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ठाकुरगंज के चाय बागान बने नशेड़ियों के सुरक्षित अड्डे

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ठाकुरगंज के चाय बागान बने नशेड़ियों के सुरक्षित अड्डे

सुनसान इलाकों में दिनभर चलता है स्मैक व गांजे का खेल, पुलिस की गश्ती नहीं होने से बढ़ी परेशानी

ठाकुरगंज. शहर में कानून-व्यवस्था व सामाजिक सुरक्षा पर सवाल खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है. ठाकुरगंज शहर के विभिन्न चाय बागान नशेड़ियों के मुख्य ठिकाने बन गये हैं. ये चाय बागान खुले व सुनसान होने के कारण इन जगहों पर बेधड़क स्मैक समेत अन्य नशीले पदार्थों के सेवन की गतिविधियां हो रही हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि नशेड़ी दिन-भर इन बागानों के अंदर जुटे रहते हैं. इसे पूरी तरह नशे का अड्डा बना रखा है. हैरानी की बात यह है कि इन संवेदनशील इलाकों में पुलिस की निगरानी न के बराबर है.

नशे के सेटअप के साथ घंटों बैठते हैं युवक

नगर के पश्चिमी इलाके में बड़ी संख्या में चाय बागान हैं. चहारदीवारी नहीं होने के कारण ये बागान पूरी तरह खुले रहते हैं. नशेड़ी युवक इन सुनसान जगहों पर घंटों बैठते हैं. स्मैक, गांजा, शराब सहित अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं. बाहर से देखने पर यह स्थान सामान्य बागान जैसा प्रतीत होता है, लेकिन अंदर जाने पर नशे करने का पूरा सेटअप और सामग्री बिखरी नजर आती है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, नशेड़ियों को न किसी का डर है, न ही पकड़े जाने की चिंता, क्योंकि यहां उन्हें रोकने-टोकने वाला कोई नहीं है.

शहर में बढ़ रही असुरक्षा, प्रबुद्ध नागरिक चिंतित

इस गंभीर मामले में शहर के प्रबुद्ध नागरिक प्रदीप दत्ता, प्रमोद राज चौधरी व अतुल सिंह आदि ने कहा कि ठाकुरगंज में नशेड़ियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. पहले ये गतिविधियां केवल रेलवे ट्रैक के आसपास सीमित थीं, अब मुख्य सड़कों के किनारे और सार्वजनिक स्थानों के पास भी नशेड़ी बेधड़क दिखाई देने लगे हैं. मुख्य पार्षद सिकंदर पटेल ने भी इस पर गहरी चिंता जतायी है. उनका कहना है कि अगर पुलिस प्रशासन की ओर से जल्द कड़ी कार्रवाई नहीं की गयी, तो शहर में गंभीर अपराध व सामाजिक असुरक्षा के मामले बढ़ सकते हैं.

प्रशासन व पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल

बड़ा सवाल यह है कि इतनी गंभीर गतिविधियों के बावजूद प्रशासन व पुलिस की नजर इन ठिकानों पर क्यों नहीं पड़ रही है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. नागरिकों ने मांग की है कि पुलिस, नगर पंचायत व प्रशासन संयुक्त रूप से इन सुनसान स्थलों पर निगरानी व सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करे ताकि नशे के इस बढ़ते जाल पर सख्ती से लगाम लगायी जा सके.

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