बक्सर से मनीष मिश्रा की रिपोर्ट
Buxar Political Controversy : बक्सर में एक बार फिर राजनीतिक माहौल गरमा गया है. भोजपुर जिले के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में आरोपी बनाए गए तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा को पटना में मद्यनिषेध विभाग में डीएसपी के पद पर नई तैनाती दिए जाने के बाद विपक्ष ने सरकार पर सवालों की बौछार कर दी है. इस फैसले को लेकर खासकर आम आदमी पार्टी ने कड़ा विरोध जताया है.
आप जिलाध्यक्ष रमेश वर्मा का सीधा हमला
AAP Political Party : आम आदमी पार्टी के बक्सर जिलाध्यक्ष रमेश वर्मा ने इस नियुक्ति पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए राज्य सरकार की नीयत पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार कानून के राज और निष्पक्ष जांच की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ गंभीर आरोपों में घिरे अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों पर बैठाया जा रहा है.
रमेश वर्मा का कहना है कि यह फैसला आम लोगों के बीच गलत संदेश देता है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आरोपित अधिकारियों को सजा देने के बजाय उन्हें “मलाईदार पोस्टिंग” देकर पुरस्कृत कर रही है, जो न्याय व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है.
Buxar News : FIR के बाद भी मिली अहम जिम्मेदारी
उन्होंने आगे कहा कि भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद संबंधित अधिकारी को पहले फील्ड ड्यूटी से हटाकर पुलिस लाइन भेजा गया था. इसके बावजूद अब उन्हें पटना जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर मद्यनिषेध विभाग में डीएसपी के पद पर तैनात कर दिया गया है. उनका कहना है कि जब किसी मामले में जांच जारी हो और अधिकारी पर आरोप लगे हों, तब इस तरह की पोस्टिंग देना जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है. इससे लोगों का भरोसा भी कमजोर पड़ सकता है.
Political Controversy :सरकार से फैसले पर पुनर्विचार की मांग
आम आदमी पार्टी ने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है. पार्टी का कहना है कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जानी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. रमेश वर्मा ने कहा कि अगर सरकार सच में कानून के राज को मजबूत करना चाहती है, तो उसे ऐसे फैसलों से बचना चाहिए. उन्होंने साफ कहा कि जब तक मामले की पूरी जांच नहीं हो जाती, तब तक आरोपी अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देना उचित नहीं है.
इस नियुक्ति के बाद बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. अब देखना यह होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और क्या इस फैसले में कोई बदलाव होता है या नहीं.
