोटी राशि खर्च की जा रही है. इसके बावजूद कचरा उठाव करने वाली संबंधित एजेंसियां बिना उचित कार्य किए केवल कागजी खानापूर्ति कर मोटी रकम कमा रही हैं.
  • संवेदनशील स्थल पर डंपिंग: अस्पताल के भीतर वैसे तो मेडिकल कचरे के पृथक्करण (Segregation) के लिए चार अलग-अलग रंग के बॉक्स लगाने का कानूनी प्रावधान है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है. अस्पताल के महत्वपूर्ण ऑक्सीजन प्लांट के ठीक पीछे और उससे सटे सब्जी मंडी क्षेत्र के पास खुलेआम बायोमेडिकल कचरा फेंक कर उसे लावारिस छोड़ दिया जा रहा है.
  • दिन-रात मच्छरों का तांडव: खुले में पड़े इस गीले और जैविक कचरे से उठने वाली भयानक दुर्गंध के कारण अब केवल शाम को ही नहीं, बल्कि दिन के उजाले में भी मच्छरों का भारी प्रकोप बना रहता है, जिससे पूरे इलाके में मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया फैलने की प्रबल आशंका बनी हुई है.

सुलगते केमिकल कचरे से घुट रहा दम; नशेड़ियों के लिए सेफ जोन

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि अस्पताल के सफाई कर्मी हर रोज निकलने वाले इस बायोवेस्ट को किसी अधिकृत एजेंसी के हवाले करने के बजाय ऑक्सीजन प्लांट के पीछे ही इकट्ठा करके सरेआम आग लगा देते हैं. जब पछुआ हवा चलती है, तो इस प्लास्टिक और केमिकल कचरे के जलने से निकला जहरीला धुआं पूरे अस्पताल के वार्डों में भर जाता है, जिससे प्रसूति महिलाओं और नवजात शिशुओं का दम घुटने लगता है. इससे सांस और फेफड़ों की गंभीर बीमारियां हो रही हैं. सबसे खतरनाक बात यह है कि नशे की प्रवृत्ति वाले स्थानीय युवा इस कचरे में फेंके गए इस्तेमाल शुदा सिरिंज और इंजेक्शन को उठाकर दोबारा नशा करने के लिए प्रयोग कर रहे हैं.

Sadar Hospital Medical Waste: मवेशियों और सब्जी मंडी पर मंडराया संकट; ग्राहकों ने बनाई दूरी

Sadar Hospital Medical Waste
सदर अस्पताल बना बीमारियों का गढ़, ऑक्सीजन प्लांट के पास खुले में फेंका जा रहा बायोमेडिकल कचरा 3
  • गायों के पेट में जा रहा जहर: कचरे में खाने-पीने की सामग्रियों के अवशेष और महिला वार्ड से निकले गंदे व संक्रमित कपड़े होने के कारण दिनभर आवारा पशु और गायें इसमें मुंह मारने को विवश हैं. पशु चिकित्सकों के अनुसार, इन कचरों के साथ प्लास्टिक, सुई और दवाओं के रासायनिक अवशेष खाने से मवेशियों के शरीर में धीमा जहर फैल रहा है, जिससे कई दुधारू पशु असमय मौत के गाल में समा सकते हैं.
  • सब्जी मंडी में पसरा सन्नाटा: चूंकि यह डंपिंग यार्ड शहर की मुख्य सब्जी मंडी से बिल्कुल सटा हुआ है, जहां रोजाना सैकड़ों लोग खरीदारी करने आते हैं. दुर्गंध और उड़ते हुए कीटाणुओं के डर से अब ग्राहकों ने इस मार्ग से आना कम कर दिया है, जिससे स्थानीय दुकानदारों का व्यापार चौपट होने की कगार पर पहुंच गया है.

स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और समाजसेवियों ने इस संबंध में जिला पदाधिकारी (डीएम) और सिविल सर्जन से लिखित शिकायत कर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के नियमों के तहत बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट एक्ट का सख्ती से अनुपालन कराने की मांग की है. लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ऑक्सीजन प्लांट के पास से इस कचरे को हटाकर क्षेत्र को सैनिटाइज नहीं किया गया, तो वे अस्पताल प्रशासन के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन को विवश होंगे.

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