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Home बिहार गया गयाजी में गरीबी की मार, नन्हे कंधों पर घर की जिम्मेदारी, लकड़ी चुनकर चूल्हा जलाने को मजबूर बच्चियां

गयाजी में गरीबी की मार, नन्हे कंधों पर घर की जिम्मेदारी, लकड़ी चुनकर चूल्हा जलाने को मजबूर बच्चियां

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गयाजी में गरीबी की मार, नन्हे कंधों पर घर की जिम्मेदारी, लकड़ी चुनकर चूल्हा जलाने को मजबूर बच्चियां
लकड़ी चुन रहीं बच्चियां

गयाजी से मुकेश पाण्डेय की रिपोर्ट
Gayaji News:
विकास और सरकारी योजनाओं के दावों के बीच गयाजी जिले के मोहड़ा प्रखंड के टेटुआ टार गांव की तस्वीर एक अलग ही कहानी बयां करती है. यहां कई गरीब और महादलित परिवारों के बच्चे आज भी बचपन जीने के बजाय परिवार की जिम्मेदारियां उठाने को मजबूर हैं. भोजन पकाने के लिए ईंधन की व्यवस्था नहीं होने के कारण नाबालिग बच्चियां रोज जंगल, बगीचे और खेतों से लकड़ियां चुनकर घर लाती हैं.

अनाज मिल रहा, लेकिन चूल्हा जलाने का संकट बरकरार

गांव की बच्चियां सीमा कुमारी, सुलेखा कुमारी और अंजनी कुमारी बताती हैं कि राशन दुकान से परिवार को अनाज तो मिल जाता है, लेकिन भोजन पकाने के लिए ईंधन की कोई व्यवस्था नहीं है. ऐसे में चूल्हा जलाने के लिए रोजाना लकड़ी चुनना उनकी मजबूरी बन गई है.

सुबह से शुरू हो जाता है संघर्ष

बच्चियों के अनुसार वे सुबह होते ही आसपास के खेतों, बगीचों और खाली जगहों में लकड़ी तलाशने निकल जाती हैं. कई बार उन्हें कई किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है. घंटों की मेहनत के बाद ही इतना जारन (लकड़ी) जुट पाता है कि घर में एक समय का भोजन बन सके.

पढ़ाई पर पड़ रहा सीधा असर

रोजाना लकड़ी इकट्ठा करने में लगने वाले समय का असर उनकी पढ़ाई पर भी पड़ रहा है. स्कूल जाने और पढ़ने की उम्र में ये बच्चियां परिवार की जरूरतों को पूरा करने में लगी हुई हैं. जिम्मेदारियों का बोझ उनके बचपन पर भारी पड़ता दिखाई दे रहा है.

महादलित परिवारों की बदहाली की तस्वीर

ग्रामीणों का कहना है कि गांव के कई महादलित और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं. रसोई गैस जैसी सुविधाएं या तो उपलब्ध नहीं हैं या फिर नियमित रूप से उनका उपयोग कर पाना परिवारों के लिए संभव नहीं है.

ग्रामीणों ने की स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराने की मांग

स्थानीय लोगों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि गरीब परिवारों को स्वच्छ ईंधन और रसोई गैस की नियमित सुविधा उपलब्ध कराई जाए. उनका कहना है कि इससे बच्चों को लकड़ी चुनने की मजबूरी से मुक्ति मिलेगी और वे अपनी पढ़ाई तथा भविष्य पर ध्यान दे सकेंगे.

बचपन पर भारी पड़ रही गरीबी

टेटुआ टार गांव की यह तस्वीर बताती है कि कई परिवारों तक सरकारी योजनाओं का लाभ आंशिक रूप से तो पहुंचा है, लेकिन जीवन की मूलभूत जरूरतें अब भी पूरी नहीं हो पा रही हैं. नतीजतन, नन्हे हाथ किताबों की जगह लकड़ियां ढोने को मजबूर हैं और गरीबी उनके बचपन को धीरे-धीरे निगल रही है.

