सुलतानगंज के साहित्यिक आयोजन में गूंजा अंगिका का स्वर, ‘एक कौर और’ का हुआ लोकार्पण
भागलपुर के सुलतानगंज में साहित्यकार सुधीर कुमार 'प्रोग्रामर' के हिंदी ग़ज़ल संग्रह 'एक कौर और' का लोकार्पण हुआ. कार्यक्रम में अंगिका भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन पर भी साहित्यकारों ने गंभीर मंथन किया और नई पीढ़ी को भाषा से जोड़ने पर जोर दिया.
सुलतानगंज (भागलपुर) से शुभंकर की रिपोर्ट
Ek Kaur Aur Book Launch: महर्षि मेंहीं विश्रामालय स्थित मारवाड़ी युवा मंच सभागार में आयोजित साहित्यिक समारोह में चर्चित साहित्यकार सुधीर कुमार ‘प्रोग्रामर’ के बहुचर्चित हिंदी ग़ज़ल संग्रह ‘एक कौर और’ का भव्य लोकार्पण किया गया. कार्यक्रम में बिहार, झारखंड और दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों से पहुंचे साहित्यकारों, ग़ज़लकारों, शिक्षाविदों और भाषा-चिंतकों ने पुस्तक की साहित्यिक उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की. वहीं दूसरे सत्र में अंगिका भाषा के संरक्षण, संवर्धन और उसके भविष्य को लेकर गंभीर मंथन हुआ.
मुख्य बातें
साहित्यकारों ने पुस्तक को बताया समकालीन ग़ज़ल की सशक्त कृति
कार्यक्रम का उद्घाटन पूर्णिया विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो. अमरकांत सिंह ने किया, जबकि अध्यक्षता पूर्व सांसद सह विधायक सुबोध राय ने की. मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका ‘नई धारा’ के संपादक डॉ. शिवनारायण तथा मुख्य वक्ता के रूप में सुप्रसिद्ध ग़ज़लकार अनिरुद्ध सिन्हा मौजूद रहे.
विशिष्ट अतिथियों में शंकर मोहन झा (देवघर), डॉ. रजनी प्रभा, डॉ. सुजाता कुमारी, डॉ. अमर पंकज (दिल्ली), अरुण पासवान एवं अखिल भारतीय साहित्य सृजन मंच, खगड़िया की अध्यक्ष साधना भगत शामिल रहीं.
अतिथियों का हुआ सम्मान
कार्यक्रम का संयुक्त संचालन दिल्ली से आए राहुल शिवाय एवं साहित्य सृजन मंच, खगड़िया के संस्थापक-सह-महासचिव सुमन शिवकुमार ने किया. लोकार्पण से पूर्व सभी अतिथियों का बैज, पुष्पमाला एवं अंगवस्त्र देकर स्वागत एवं सम्मान किया गया. स्वागत भाषण अजगैवीनाथ साहित्य मंच के अध्यक्ष भवानंद सिंह ‘प्रशांत’ ने दिया.
पुस्तक पर वक्ताओं ने रखे विचार
पुस्तक समीक्षा सत्र में वक्ताओं ने संग्रह को समकालीन समाज की संवेदनाओं और सामाजिक सरोकारों को अभिव्यक्त करने वाली महत्वपूर्ण कृति बताया.
- प्रो. अमरकांत सिंह ने कहा कि संग्रह सरल भाषा में गहरे सामाजिक सरोकारों को अभिव्यक्त करता है.
- डॉ. शिवनारायण ने कहा कि इसकी ग़ज़लें अपने तेवर, भाषा और विषयवस्तु के कारण अलग पहचान बनाती हैं.
- अनिरुद्ध सिन्हा ने ग़ज़ल विधा पर लेखक की मजबूत पकड़ की सराहना की.
- शंकर मोहन झा ने इसे शिल्प की दृष्टि से परिपक्व कृति बताया.
- डॉ. रजनी प्रभा ने संग्रह में लोकभाषाओं के सुंदर समन्वय की चर्चा की.
- कथाकार श्री रंजन ने इसे वर्तमान समय की संवेदनाओं और सामाजिक संघर्षों का काव्यात्मक दस्तावेज बताया.
अंगिका भाषा के संरक्षण पर हुआ गंभीर विमर्श
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में अंगिका भाषा की वर्तमान स्थिति, चुनौतियों और संरक्षण पर विस्तृत चर्चा हुई. इस सत्र की अध्यक्षता ‘अंग धात्री’ के संपादक अनिरुद्ध प्रभाष ने की. मुख्य अतिथि अनिल कुमार झा तथा मुख्य वक्ता डॉ. प्रदीप प्रभात रहे.
इस अवसर पर अधिवक्ता त्रिलोकीनाथ दिवाकर एवं सोशल मीडिया पर ‘अंगिका वाली’ के नाम से चर्चित श्रुति श्री भी उपस्थित रहीं. कार्यक्रम का संचालन डॉ. ब्रह्मदेव नारायण ‘सत्यम’ ने किया.
श्रुति श्री सम्मानित
अंगिका भाषा के प्रचार-प्रसार में उल्लेखनीय योगदान के लिए श्रुति श्री को अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया गया. वक्ताओं ने नई पीढ़ी को अंगिका भाषा से जोड़ने तथा साहित्य सृजन को बढ़ावा देने के लिए संगठित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया.
पूर्व विधायक सुबोध राय ने कहा कि अंगिका भाषा को उसका वाजिब अधिकार मिलना चाहिए और इसके लिए सरकार से लगातार मांग की जा रही है.
मुक्तक कवि सम्मेलन में गूंजा काव्य रस
कार्यक्रम के तीसरे सत्र में भव्य मुक्तक कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसका संचालन आकाशवाणी भागलपुर के उद्घोषक कुमार गौरव ने किया. सम्मेलन में लगभग 60 कवियों ने प्रेम, प्रकृति, समाज, संस्कृति, राष्ट्रभक्ति एवं समकालीन विषयों पर अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं की खूब सराहना बटोरी.
बिहार, झारखंड और दिल्ली के 15 से 16 जिलों से पहुंचे साहित्यकारों एवं कवियों ने अपनी प्रस्तुतियों से आयोजन को यादगार बना दिया.
और पढ़ें: सुलतानगंज में श्रावणी मेला की उलटी गिनती शुरू, जानिए श्रद्धालुओं के लिए क्या-क्या बदलने वाला है
