गया जी : सिर्फ एक विभाग के भरोसे चल रहा 200 करोड़ का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, मरीज रेफर होने को मजबूर

Magadh Medical Hospital Gaya Ji : गया जी के मगध मेडिकल अस्पताल स्थित सुपर स्पेशियलिटी यूनिट में डॉक्टरों की भारी कमी है. 200 करोड़ की लागत से बनी इस बिल्डिंग के कई विभाग अब तक शुरू नहीं हो सके.

By JITENDRA MISHRA | June 29, 2026 6:52 PM

Magadh Medical Hospital Gaya Ji : अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल अस्पताल परिसर में निर्मित सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल से क्षेत्र के मरीजों को उम्मीद के मुताबिक सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं. बिहार सरकार द्वारा जिला और प्रमंडल स्तर पर रेफरल सिस्टम को कम करने के उद्देश्य से इस अत्याधुनिक यूनिट की स्थापना की गई थी. योजना यह थी कि मगध प्रमंडल के लोगों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए पटना या दिल्ली न जाना पड़े और यहीं उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सके.

सिर्फ यूरोलॉजी विभाग चालू

हालांकि, डॉक्टरों की भारी कमी के चलते पिछले दो वर्षों में इस 200 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनी बिल्डिंग में सिर्फ यूरोलॉजी विभाग ही ‘फुल फ्लेज’ में काम कर पा रहा है. यूरोलॉजी विभाग में नियमित रूप से ओपीडी और ऑपरेशन (सर्जरी) की सुविधा दी जा रही है.

न्यूरो सर्जरी में ऑपरेशन कम, कार्डियोलॉजी में कैथ लैब न होने से मरीज भर्ती नहीं

अस्पताल के अन्य विभागों की स्थिति संतोषजनक नहीं है. न्यूरो सर्जरी विभाग में डॉक्टरों की तैनाती होने के बावजूद यहां बेहद कम ऑपरेशनों को अंजाम दिया जा रहा है, हालांकि यहां ओपीडी की सेवा नियमित मिल रही है. वहीं, कार्डियोलॉजी (हृदय रोग) विभाग की स्थिति यह है कि यहां फिलहाल सिर्फ ओपीडी संचालित की जा रही है. विभाग में ‘कैथ लैब’ स्थापित नहीं हो पाने के चलते मरीजों को भर्ती करने या उनके ऑपरेशन की कोई सुविधा नहीं है.

कई विभागों में लटके ताले

इसके अतिरिक्त न्योनैटोलॉजी, न्यूरोलॉजी, सीटीवीएस (CTVS) और नेफ्रोलॉजी जैसे महत्वपूर्ण विभाग डॉक्टरों के अभाव में अब तक शुरू भी नहीं हो सके हैं. परिणामस्वरूप, इस भव्य और विशाल चिकित्सा भवन के कई कमरों पर आज भी ताले लटके हुए हैं.

हाईवे से सटा है अस्पताल, आश्वासन के बीच तुरंत रेफर होते हैं गंभीर मरीज

प्रमंडल का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल होने और राष्ट्रीय राजमार्ग (हाईवे) से सटे रहने के कारण यहां सड़क दुर्घटनाओं के शिकार गंभीर मरीजों के अलावा आसपास के जिलों तथा पड़ोसी राज्य झारखंड के सीमावर्ती इलाकों से बड़ी संख्या में मरीज आते हैं. कई विभागों के क्रियाशील न होने से थोड़ी सी भी स्थिति गंभीर होने पर मरीजों को अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड से ही तुरंत पटना रेफर कर दिया जाता है.

कोई ठोस निष्कर्ष नहीं

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि जब भी जनप्रतिनिधियों या उच्चाधिकारियों द्वारा सभी विभागों को सुचारू करने के लिए डॉक्टरों की रिक्ति संबंधी मांग की जाती है, तो सूची उपलब्ध करा दी जाती है, लेकिन अब तक इसका कोई ठोस निष्कर्ष या परिणाम सामने नहीं आया है.

सुपर स्पेशियलिटी यूनिट में डॉक्टरों की वर्तमान स्थिति (तैनात बनाम आवश्यकता):

विभाग का नामप्राध्यापक (तैनात / जरूरत)सहायक प्राध्यापक (तैनात / जरूरत)सीनियर रेजिडेंट (तैनात / जरूरत)जूनियर रेजिडेंट (तैनात / जरूरत)
कार्डियोलॉजी00 / (01)03 / (01)01 / (01)00 / (01)
सीटीभीएस00 / (01)00 / (03)00 / (02)00 / (02)
यूरोलॉजी00 / (01)02 / (01)01 / (01)00 / (01)
नेफ्रोलॉजी00 / (01)00 / (03)00 / (02)00 / (02)
न्यूरोलॉजी00 / (01)00 / (03)00 / (02)00 / (02)
न्यूरो सर्जरी02 / (01)03 / (01)02 / (00)00 / (02)
न्योनैटोलॉजी00 / (01)00 / (03)00 / (01)00 / (02)

क्या कहते हैं अस्पताल के उपाधीक्षक

अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. पीके अग्रवाल ने इस संबंध में बताया कि कार्डियोलॉजी विभाग में ‘कैथ लैब’ स्थापित करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और इसे जल्द पूरा कर लिया जाएगा. कैथ लैब चालू होते ही यहां हृदय रोग से जुड़े गंभीर मरीजों का इलाज और ऑपरेशन शुरू हो सकेगा.

नए डॉक्टरों की मांग

उन्होंने स्पष्ट किया कि अन्य बंद पड़े विभागों को केवल नए डॉक्टरों के योगदान (जॉइन करने) के बाद ही चालू किया जा सकता है. इसके लिए स्वास्थ्य विभाग को आवश्यक पत्राचार कर डॉक्टरों की प्रतिनियुक्ति की मांग लगातार की जा रही है.

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