गोपालपुर (भागलपुर) से विपिन ठाकुर की रिपोर्ट.
Gopalpur Government Quarter: गोपालपुर प्रखंड मुख्यालय में अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए बने सरकारी आवास वर्षों से जर्जर हालत में पड़े हैं. भवनों की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि वे रहने योग्य नहीं रह गए हैं. परिणामस्वरूप अधिकांश अधिकारी और कर्मचारी मुख्यालय में रहने के बजाय बाहर किराये के मकानों में रहने को मजबूर हैं. इसका असर प्रशासनिक कार्यों की गति और आम लोगों को मिलने वाली सरकारी सेवाओं पर भी पड़ रहा है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि मुख्यालय में अधिकारियों की नियमित उपलब्धता नहीं रहने से कई जरूरी कार्यों के निष्पादन और समस्याओं के समाधान में अनावश्यक विलंब होता है.
रहने योग्य नहीं रहे सरकारी आवास
प्रखंड मुख्यालय में बने सरकारी आवास लंबे समय से मरम्मत और रखरखाव के अभाव में जर्जर हो चुके हैं. अधिकांश भवनों में रहना सुरक्षित नहीं माना जा रहा है. इसी कारण अधिकारी और कर्मचारी मुख्यालय से बाहर किराये के मकानों में रह रहे हैं और प्रतिदिन कार्यालय आने-जाने को विवश हैं.
सरकारी सेवाओं पर पड़ रहा असर
मुख्यालय में अधिकारियों और कर्मचारियों के नहीं रहने से प्रशासनिक कार्यों के संचालन पर भी असर पड़ रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि आकस्मिक परिस्थितियों और जरूरी मामलों में अधिकारियों की तत्काल उपलब्धता नहीं हो पाती, जिससे आम नागरिकों को परेशानी उठानी पड़ती है.
कई बार भेजा गया प्रस्ताव, नहीं हुई कार्रवाई
स्थानीय जनप्रतिनिधियों के अनुसार पंचायत समिति की बैठकों में कई बार सर्वसम्मति से जर्जर सरकारी आवासों को ध्वस्त कर नए आवास निर्माण का प्रस्ताव पारित किया गया और जिला प्रशासन को भेजा गया. इसके अलावा पूर्व प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) और अंचलाधिकारी (सीओ) ने भी संयुक्त प्रतिवेदन के माध्यम से नए सरकारी आवासों के निर्माण की आवश्यकता से जिला प्रशासन को अवगत कराया था.
हालांकि, अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है.
नए आवास बनने से सुधरेगी व्यवस्था
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का मानना है कि यदि प्रखंड मुख्यालय में नए सरकारी आवासों का निर्माण कराया जाता है तो अधिकारी और कर्मचारी मुख्यालय में ही रह सकेंगे. इससे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी, आम लोगों को समय पर सेवाएं मिलेंगी और प्रशासनिक व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी.
मुख्य बिंदु
- गोपालपुर प्रखंड मुख्यालय के सरकारी आवास वर्षों से जर्जर अवस्था में हैं.
- अधिकांश अधिकारी और कर्मचारी मुख्यालय से बाहर किराये के मकानों में रहने को मजबूर हैं.
- अधिकारियों की अनुपलब्धता से सरकारी कार्यों और जनसेवाओं पर असर पड़ रहा है.
- पंचायत समिति कई बार नए आवास निर्माण का प्रस्ताव जिला प्रशासन को भेज चुकी है.
- पूर्व बीडीओ और सीओ ने भी नए आवास निर्माण की अनुशंसा की थी.
- अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है.
- स्थानीय लोगों ने जल्द नए सरकारी आवास बनाने की मांग की है.
