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Home बिहार किशनगंज 24 करोड़ का पुल तैयार, लेकिन रास्ता अधूरा,किशनगंज में आज भी नाव के सहारे जिंदगी जी रहे हजारों ग्रामीण

24 करोड़ का पुल तैयार, लेकिन रास्ता अधूरा,किशनगंज में आज भी नाव के सहारे जिंदगी जी रहे हजारों ग्रामीण

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24 करोड़ का पुल तैयार, लेकिन रास्ता अधूरा,किशनगंज में आज भी नाव के सहारे जिंदगी जी रहे हजारों ग्रामीण
नाव के सहारे गुजर रही हजारों लोगों की जिंदगी

ठाकुरगंज(किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट

Mechi River Kishanganj: किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड में बहने वाली मैंची नदी सिर्फ एक जलधारा नहीं, बल्कि हजारों ग्रामीणों की सबसे बड़ी मजबूरी बन चुकी है. दल्लेगांव घाट पर हर दिन महिलाएं, बच्चे, किसान, मजदूर, छात्र और बुजुर्ग छोटी नावों में क्षमता से अधिक यात्रियों के साथ नदी पार करने को मजबूर हैं. हैरानी की बात यह है कि करीब 24 करोड़ रुपये की लागत से पुल का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन एप्रोच रोड अधूरी होने के कारण आज भी लोग उस पुल का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं.

नाव ही सड़क, नाव ही जिंदगी का सहारा

दल्लेगांव घाट पर सुबह होते ही लोगों की भीड़ जुटने लगती है. किसी को स्कूल जाना होता है, किसी को अस्पताल, कोई बाजार जाता है तो कोई खेत की ओर निकलता है.

दल्लेगांव, भवानीगंज, बैगनबाड़ी, तेलीभीट्टा और पाठामारी समेत कई गांवों के हजारों लोगों के लिए नाव ही आवागमन का एकमात्र साधन है.

ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार छोटी नावों में क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाकर नदी पार कराई जाती है. बरसात के मौसम में जब नदी का जलस्तर बढ़ जाता है तो यह सफर और भी खतरनाक हो जाता है.

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पुल तैयार, लेकिन अधूरी सड़क ने रोक दिया रास्ता

ग्रामीणों की सबसे बड़ी नाराजगी इस बात को लेकर है कि समस्या का समाधान आधा होकर रह गया है.

वर्ष 2019 में करीब 24 करोड़ रुपये की लागत से मैंची नदी पर पुल निर्माण का काम शुरू हुआ था. पुल का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन एप्रोच पथ और संपर्क मार्ग का निर्माण अधूरा है.

नतीजा यह है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद पुल आम लोगों के किसी काम का नहीं है. लोग आज भी उसी पुराने और जोखिम भरे नाव मार्ग पर निर्भर हैं.

Mechi River Kishanganj: अस्पताल, स्कूल और बाजार… हर सफर में खतरा

इस समस्या का सबसे ज्यादा असर आम लोगों के दैनिक जीवन पर पड़ रहा है.

अगर कोई मरीज अचानक बीमार हो जाए तो अस्पताल पहुंचाना चुनौती बन जाता है. स्कूली बच्चों को रोज नाव से नदी पार करनी पड़ती है. किसानों को खेत और मंडी जाने के लिए भी यही रास्ता अपनाना पड़ता है.

बरसात में जब नदी उफान पर होती है, तब हर सफर लोगों के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं होता.

जल्द पूरा हो एप्रोच रोड

स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल बन जाने के बावजूद संपर्क मार्ग अधूरा छोड़ देना विकास की अधूरी तस्वीर है.

ग्रामीणों ने सरकार और संबंधित विभाग से मांग की है कि एप्रोच रोड और संपर्क मार्ग का निर्माण जल्द पूरा कराया जाए, ताकि हजारों लोगों को रोज जान जोखिम में डालकर नाव से नदी पार न करनी पड़े.

फिलहाल दल्लेगांव घाट पर हर सुबह और हर शाम वही दृश्य दिखाई देता है. नाव किनारे लगती है, लोग उसमें चढ़ते हैं और अपनी मंजिल की ओर निकल पड़ते हैं. फर्क सिर्फ इतना है कि उनके हर सफर के साथ खतरा भी चलता है.

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