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Home बिहार कैमूर मर्ज हो चुके विद्यालयों से भी मांगा गया उपयोगिता प्रमाणपत्र, शिक्षकों में रोष

मर्ज हो चुके विद्यालयों से भी मांगा गया उपयोगिता प्रमाणपत्र, शिक्षकों में रोष

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मर्ज हो चुके विद्यालयों से भी मांगा गया उपयोगिता प्रमाणपत्र, शिक्षकों में रोष
सांकेतिक तस्वीर

शिक्षा विभाग के आदेश से 340 विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों की परेशानी बढ़ी बिना सत्यापन फरमान, बंद हो चुके स्कूलों को भी थमाया नोटिस वेतन रोकने की चेतावनी से हड़कंप, वाट्सएप ग्रुपों में शिक्षकों ने निकाला आक्रोश भभुआ नगर. जिला शिक्षा विभाग द्वारा जारी एक आदेश ने जिले के 340 विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों की परेशानी बढ़ा दी है. जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) शंभू कुमार सिंह द्वारा जारी निर्देश में सत्र 2024-25 व 2025-26 में खर्च की गयी राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) तीन दिनों के अंदर जमा करने को कहा गया है. आदेश में स्पष्ट उल्लेख है कि निर्धारित समय में जवाब नहीं देने पर कार्रवाई की जायेगी तथा जवाब मिलने तक वेतन भी स्थगित रहेगा. आदेश मिलते ही शिक्षकों के बीच हड़कंप मच गया है. इस आदेश की सबसे बड़ी विसंगति यह सामने आयी है कि कई ऐसे विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को भी नोटिस भेजा गया है, जो पांच वर्ष पहले ही अन्य विद्यालयों में मर्ज हो चुके हैं. ऐसे विद्यालयों में न तो कोई राशि आवंटित हुई है व न ही कोई खर्च हुआ है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब विद्यालय अस्तित्व में ही नहीं है तो उपयोगिता प्रमाण पत्र कौन व कैसे देगा. यह स्थिति केवल एक-दो जगह की नहीं, बल्कि लगभग सभी प्रखंडों में देखने को मिल रही है. कई प्रधानाध्यापकों का कहना है कि उन्होंने संबंधित सत्र का उपयोगिता प्रमाण पत्र पहले ही विभाग में जमा कर दिया है व उसकी रिसीविंग भी उनके पास मौजूद है. इसके बावजूद उन्हें दोबारा नोटिस भेजकर जवाब तलब किया गया है. इससे यह प्रतीत होता है कि विभागीय स्तर पर अभिलेखों का सही ढंग से संधारण नहीं हो रहा है. ऐसे मामलों में वेतन स्थगन की चेतावनी ने शिक्षकों की चिंता और बढ़ा दी है. व्हाट्सएप ग्रुप में फूटा आक्रोश आदेश जारी होते ही इसकी कॉपी जैसे ही प्रधानाध्यापकों के वाट्सएप पर पहुंची, विभागीय ग्रुपों में तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगीं. शिक्षक खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं. कई प्रधानाध्यापक लिख रहे हैं कि जब वे पहले ही यूसी जमा कर चुके हैं तो फिर बार-बार क्यों मांगा जा रहा है. कुछ ने यह भी कहा कि बिना सत्यापन के इस तरह का आदेश जारी करना विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है. गौरतलब है कि शिक्षा विभाग का यह पहला मामला नहीं है, जब इस तरह की त्रुटियां सामने आयी हों. समय-समय पर ऐसे आदेश जारी होते रहे हैं, जो बाद में संशोधित या शुद्धि पत्र के माध्यम से ठीक किये जाते हैं. फिलहाल इस आदेश ने शिक्षकों के बीच असमंजस व असंतोष की स्थिति पैदा कर दी है.

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