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Home बिहार किशनगंज डीपीओ को रंगेहाथ घूष लेते निगरानी टीम ने किया गिरफ्तार

डीपीओ को रंगेहाथ घूष लेते निगरानी टीम ने किया गिरफ्तार

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डीपीओ को रंगेहाथ घूष लेते निगरानी टीम ने किया गिरफ्तार

डीपीओ पर पहले भी भ्रष्टाचार करने का लगता रहा है आरोप

निगरानी विभाग की दूसरी कार्रवाई से जिले के भ्रष्ट अधिकारियों व कर्मचारियों में हड़कंप

किशनगंज

जिले में चार दिनों में निगरानी विभाग की दो बड़ी कार्रवाई से भ्रष्टाचारियों में हड़कंप मच गया है. दूसरी बार विभाग की विशेष इकाई के द्वारा कार्रवाई की गई है. पहली कार्रवाई में खनन कार्यालय के दो कर्मियों को निगरानी विभाग के अधिकारियों ने घुस लेते हुए गिरफ्तार किया था. इस बार समेकित बाल विकास योजना की प्रभारी डीपीओ के विरुद्ध कार्रवाई की गई है. निगरानी विभाग की टीम के दस्तक देने की भनक पहले से किसी को भी नहीं थी. बताया जाता है कि टीम तीन चार दिनों से कार्रवाई के लिए रणनीति बना रही थी. निगरानी विभाग की विशेष इकाई शुक्रवार को करीब सात बजे समेकित बाल विकास योजना की प्रभारी डीपीओ टू अनीता कुमारी के डुमरिया भट्टा स्थित किराए के आवास के बाहर पहुंची थी. डीपीओ का आवास एनएच 27 डुमरिया भट्टा से करीब है. विशेष निगरानी इकाई की आठ सदस्सीय टीम वाहन को एनएच साइड में लगाकर पैदल ही डीपीओ के आवास के बाहर पहुंची थी टीम में निगरानी इकाई की महिला कर्मी भी शामिल थी. इसके बाद जैसे ही घूस की रकम पेश की गई, डीपीओ को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया.

चार दिनों पूर्व भी हुई थी कार्रवाई

निगरानी विभाग की टीम के द्वारा मंगलवार को भी कार्रवाई की गई थी. खनन कार्यालय के प्रधान लिपिक अशोक कुमार चौधरी को आठ हजार रुपए व खनन कार्यालय के परिचारी सरोज कुमार को सात हजार रुपए घुस लेते हुए गिरफ्तार किया गया था. पहले विभाग के परिचारी को डुमरिया गर्ल्स हाई स्कूल के पास से व विभाग के प्रधान लिपिक को खनन कार्यालय के पास एक चाय की दुकान में गिरफ्तार किया गया था. पीड़ित चकला निवासी हबीब आलम ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में शिकायत दर्ज करवाई थी.

जहां भी इनकी पोस्टिंग हुई सभी जगह भ्रष्टाचार के कारण विवादों में

रही

आईसीडीएस की चर्चित सीडीपीओ सह प्रभारी डीपीओ अनीता कुमारी को लेकर जिले में यह चर्चा जोरों पर है कि लंबे समय से विवादों और शिकायतों में नाम आने के बावजूद उन पर ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी थी. पूर्णियां जिले के बनमनखी की सीडीपीओ व पूर्णिया की प्रभारी डीपीओ रहते हुए भी अनीता कुमारी भ्रष्टाचार के मामले में निलंबित हो चुकी है. उन पर कटिहार जिले में गबन, अवैध राशि उगाही एवं पद के दुरूपयोग जैसे गंभीर आरोप लगे थे. कटिहार जिले में तत्कालीन डीपीओ की रिपोर्ट पर गबन के मामले में सीडीपीओ के खिलाफ पूर्णियां प्रशासन ने एफआईआर दर्ज करायी थी, जिसमें उनके खिलाफ पुलिस ने आरोप पत्र भी दाखिल हुआ है. कटिहार में लग रहे लगातार आरोपों के बीच उनका तबादला बनमनखी की सीडीपीओ के रूप में किया गया था. बिहार में रसूखदार सीडीपीओ में शामिल रही है. उनकी रसूख का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कटिहार में उनपर कई गंभीर लगे और वहां के डीएम ने विभाग को इस बावत इत्तिला भी किया था. कटिहार डीएम के स्तर से सौंपी गयी रिपोर्ट विभाग में धूल फांकती रही और इनाम में सीडीपीओ को पूर्णिया डीपीओ का अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया. बतौर सीडीपीओ बनमनखी में अनियमित आंगनबाड़ी केन्द्र के संचालन करवाने की शिकायत विभिन्न मंचों के माध्यम से अधिकारियों तक जाती रही, परन्तु इनकी हनक ऐसी कि अधिकारियों ने यहां चुप्पी साधने में ही अपनी भलाई समझी. बताया जा रहा है कि बनमनखी में अपने कार्यकाल के दौरान इसने सारे नियम कानून की धज्जियां उड़ाई. इनकी मनमानी पर स्थानीय अधिकारियों की चुप्पी के बाद स्थानीय कुछ लोगों ने विभाग तक का दरवाजा खटखटाया था. जिसके बाद विभाग ने उन्हें निलंबित किया था. सेविका बहाली में राशि की उगाही करने, सेविकाओं को मानसिक तौर पर प्रताड़ित करने और टीएचआर वितरण में लापरवाही बरतने समेत कई गंभीर आरोप इन पर लगते रहें हैं. पश्चिमी चंपारण के तत्कालीन डीएम डॉ. नीलेश रामचंद्र देवड़े ने सीडीपीओ को भ्रष्टाचार में लिप्त पाया और उन पर दो- दो बार प्रपत्र क के तहत बर्खास्तगी की अनुशंसा की. बावजूद उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई उल्टे उनके प्रोन्नति कर दी गई.

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