[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home बिहार बांका मंदार तराई में पेड़ों के नीचे अनुष्ठान में लीन सफा अनुयायी

मंदार तराई में पेड़ों के नीचे अनुष्ठान में लीन सफा अनुयायी

0
मंदार तराई में पेड़ों के नीचे अनुष्ठान में लीन सफा अनुयायी

बौंसी. मंदार तराई क्षेत्र में इन दिनों सफा पंथ के अनुयायी पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पेड़ों के नीचे धार्मिक अनुष्ठान करते नजर आ रहे हैं. शुक्रवार को भी सैकड़ों की संख्या में सफा अनुयायी बिहार, झारखंड और बंगाल से यहां पहुंचे हुए थे. प्राकृतिक वातावरण के बीच हो रहे इन अनुष्ठानों से पूरा क्षेत्र श्रद्धा और भक्ति के भाव से ओतप्रोत है. सफा अनुयायी प्राचीन परंपराओं के अनुसार खुले स्थानों पर, विशेषकर बड़े-बड़े वृक्षों के नीचे बैठकर पूजा-पाठ, ध्यान और धार्मिक कर्मकांड संपन्न कर रहे हैं. मंदार तराई के बरगद, पीपल आदि वृक्षों के नीचे बैठकर ये घंटों अनुष्ठान कर रहे हैं. मान्यता है कि प्रकृति के सानिध्य में किया गया अनुष्ठान विशेष फलदायी होता है. अनुष्ठान के दौरान अनुयायी पारंपरिक वस्त्र धारण किए हुए दिखाई देते हैं और विधि-विधान से पूजा संपन्न करते हैं. नीय लोगों के अनुसार हर वर्ष मकर संक्रांति और बौंसी मेला के आसपास सफा अनुयायियों का आगमन होता है और वे कई दिनों तक मंदार तराई में रहकर साधना करते हैं. इससे न सिर्फ धार्मिक माहौल बनता है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान भी और सशक्त होती है. प्रशासन द्वारा भी अनुयायियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक व्यवस्था की जा रही है, ताकि अनुष्ठान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel