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Home Sports फीफा वर्ल्ड कप 2026 में बेंच के नायक बदल रहे खेल, हर पांचवां गोल कर रहे सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी

फीफा वर्ल्ड कप 2026 में बेंच के नायक बदल रहे खेल, हर पांचवां गोल कर रहे सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी

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फीफा वर्ल्ड कप 2026 में बेंच के नायक बदल रहे खेल, हर पांचवां गोल कर रहे सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी
गोल करने के बाद जश्न मनाते नदीम अमिरी (फोटो- सोशल मीडिया)

FIFA World Cup 2026 Substitutes: फीफा वर्ल्ड कप 2026 में जीत-हार का गणित बदलता नजर आ रहा है. कभी शुरुआती एकादश को ही टीम की सफलता की कुंजी माना जाता था, लेकिन इस बार बेंच पर बैठे खिलाड़ी भी मैचों के नतीजे तय कर रहे हैं. टूर्नामेंट में अब तक लगभग हर पांचवां गोल सब्स्टीट्यूट खिलाड़ियों के खाते में गया है, जिससे उनकी भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है.

नॉकआउट चरण में इसकी कई मिसालें देखने को मिली हैं. सेनेगल के खिलाफ बेल्जियम के रोमेलू लुकाकू, डीआर कांगो के खिलाफ इंग्लैंड के एंथोनी गॉर्डन और क्रोएशिया के खिलाफ पुर्तगाल के गोंकालो रामोस बेंच से उतरकर अपनी-अपनी टीमों के लिए मैच विनर साबित हुए. इन खिलाड़ियों ने मैदान पर आने के कुछ ही समय बाद गोल कर मुकाबलों का रुख बदल दिया.

सब्स्टीट्यूट खिलाड़ियों ने किए 46 गोल

विश्व कप 2026 में अब तक सब्स्टीट्यूट खिलाड़ियों ने 46 गोल किए हैं. यह आंकड़ा 2018 रूस विश्व कप और 2022 कतर विश्व कप में स्थानापन्न खिलाड़ियों द्वारा किए गए कुल गोलों के बराबर पहुंच चुका है. 2018 में सब्स्टीट्यूट खिलाड़ियों ने 16 गोल किए थे, जबकि 2022 में यह संख्या 30 रही थी.

पांच बदलाव के नियम का दिख रहा असर

कोविड-19 महामारी के बाद फुटबॉल में एक मैच के दौरान पांच खिलाड़ियों को बदलने का नियम लागू किया गया था. विश्व कप में भी यह नियम जारी है और इससे टीमों को काफी फायदा मिल रहा है. अब कोच सिर्फ शुरुआती 11 खिलाड़ियों पर निर्भर नहीं रहते, बल्कि पूरी 26 सदस्यीय टीम को ध्यान में रखकर रणनीति बनाते हैं.

युवा खिलाड़ियों का जलवा

इस विश्व कप में कई युवा खिलाड़ियों ने बेंच से उतरकर प्रभाव छोड़ा है. जर्मनी के डेनिज उंडाव ने बतौर सब्स्टीट्यूट तीन गोल और दो असिस्ट किए हैं. वहीं आइवरी कोस्ट के अमाद डियालो ने भी बेंच से आकर दो गोल दागे. स्विट्जरलैंड के जोहान मंजाम्बी विश्व कप में सब्स्टीट्यूट के रूप में उतरकर दो गोल करने वाले सबसे युवा खिलाड़ियों में शामिल हो गए हैं.

डेटा और रणनीति का बढ़ा महत्व

इंग्लैंड के पूर्व कप्तान वेन रूनी का मानना है कि आधुनिक फुटबॉल में स्टार्टर और रिजर्व खिलाड़ियों के बीच का अंतर काफी कम हो गया है. डेटा विश्लेषण, फिटनेस मॉनिटरिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित रणनीतियों की मदद से कोच पहले ही तय कर लेते हैं कि किस खिलाड़ी को किस समय मैदान में उतारना है. यही वजह है कि कई टीमें अपने सबसे तेज और आक्रामक खिलाड़ियों को अंतिम आधे घंटे के लिए बचाकर रख रही हैं.

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