भागलपुर से ललित किशोर मिश्र की रिपोर्ट
Bhagalpur Railway News : अगर आप भागलपुर, अभयपुर, विक्रमशिला या मालदा रेल डिवीजन के स्टेशनों से अक्सर सफर करते हैं, तो आने वाले समय में आपकी यात्रा पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित होने वाली है. रेलवे ने 274 करोड़ रुपये की बड़ी योजना को मंजूरी दी है, जिसके तहत मालदा रेल डिवीजन के 20 स्टेशनों पर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम लगाया जाएगा. यह वही तकनीक है जो ट्रेन के सिग्नल, ट्रैक और रूट को पूरी तरह कंप्यूटर के जरिए नियंत्रित करती है और मानवीय भूल की संभावना को काफी हद तक खत्म कर देती है.
भागलपुर स्टेशन पर इस दिशा में पहले से काम चल रहा है. अब रेलवे बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद बाकी स्टेशनों पर भी इस परियोजना की प्रक्रिया तेज होगी. रेलवे बोर्ड का पत्र मालदा रेल डिवीजन को मिल चुका है और अब विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कर मुख्यालय भेजी जाएगी.
आखिर क्यों जरूरी है इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम
रेलवे नेटवर्क लगातार व्यस्त होता जा रहा है. ट्रेनों की संख्या बढ़ने के साथ सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती बनती जा रही है. ऐसे में पारंपरिक मैकेनिकल और रिले आधारित इंटरलॉकिंग सिस्टम की जगह इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम को तेजी से अपनाया जा रहा है.

यह पूरी तरह कंप्यूटर आधारित सुरक्षा प्रणाली है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि जब तक ट्रैक पूरी तरह सुरक्षित नहीं होता और सभी पॉइंट सही तरीके से लॉक नहीं हो जाते, तब तक किसी भी ट्रेन को हरा सिग्नल नहीं मिलता. इससे गलत ट्रैक पर ट्रेन जाने या सिग्नल संबंधी दुर्घटनाओं की संभावना बेहद कम हो जाती है.
इन 20 स्टेशनों पर लगेगा नया सिस्टम
मालदा रेल डिवीजन के जिन स्टेशनों को इस योजना में शामिल किया गया है उनमें धरहरा, अभयपुर, उरैन, धनौरी, तीन पहाड़, विक्रमशिला, मसूदन, पोराडांगा, महीपाल रोड, दशरथपुर, धमधमिया, कुडीह, खालसीपुर, कजरा, तीलडांगा, गौर मालदा, इचामाग्राम, मालदा टाउन, आरआरआई, अहीरन और पोरीडांगा शामिल हैं.
वहीं पुनसिया, दानवे हॉल्ट और छीट मकनपुर में पहले से यह प्रणाली लागू है.
यात्रियों को क्या होगा फायदा
रेलवे की यह पहल सिर्फ तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा बड़ा निवेश भी है. इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम लगातार ट्रैक सर्किट और सेंसर की मदद से ट्रेन की स्थिति पर नजर रखता है. यदि कहीं कोई तकनीकी गड़बड़ी होती है या बिजली चली जाती है, तो सिस्टम स्वतः सभी सिग्नलों को लाल कर देता है. इसे रेलवे की भाषा में ‘फेल-सेफ मैकेनिज्म’ कहा जाता है.
इस तकनीक के लागू होने से ट्रेन संचालन अधिक सुरक्षित, तेज और व्यवस्थित होने की उम्मीद है. साथ ही भविष्य में ट्रेनों के बेहतर संचालन और समयपालन में भी मदद मिलेगी.
Bhagalpur Railway News : भागलपुर के लिए क्यों अहम है यह प्रोजेक्ट
भागलपुर पूर्व बिहार का एक महत्वपूर्ण रेलवे जंक्शन है, जहां से हर दिन बड़ी संख्या में यात्री लंबी दूरी की ट्रेनों से सफर करते हैं. श्रावणी मेला जैसे बड़े आयोजनों के दौरान यहां यात्रियों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है. ऐसे में आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम रेलवे के लिए भी राहत लेकर आएगा और यात्रियों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा सुनिश्चित करेगा.
भागलपुर स्टेशन पर पहले से इस परियोजना पर काम चल रहा है. अब अन्य स्टेशनों को भी जोड़ने से पूरे रेलखंड की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और संचालन में बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा.
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रेलवे ने सफाई को लेकर भी शुरू किया नया अभियान
रेलवे ने सुरक्षा के साथ-साथ स्वच्छता पर भी सख्ती बढ़ा दी है. रेलवे ट्रैक और स्टेशन परिसर में कचरा फेंकने या थूकने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए ‘ईस्टर्न रेलवे इज वॉचिंग यू’ अभियान शुरू किया जा रहा है.
4 जुलाई से इसकी शुरुआत होगी. यदि कोई यात्री रेलवे परिसर में किसी को गंदगी फैलाते हुए देखता है, तो वह उसकी फोटो और घटना का सटीक स्थान पूर्व रेलवे के व्हाट्सएप नंबर 9002022780 पर भेज सकता है. सूचना मिलने के बाद संबंधित व्यक्ति की पहचान कर उसके खिलाफ जुर्माना लगाने की कार्रवाई की जाएगी.
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