श्रावणी मेला की उल्टी गिनती शुरू, घाट से कांवरिया पथ तक स्थायी सुविधाओं की मांग तेज

Shravani Mela 2026: विश्वप्रसिद्ध श्रावणी मेला 2026 के विधिवत आगाज में अब कुछ ही दिन शेष हैं, लेकिन सुल्तानगंज के अजगैबीनाथ घाट और कच्ची कांवरिया पथ पर कई महत्वपूर्ण कार्य अब भी अधूरे पड़े हैं, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी है.

By Divyanshu Prashant | June 26, 2026 3:55 PM

सुलतानगंज (भागलपुर) से शुभंकर की रिपोर्ट

Shravani Mela 2026: विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला 2026 की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है. आगामी 30 जुलाई से इस ऐतिहासिक मेले का विधिवत शुभारंभ होना तय है, लेकिन इससे करीब 15 दिन पहले ही यानी 18 जुलाई से शुरू हो रहे ‘बंगला सावन’ के साथ ही बंगाल, झारखंड, ओडिशा और असम समेत विभिन्न राज्यों से कांवरियों का भारी जत्था अजगैबीनाथ धाम पहुंचने लगेगा. भीड़ के इस शुरुआती दबाव को देखते हुए प्रशासनिक गतिविधियां तो तेज हुई हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर बुनियादी कार्यों की रफ्तार अब भी अपेक्षित नहीं दिख रही है, जिससे इस बार भी व्यवस्थाएं समय पर पूरी न होने की आशंका गहराने लगी है.

मंत्री के कड़े निर्देश के बाद भी कई कार्य अधर में

  • समीक्षा बैठक का असर बेअसर: गत 15 जून को नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा ने स्वयं सुलतानगंज का दौरा कर हाई-लेवल समीक्षा बैठक की थी. उन्होंने अधिकारियों को चेताया था कि मेला शुरू होने से पहले सभी व्यवस्थाएं हर हाल में दुरुस्त कर ली जाएं.
  • अधूरे पड़े हैं काम: मंत्री के कड़े रुख के बावजूद अजगैबीनाथ मंदिर घाट, नमामि गंगे घाट, जहाज घाट और मुख्य कच्ची कांवरिया पथ पर सुंदरीकरण, बैरिकेडिंग और मरम्मत से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स अब भी आधे-अधूरे लटके हुए हैं.

सालों भर रहता है श्रद्धालुओं का आना-जाना; स्थायी विकास की जरूरत

स्थानीय नागरिकों और तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि सुल्तानगंज का अजगैबीनाथ मंदिर घाट केवल एक महीने के श्रावणी मेला तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे साल देश के कोने-कोने से श्रद्धालु यहाँ गंगा स्नान कर बाबा बैद्यनाथ को जल अर्पण करने के लिए संकल्प उठाते हैं. इसलिए इस धार्मिक स्थल का स्थायी (Permanent) रूप से ढांचागत विकास किया जाना चाहिए, ताकि सालों भर आने वाले पर्यटकों को बेहतर नागरिक सुविधाएं मिल सकें.

वर्तमान में गंगा घाट पर शुद्ध पेयजल, पर्याप्त हाई-मास्ट लाइट (रोशनी), स्वच्छ शौचालय और महिला श्रद्धालुओं के लिए कपड़ों को बदलने हेतु चेंजिंग रूम की भारी किल्लत है. सबसे चिंताजनक बात यह है कि अजगैबीनाथ मंदिर की ओर जाने वाले घाट का एक बड़ा हिस्सा कटाव के कारण धंस गया है, जो बेहद खतरनाक हो चुका है. यदि इसकी तुरंत मरम्मत कर स्थायी बैरिकेडिंग नहीं की गई, तो जल भरने के दौरान गहरे पानी में डूबने से बड़ी दुर्घटनाएं हो सकती हैं.

सुगम यातायात के लिए अलग एंट्री और एग्जिट रूट की मांग

मेला क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि घाट पर भगदड़ जैसी स्थिति से बचने के लिए कांवरियों के आने (आगमन) और जल भरकर रवाना होने (प्रस्थान) के मार्ग को पूरी तरह अलग-अलग (वन-वे) निर्धारित किया जाए.

दूसरी ओर, प्रशासनिक अधिकारियों का दावा है कि समय सीमा समाप्त होने से पहले सभी आवश्यक टेंडरों को धरातल पर उतार दिया जाएगा. रोशनी, स्वच्छता, पेयजल, सुरक्षा और कच्ची कांवरिया पथ पर गंगा बालू बिछाने का कार्य अंतिम चरण में है. अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकारी दावे जमीनी हकीकत में कितनी जल्दी बदलते हैं, क्योंकि अगले दो हफ्तों में कांवरियों की आमद के साथ ही व्यवस्थाओं की असली अग्निपरीक्षा शुरू हो जाएगी.

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Shravani Mela 2026: स्थानीय नागरिकों की मुख्य मांगें

  • घाट का विस्तार: अजगैबीनाथ मुख्य घाट का स्थायी विस्तार किया जाए और धंसे हुए हिस्सों की तुरंत मरम्मत हो.
  • सुरक्षा घेरा: गंगा नदी में दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पूरे वर्ष स्थायी और मजबूत बैरिकेडिंग की व्यवस्था की जाए.
  • नागरिक सुविधाएं: घाट और मेला शेड परिसर में पर्याप्त संख्या में पेयजल बूथ, स्वच्छ शौचालय और सुरक्षित चेंजिंग रूम बनाए जाएं.
  • निकासी मार्ग: गंगा जल भरने के बाद कांवरियों के लिए अलग और सुरक्षित निकासी मार्ग (वन-वे रूट) सुनिश्चित हो.
  • कांवरिया पथ की मरम्मत: सुलतानगंज से शुरू होने वाले कच्ची कांवरिया पथ से नुकीले पत्थरों को हटाकर महीन बालू बिछाने और नियमित सफाई का काम समय पर पूरा हो.

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