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Home बिहार गया Gaya News : महाबोधि मंदिर से लगभग बराबर ऊंचाई वाला मंदिर बनता जा रहा खंडहर

Gaya News : महाबोधि मंदिर से लगभग बराबर ऊंचाई वाला मंदिर बनता जा रहा खंडहर

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Gaya News : महाबोधि मंदिर से लगभग बराबर ऊंचाई वाला मंदिर बनता जा रहा खंडहर

नवीन कुमार मिश्रा, शेरघाटी. शेरघाटी नगर में स्थित दुल्हिन मंदिर न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है, बल्कि ऐतिहासिक और वास्तुकला की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. लगभग 160 वर्ष पुराना यह मंदिर अपनी अनोखी मान्यता, भव्य संरचना और ऊंचाई के कारण दूर-दूर तक प्रसिद्ध है. बताया जाता है कि इसकी ऊंचाई बोधगया स्थित विश्वविख्यात महाबोधि मंदिर से कुछ ही कम है, जो इसे और भी विशिष्ट बनाती है. दुल्हिन मंदिर का निर्माण जमींदारी काल में करीब डेढ़ सौ वर्ष पूर्व तत्कालीन जमींदार रंगलाल कुंवर की पत्नी गणेश कुंवर द्वारा कराया गया था. उस दौर में यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र था, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी प्रमुख स्थल हुआ करता था. लगभग 10 एकड़ में फैला यह विशाल मंदिर परिसर कभी अपनी भव्यता और समृद्धि के लिए जाना जाता था, लेकिन समय के साथ इसकी स्थिति जर्जर होती चली गयी.

मंदिर वास्तुकला का बेजोड़ नमूना

मंदिर की बनावट और वास्तुकला इसे अन्य मंदिरों से अलग पहचान दिलाती है. स्थानीय सेवानिवृत्त शिक्षक, कलाकार और लेखक विजय कुमार दत्त के अनुसार दुल्हिन मंदिर वास्तुकला का बेजोड़ नमूना है. अनुमंडल क्षेत्र में राम-जानकी का इतना भव्य मंदिर कहीं और देखने को नहीं मिलता. मंदिर का मुख्य द्वार ही इसकी भव्यता का प्रमाण है, जो उस समय की कलात्मक दक्षता और स्थापत्य कौशल को दर्शाता है. दुल्हिन मंदिर का नाम इतना प्रचलित हुआ कि आसपास के इलाके का नाम ही दुल्हिन मुहल्ला पड़ गया. शेरघाटी में दुल्हिन मुहल्ले को अयोध्या, जबकि नयी बाजार तालाब क्षेत्र को जनकपुर के नाम से जाना जाता है. आज भी रामनवमी और रामयात्रा जैसे प्रमुख धार्मिक आयोजनों के दौरान रथ यात्रा की समाप्ति इसी मुहल्ले और इसी मंदिर परिसर में होती है, जिससे इसकी धार्मिक महत्ता और अधिक बढ़ जाती है.

ऐतिहासिक अहमियत के बावजूद उपेक्षा का शिकार

हालांकि, इतनी ऐतिहासिक और धार्मिक अहमियत के बावजूद यह मंदिर लंबे समय से उपेक्षा का शिकार बना हुआ है. रखरखाव के अभाव में यह भव्य मंदिर अब धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होता जा रहा है. मंदिर समिति के पूर्व सचिव अजीत कुमार सिंह के अनुसार मंदिर के पास पर्याप्त जमीन और संपत्ति होने के बावजूद समुचित देखरेख नहीं हो सकी, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. मंदिर के संरक्षण को लेकर नवंबर 2020 में पुरातत्व विभाग द्वारा एक सर्वे कराया गया था. इस सर्वे के बाद स्थानीय लोगों में यह उम्मीद जगी थी कि अब मंदिर के जीर्णोद्धार की दिशा में ठोस कदम उठाये जायेंगे और इसकी देखरेख पुरातत्व विभाग करेगा. लेकिन करीब छह वर्ष बीत जाने के बावजूद अब तक जीर्णोद्धार का कोई ठोस कार्य शुरू नहीं हो सका है और मंदिर की स्थिति जस की तस बनी हुई है.

लोगों की नजरें पुरातत्व विभाग और प्रशासन पर

स्थानीय लोगों का कहना है कि दुल्हिन मंदिर शेरघाटी की पहचान है. इसका संरक्षण न सिर्फ धार्मिक आस्था, बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत को बचाने के लिए भी बेहद जरूरी है. अब लोगों की नजरें पुरातत्व विभाग और प्रशासन पर टिकी हैं कि कब इस प्राचीन धरोहर को उसका खोया हुआ वैभव वापस मिलेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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