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Home बिहार कैमूर यूजीसी के खिलाफ सवर्ण समाज का हल्लाबोल, शहर में निकाला गया आक्रोश मार्च

यूजीसी के खिलाफ सवर्ण समाज का हल्लाबोल, शहर में निकाला गया आक्रोश मार्च

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यूजीसी के खिलाफ सवर्ण समाज का हल्लाबोल, शहर में निकाला गया आक्रोश मार्च

परशुराम व करणी सेना के बैनर तले पुतला दहन, सरकार के खिलाफ की नारेबाजी यूजीसी कानून वापस लेने की मांग, आंदोलन जारी रखने की चेतावनी भभुआ सदर. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) पर केंद्र की मोदी सरकार की हालिया नीतियों के विरोध में शुक्रवार को कैमूर जिले में सवर्ण समाज का गुस्सा फूट पड़ा. इसको लेकर परशुराम और करणी सेना सहित समस्त सवर्ण समाज के बैनर तले कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर जोरदार आक्रोश मार्च निकाला और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की. यह आक्रोश मार्च भभुआ शहर के नगरपालिका मैदान से निकाला गया था, जो पूरे शहर में घूमकर एकता चौक पर समाप्त हुआ, जहां भारत सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए शहर के हृदय स्थली एकता चौक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन किया. विरोध प्रदर्शन के दौरान परशुराम सेना के प्रदेश अध्यक्ष विनोद तिवारी और करणी सेना प्रदेश प्रवक्ता प्रिंस सिंह ने यूजीसी पर माननीय सुप्रीम कोर्ट के रुख पर संतोष जताया और कोर्ट के रोक का स्वागत करते हुए न्यायपालिका को धन्यवाद दिया है. नेताओं व कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि कोर्ट की रोक एक सकारात्मक कदम है, लेकिन यह अंतिम जीत नहीं है. जब तक यूजीसी को पूर्ण रूप से हटाया नहीं जाता या सवर्ण समाज के हितों के खिलाफ नीतियों को वापस नहीं लिया जाता, तब तक हमारा यह आक्रोश मार्च और आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा. हम अपने अधिकारों के लिए पीछे हटने वाले नहीं हैं. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में सभी छात्र एक समान होते हैं, लेकिन यह भाजपा की सरकार उसमें भी विवाद कराने का काम कर रही है. पहले हिंदू मुस्लिम को धर्म के नाम पर लड़वाया, उसके बाद महादलितों को एससी एसटी स्वर्ण में जाति के नाम पर लड़वाया और अब ऊंच नीच दिखाकर यूजीसी कानून के नाम पर लड़वाना चाहता है. अगर सरकार की यही नीति रही तो आने वाले समय में देश में लोग जाति धर्म के नाम पर एक दूसरे से लड़ कर मर जायेंगे और देश में आग का गोला बरसेगा. इसलिए हमलोग मांग करते हैं कि यूजीसी कानून को वापस लिया जाये. शुक्रवार को आयोजित आक्रोश मार्च पुतला दहन कार्यक्रम में परशुराम व करणी सेना के सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल हुए तो स्थानीय लोगों और सवर्ण समाज के युवाओं ने भी इस प्रदर्शन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. अधिकतर प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे समाज की अनदेखी बर्दाश्त नहीं करेंगे और आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और भी धार दी जायेगी, और रेल रोको आंदोलन किया जायेगा.

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