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कटाव से बचाव को कराये जा रहे कार्य में अनियमिता

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कटाव से बचाव को कराये जा रहे कार्य में अनियमिता

– ग्रामीणों में आक्रोश, डीएम से जांच की मांग आजमनगर महानंदा नदी में बाढ़ पूर्व बाढ़ संघर्षात्मक कार्य विभाग द्वारा कराये जा रहे हैं. हर वर्ष महानंदा नदी के जलस्तर में वृद्धि को देख प्रखंड क्षेत्र के बहरखाल में भीषण कटाव को रोकने के लिए संघर्षात्मक कार्य किया जा रहा है. बाढ़ के समय कटाव इतनी तेजी से होती है कि गांव के हजारों लोगों का गला सूखने लगता है. वर्ष 2017 में आये विनाशकारी बाढ़ का डर लोगों को आज भी सता रही है. बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारियों से आमलोगों का भरोसा अब उठने लगा है. कटाव स्थल पर बाढ़ डिवीजन के सहायक कार्यपालक अभियंता से लेकर कनीय अभियंता तक की मौजूदगी में कार्य किया जा रहा है. किए जा रहे कार्य में एनसी में जो बोरी भर कर शिफ्टिंग की जा रही है. उसमें निर्धारित वजन से कम भरी जा रही है. बगैर मापी के सिलाई की जा रही है. विभागीय सूत्रों के मुताबिक एक बोरी में 50 केजी बालू भरनी है. बालू की जगह मिट्टी की मिशरण भरी जा रही है. महानंदा के बढ़ते जल स्तर का दबाव कितना संघर्ष कर पायेगा और तटबंध को कितनी मजबूती दे पायेगी वक्त ही बतायेगा. बहरखाल गांव को सुरक्षित बचाने की जद्दोजहद में विभाग औने-पौने काम कर बहरखाल से निकलना चाहती है. जहां तमाम नियम कायदों को दरकिनार कर आनन-फानन में किया जा रहा है. जिसमें कार्य की गुणवत्ता पर लोगों द्वारा सवाल खड़े किए जा रहे हैं. लोग कहते हैं कि यहां पर विभागीय निगरानी नहीं हो रही है. बल्कि विभाग के संरक्षण में गुणवत्ताहीन कार्य किया जा रहा है. साथ ही स्थानीय ग्रामीणों ने कहा बगैर वजन किए बोरी भरी जा रही और इस कार्य के लिए बतौर संवेदक जिसे नियुक्त किया गया है. वो वहां पर नहीं रहते हैं. उनके मुंशी द्वारा नियम कायदों को दरकिनार कर कार्य किया जा रहा है. मानो महानंदा के बढ़ते जलस्तर के बीच संघर्षात्मक कार्य के नाम पानी में लूट की खुली छूट बाढ़ डिवीजन के द्वारा दे दी गई है. इसमें कहीं ना कहीं विभागीय दिलचस्पी भी दिख रही. स्थानीय लोगों ने कहा विभाग के एसडीओ व जेई की मौजूदगी में इस तरह गुणवत्ताहीन कार्य किया जाना कहीं ना कहीं उनकी मौन सहमति की ओर इशारा कर रहा है. जिला प्रशासन ने अगर कमर नहीं कसी तो बहरखाल के लोगों का आशियाने को उजड़ने में समय नहीं लगेगा. ग्रामीणों का आरोप है कि कार्य स्थल पर जिसकी निगरानी पूरी तरह से होनी चाहिए थी. आखिर क्यों नहीं की जा रही है. एसडीओ अमरनाथ सिंह ने जानकारी देते हुए कहा कि बहरखाल में काम चल रहा है. एनसी तथा ईसी बैग एवं तीन लियर गेबीयन बैग भरी जा रही है. 2 करोड़ 8 लाख रुपए की लागत से स्पर्श संख्या 15,22,35,42 के बीच में कार्य किया जा रहा है. जिसकी लम्बाई लगभग 495 मीटर है. संवेदक के रूप में टीकेजे इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के द्वारा किया जा रहा है. दूसरी ओर ग्रामीणों ने उक्त मामले में जिलाधिकारी कटिहार से जांच कर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

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