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Home बिहार बेगूसराय बेगूसराय : कभी मंसूरचक की जीवनरेखा थी बलान नदी, आज खुद अस्तित्व बचाने के लिए कर रही संघर्ष, बढ़ा जल संकट

बेगूसराय : कभी मंसूरचक की जीवनरेखा थी बलान नदी, आज खुद अस्तित्व बचाने के लिए कर रही संघर्ष, बढ़ा जल संकट

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बेगूसराय : कभी मंसूरचक की जीवनरेखा थी बलान नदी, आज खुद अस्तित्व बचाने के लिए कर रही संघर्ष, बढ़ा जल संकट
सूखती बलान नदी

Begusarai News : बिहार के बेगूसराय जिले का मंसूरचक प्रखंड कभी ‘पानी का धनी’ कहा जाता था. इसकी सबसे बड़ी वजह बलान नदी थी, जिसकी अविरल धारा प्रखंड की लगभग सभी पंचायतों से होकर बहती थी. यही नदी स्थानीय किसानों की खेती की मुख्य आधारशिला थी और पूरे क्षेत्र के भूजल स्तर (वाटर लेवल) को संतुलित बनाए रखती थी. लेकिन समय के साथ बढ़ते अतिक्रमण, जल संरक्षण की निरंतर अनदेखी और प्रशासनिक उपेक्षा के कारण आज इस जीवनदायिनी नदी के अस्तित्व पर ही गंभीर खतरा मंडराने लगा है.

संकरे नाले में बदली नदी

वर्तमान में हालात ऐसे हो गए हैं कि बलान नदी खुद अपनी पहचान बचाने के लिए कड़ा संघर्ष कर रही है. कभी वर्षभर पानी से लबालब बहने वाली यह नदी अब वर्ष के अधिकांश समय सूखी रहती है. कई स्थानों पर तो इसका स्वरूप इस कदर बदल चुका है कि यह महज एक संकरे नाले जैसी दिखाई देती है. जहां कभी स्वच्छ जल बहता था, वहां आज कटीली झाड़ियां, गंदगी और कचरे का अंबार नजर आता है.

गर्मी आते ही सूख जाती है जलधारा

स्थानीय लोगों का कहना है कि बलान नदी की स्थिति लगातार बद से बदतर होती जा रही है. बरसात के कुछ गिने-चुने दिनों को छोड़ दें तो नदी में पानी नाममात्र का रह जाता है. गर्मी का मौसम आते-आते नदी पूरी तरह सूख जाती है और इसकी मूल जलधारा लगभग समाप्त हो जाती है. नदी के इस तरह सूखने का सबसे सीधा और घातक असर आसपास के गांवों के भूजल स्तर पर पड़ा है.

चापाकलों ने दिया जवाब

गर्मी के दिनों में क्षेत्र के चापाकल पूरी तरह जवाब देने लगते हैं और कई सरकारी जलापूर्ति योजनाएं भी बुरी तरह प्रभावित हो जाती हैं. इसके कारण स्थानीय लोगों को पीने के साफ पानी के लिए भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. मंसूरचक में अब यह जल संकट एक अत्यंत गंभीर समस्या का रूप ले चुका है.

नदी की जमीन पर धड़ल्ले से हुआ अतिक्रमण

ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि वर्षों से नदी के किनारों और इसके सूखे हिस्सों पर लगातार अवैध अतिक्रमण होता रहा है. भू-माफियाओं और स्थानीय लोगों द्वारा कहीं नदी के पाट पर खेती शुरू कर दी गई, तो कहीं बड़े-बड़े स्थायी निर्माण खड़े कर दिए गए. परिणामस्वरूप, बलान नदी की प्राकृतिक चौड़ाई लगातार सिकुड़ती गई और इसके जल प्रवाह का रास्ता भी पूरी तरह बाधित हो गया.

पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर संकट

पर्याप्त जल प्रवाह नहीं होने के कारण आसपास के रिहायशी इलाकों का कचरा और गंदा पानी अब नदी में ही जमा होने लगा है. कई जगहों पर बलान नदी अब एक बदबूदार नाले का रूप ले चुकी है. इससे पर्यावरण प्रदूषण तो बढ़ ही रहा है, साथ ही स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर भी महामारियों का खतरा लगातार मंडरा रहा है.

फसल बचाना बड़ी चुनौती

बलान नदी की इस बदहाली का सबसे अधिक और सीधा असर क्षेत्र के अन्नदाताओं (किसानों) पर पड़ा है. समसा, साठा सहित मंसूरचक प्रखंड के कई गांवों में सिंचाई के लिए पानी की भारी किल्लत हो गई है. भूजल स्तर के अत्यधिक नीचे चले जाने के कारण किसानों के लिए निजी बोरिंग कराने की लागत काफी बढ़ गई है, जिससे खेती अब पहले की तुलना में बेहद महंगी हो गई है. कई छोटे और सीमांत किसानों के सामने तो अपनी खड़ी फसल को बचा पाना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है.

जीर्णोद्धार और उड़ाही की उठी मांग

इन्हीं गंभीर परिस्थितियों को देखते हुए स्थानीय जागरूक नागरिकों और किसानों ने सरकार तथा संबंधित विभाग से बलान नदी को अविलंब अतिक्रमण मुक्त कराने, वैज्ञानिक तरीके से इसकी उड़ाही (गाद सफाई) कराने, वर्षभर जल प्रवाह सुनिश्चित करने और एक प्रभावी जल संरक्षण योजना लागू करने की पुरजोर मांग की है. लोगों का स्पष्ट कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन द्वारा कोई ठोस और ईमानदार पहल नहीं की गई, तो आने वाले कुछ ही वर्षों में बलान नदी केवल इतिहास के पन्नों में ही सिमटकर रह जाएगी.

पीढ़ियों के भविष्य का सवाल

बलान नदी की मौजूदा डरावनी तस्वीरें साफ बयां करती हैं कि कभी मंसूरचक की पहचान और समृद्धि का आधार रही यह नदी आज खुद एक-एक बूंद पानी के लिए तरस रही है. यदि इसके संरक्षण, पुनर्जीवन और अतिक्रमण हटाने की दिशा में जल्द ही कोई प्रभावी सरकारी कार्रवाई नहीं हुई, तो इसका गंभीर खामियाजा केवल किसानों को ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की आने वाली पीढ़ियों को वर्षों तक भुगतना पड़ेगा.

लोगों का मानना है कि आने वाले समय में बलान नदी को बचाना सिर्फ एक नदी को बचाना नहीं है, बल्कि मंसूरचक की खेती, पर्यावरण, भूजल और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करना है.

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