एक तस्वीर से कई सवाल

जब देश बच्चों की शिक्षा, पोषण और उज्ज्वल भविष्य की बात कर रहा है, तब टेटुआ टार की बच्चियां रोज चूल्हा जलाने के लिए लकड़ियां बटोर रही हैं. यह तस्वीर सिर्फ एक गांव की नहीं, बल्कि उन हजारों गरीब परिवारों की हकीकत है जहां आज भी दो वक्त की रोटी जुटाना सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है.

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साक्षी पत्रकारिता और जनसरोकारों से जुड़े विषयों में उनकी विशेष रुचि रही है. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. साक्षी सीवान की रहने वाली हैं. उन्होंने गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (BJMC) की डिग्री प्राप्त की है, जहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, जनसंचार और समाचार लेखन की बारीकियों का अध्ययन किया. स्नातक शिक्षा पूरी करने के बाद भी उन्होंने अपनी शैक्षणिक यात्रा जारी रखी और वर्तमान में नौकरी के साथ-साथ इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) से मास्टर डिग्री की पढ़ाई कर रही हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्होंने दैनिक भास्कर में इंटर्नशिप के दौरान फील्ड रिपोर्टिंग, समाचार संकलन और ग्राउंड रिपोर्टिंग की व्यावहारिक समझ विकसित की. इस दौरान उन्होंने समाचारों के विभिन्न पहलुओं को नजदीक से समझा और पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों को व्यवहारिक रूप से सीखा. इसके बाद उन्होंने अपने पेशेवर करियर की शुरुआत News4Nation के साथ की. जहां करीब तीन वर्षों तक डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहीं. इस दौरान उन्होंने राजनीति, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सरोकारों और समसामयिक विषयों से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण खबरों पर काम किया. News4Nation में कार्यरत रहते हुए उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव और 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव की विस्तृत कवरेज की. चुनावी राजनीति, मतदाताओं के व्यवहार, राजनीतिक रणनीतियों और जमीनी मुद्दों को करीब से समझने का अवसर मिला. इस अनुभव ने उन्हें राजनीतिक खबरों को अधिक सटीकता, तथ्यों और विश्लेषण के साथ प्रस्तुत करने की विशेषज्ञता प्रदान की. वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार की राजनीति, प्रशासनिक गतिविधियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर उनकी विशेष पकड़ है. डिजिटल पत्रकारिता के साथ-साथ उन्हें SEO (Search Engine Optimization) की भी समझ है, जिसके अनुरूप वह खबरों को इस प्रकार तैयार करती हैं कि वे पाठकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचें और खोज इंजन में बेहतर प्रदर्शन करें. ब्रेकिंग न्यूज की पहचान, उसकी त्वरित कवरेज और कम समय में सटीक समाचार तैयार करना उनकी प्रमुख कार्यक्षमताओं में शामिल है. साक्षी किसी भी समाचार को प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की जांच और सत्यापन को सर्वोच्च प्राथमिकता देती हैं. वह विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करने के बाद ही खबरों को प्रकाशित करती हैं, जिससे उनकी रिपोर्टिंग में सटीकता और विश्वसनीयता बनी रहती है. न्यूजरूम में डेटा विश्लेषण, ट्रेंड मॉनिटरिंग और पाठकों की रुचि के आधार पर सर्वे एवं रिसर्च-आधारित खबरें तैयार करने में भी उन्हें बखूबी आता है. निरंतर सीखने और बदलते मीडिया परिदृश्य के साथ स्वयं को अपडेट रखने की उनकी प्रतिबद्धता उन्हें एक बेहतर डिजिटल पत्रकार बनने के लिए प्रेरित करती है. तथ्यपरक, निष्पक्ष और भरोसेमंद पत्रकारिता में विश्वास रखने वाली साक्षी पाठकों तक गुणवत्तापूर्ण और विश्वसनीय जानकारी पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
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