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Home बिहार जमुई सरकारी वेबसाइट से डेटा निकाल दाखिल-खारिज के नाम पर जमुई के किसानों को कॉल कर रहे साइबर ठग

सरकारी वेबसाइट से डेटा निकाल दाखिल-खारिज के नाम पर जमुई के किसानों को कॉल कर रहे साइबर ठग

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सरकारी वेबसाइट से डेटा निकाल दाखिल-खारिज के नाम पर जमुई के किसानों को कॉल कर रहे साइबर ठग
साइबर ठग की सांकेतिक तस्वीर.
मुख्य बातें

बरहट, जमुई से शशिलाल की रिपोर्ट

Cyber Fraud: अब साइबर अपराधियों ने ठगी का नया तरीका अपना लिया है.बरहट अंचल कार्यालय की सरकारी वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन करने वाले किसानों और जमीन मालिकों का डेटा हासिल कर अपराधी उन्हें फोन कर दाखिल-खारिज, म्यूटेशन और अन्य राजस्व संबंधी कार्य जल्द कराने का झांसा दे रहे हैं. इतना ही नहीं, आवेदन और जमीन से जुड़ी सटीक जानकारी बताकर लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश की जा रही है. अब तक बरहट अंचल क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक लोगों के पास ऐसे कॉल आने की पुष्टि हुई है.

Cyber Fraud: आवेदन की पूरी जानकारी बताकर मांग रहे रुपये

साइबर अपराधियों के पास आवेदकों का नाम, मोबाइल नंबर, गांव और आवेदन से जुड़ी जानकारी पहले से मौजूद है. इसी वजह से कई लोग उन्हें सरकारी कर्मचारी समझ बैठते हैं. अंचल कार्यालय के कर्मचारी भी इस नए तरीके की साइबर ठगी से चिंतित हैं.

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सरकारी अमीन से मांगे दो हजार रुपये

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अंचल कार्यालय बरहट, जमुई.

बरहट अंचल कार्यालय में कार्यरत सरकारी अमीन महेंद्र यादव ने बताया कि उन्हें एक मोबाइल नंबर से कॉल कर खुद को अंचल कार्यालय का कर्मचारी बताया गया. कॉल करने वाले ने गुरमाहा गांव के एक आवेदक की जमीन का म्यूटेशन कराने के नाम पर दो हजार रुपये की मांग की. सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि ठग के पास आवेदक की पूरी जानकारी पहले से मौजूद थी. इसकी सूचना तत्काल अंचल अधिकारी को दी गई.

दाखिल-खारिज के नाम पर मांगे दस्तावेज और पैसे

बरहट निवासी चंदन कुमार ने ऑनलाइन दाखिल-खारिज के लिए आवेदन किया था. कुछ दिन बाद उन्हें फोन कर आवेदन स्वीकृत कराने के नाम पर पैसे जमा करने और जमीन के दस्तावेज व्हाट्सऐप पर भेजने को कहा गया. संदेह होने पर उन्होंने अंचल कार्यालय से संपर्क किया, जहां पता चला कि कार्यालय की ओर से ऐसा कोई कॉल नहीं किया गया था. इसके बाद उन्होंने नंबर ब्लॉक कर दिया.

इसी तरह मलयपुर निवासी मनीष सिंह को भी म्यूटेशन के नाम पर रुपये मांगने के लिए फोन किया गया. कार्यालय से पुष्टि करने पर उन्हें साइबर ठगी की जानकारी मिली और वे समय रहते ठगी का शिकार होने से बच गए.

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डेटा सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

लगातार सामने आ रहे मामलों ने सरकारी वेबसाइट पर उपलब्ध आवेदकों के डेटा की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं. आखिर साइबर अपराधियों तक नाम, मोबाइल नंबर, गांव और जमीन से जुड़ी जानकारी कैसे पहुंच रही है? क्या कहीं डेटा लीक हुआ है या फिर सरकारी पोर्टल की किसी तकनीकी कमजोरी का फायदा उठाया जा रहा है? यह अब जांच का विषय बन गया है.

पहले भी सरकारी योजनाओं के नाम पर हो चुकी है ठगी

बरहट थाना क्षेत्र में इससे पहले भी सरकारी योजनाओं का नाम लेकर साइबर ठगी की घटनाएं सामने आ चुकी हैं. एक आंगनबाड़ी लाभार्थी से अधिकारी बनकर ओटीपी लिया गया और उसके बैंक खाते से छह हजार रुपये निकाल लिए गए थे. इस घटना के बाद भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई थी.

अधिकारी और साइबर पुलिस ने जारी की चेतावनी

अंचल अधिकारी मयंक अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि अंचल कार्यालय का कोई भी कर्मचारी फोन कर म्यूटेशन, दाखिल-खारिज या अन्य किसी सरकारी कार्य के लिए रुपये की मांग नहीं करता. उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी अनजान व्यक्ति को पैसे, ओटीपी, बैंक खाते की जानकारी, आधार संख्या या निजी दस्तावेज साझा न करें.

वहीं साइबर डीएसपी अभिषेक कुमार ने बताया कि मामला संज्ञान में है और साइबर अपराधियों पर नजर रखी जा रही है. उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति सरकारी कार्य के नाम पर फोन कर पैसे मांगे तो उसकी सूचना तुरंत साइबर थाना या स्थानीय थाना को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके.

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