दीपों की रोशनी से जगमगा उठा उत्तरवाहिनी गंगा घाट, महाआरती में उमड़ा आस्था का सैलाब

Parbatta Ganga Aarti: खगड़िया के परबत्ता स्थित उत्तरवाहिनी गंगा घाट पर भव्य गंगा महाआरती का आयोजन हुआ. शंखनाद, वैदिक मंत्रों और दीपों की रोशनी के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मां गंगा की आराधना की.

By Pratyush Prashant | June 30, 2026 9:59 AM

परबत्ता (खगड़िया) से पलटु झा की रिपोर्ट.

Parbatta Ganga Aarti: शाम ढलते ही उत्तरवाहिनी गंगा घाट का नजारा पूरी तरह बदल गया. शंखनाद की गूंज, घंटियों की मधुर ध्वनि, वैदिक मंत्रों का उच्चारण और हजारों दीपों की जगमगाहट ने पूरे घाट को आध्यात्मिक आभा से भर दिया.

सियादतपुर-अगुवानी पंचायत स्थित उत्तरवाहिनी गंगा तट पर आयोजित गंगा महाआरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए. लोगों ने मां गंगा के चरणों में दीप अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि, क्षेत्र के विकास और समाज में शांति की कामना की. महाआरती के दौरान घाट पर ऐसा दृश्य बना, जिसे श्रद्धालु अपने मोबाइल कैमरों में कैद करते नजर आए.

शंखनाद और वैदिक मंत्रों के बीच गूंजा मां गंगा का जयघोष

महाआरती की शुरुआत वैदिक विधि-विधान से हुई. पंडित प्रवीण झा, आचार्य चमन सिंह, रिंकी कुमारी और हरिशंकर चौधरी ने विधिवत पूजन कराया. इसके बाद बाबा वैद्यनाथ धाम से पहुंचे आचार्यों ने पारंपरिक शैली में मां गंगा की महाआरती संपन्न कराई.

सांकेतिक तस्वीर

जैसे ही विशाल दीपमालाएं लहराईं, पूरा घाट ‘हर-हर गंगे’ और ‘जय मां गंगे’ के जयघोष से गूंज उठा. श्रद्धालु हाथ जोड़कर आरती में शामिल हुए और कई लोगों ने दीपदान कर मां गंगा से अपने परिवार की खुशहाली की प्रार्थना की.

हर पूर्णिमा पर बन रहा है आस्था का केंद्र

स्थानीय लोगों के अनुसार उत्तरवाहिनी गंगा तट पर प्रत्येक पूर्णिमा को महाआरती का आयोजन अब एक नियमित धार्मिक परंपरा का रूप ले चुका है. इससे न केवल श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है, बल्कि क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान भी मजबूत हो रही है.

कार्यक्रम के दौरान भाजपा नेता चमन सिंह ने कहा कि परबत्ता विधायक बाबूलाल सौर्य के सहयोग से हर पूर्णिमा पर गंगा महाआरती आयोजित की जा रही है. इसका उद्देश्य क्षेत्र में आध्यात्मिक वातावरण को बढ़ावा देना और लोगों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है.

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स्थानीय लोगों में दिखा उत्साह, पर्यटन की भी बढ़ रही उम्मीद

महाआरती में आसपास के गांवों के अलावा दूर-दराज के श्रद्धालु भी पहुंचे. स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि इस तरह के धार्मिक आयोजन नियमित रूप से होते रहे और घाट पर आधारभूत सुविधाओं का विस्तार किया गया, तो उत्तरवाहिनी गंगा घाट धार्मिक पर्यटन का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है. इससे स्थानीय व्यापार, छोटे दुकानदारों और नाविकों को भी आर्थिक लाभ मिलेगा.

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Parbatta Ganga Aarti: आस्था के साथ सामाजिक जुड़ाव का भी बना संदेश

महाआरती केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह सामाजिक एकता और सामूहिक भागीदारी का भी प्रतीक बनी. कार्यक्रम में पूर्व मुखिया पवन चौधरी, अनिल कुमार, मुखिया देवेंद्र शर्मा उर्फ भुटन शर्मा, मनोज चौधरी, रुपेश कुमार उर्फ पिंटू, ज्ञानशंकर, राजीव चौधरी सहित कई जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे.

उत्तरवाहिनी गंगा घाट पर हर पूर्णिमा को होने वाली यह महाआरती अब स्थानीय लोगों के लिए केवल पूजा का अवसर नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति, आस्था और सामुदायिक एकजुटता को सहेजने का माध्यम भी बनती जा रही है.

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