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बौंसी मेला खत्म, मैदान बना कूड़ाघर

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बौंसी मेला खत्म, मैदान बना कूड़ाघर

नगर पंचायत मौन, आस्था के नाम पर गंदगी की खुली छूट संजीव पाठक, बौंसी. आस्था, परंपरा और उत्सव के नाम पर लगा बौंसी मेला समाप्त होते ही अपनी बदसूरती छोड़ गया है. मेला मैदान इस समय प्लास्टिक, पत्तल, जूठे खाने, बोतलों और कचरे के ढेर में तब्दील हो चुका है. दुकानदार मुनाफा समेटकर चले गये, लेकिन पीछे छोड़ गए गंदगी का अंबार और इस पूरे मामले में नगर पंचायत पूरी तरह मौन साधे हुए है. मेले के दौरान साफ-सफाई और व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे किये गये थे, लेकिन मेला खत्म होते ही वे दावे हवा-हवाई साबित हुए. मैदान में कदम-कदम पर कचरा फैला है, दुर्गंध उठ रही है और संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ता जा रहा है. इसके बावजूद नगर पंचायत की ओर से न तो सफाई शुरू करायी गयी है और न ही कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नजर आ रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल यही कहानी दोहराई जाती है. मेला लगता है, भीड़ आती है, प्रशासन तस्वीरें खिंचवाता है और मेला खत्म होते ही जनता को गंदगी के बीच जीने के लिए छोड़ दिया जाता है. सवाल यह है कि क्या आस्था के आयोजनों के बाद सफाई नगर पंचायत की जिम्मेदारी नहीं है. हालांकि, अग्रवाल इवेंट कंपनी को दिये गये इकरारनामे में भी साफ सफाई का जिक्र है. इसके बावजूद भी मेला मैदान में अब तक साफ सफाई नहीं हो पा रही है. पर्यावरण को लेकर हो रही तमाम बातों और स्वच्छ भारत अभियान के नारों के बीच बौंसी मेला मैदान की यह हालत सिस्टम की पोल खोल रही है. प्लास्टिक कचरे से न केवल जमीन और जल स्रोत प्रदूषित हो रहे हैं, बल्कि आवारा पशुओं और बच्चों के लिए भी यह खतरा बनता जा रहा है. सबसे चिंताजनक बात यह है कि नगर पंचायत की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है. क्या सफाई के लिए कोई योजना थी. क्या दुकानदारों से कचरा प्रबंधन को लेकर कोई शर्त रखी गयी थी और अगर थी, तो उसका पालन क्यों नहीं कराया गया. अब जनता की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं. यदि जल्द ही विशेष सफाई अभियान नहीं चलाया गया, तो यह साफ हो जायेगा कि व्यवस्था में जिम्मेदारी नहीं, सिर्फ औपचारिकता रह गयी है. कहते हैं एडीएम इस मामले में पूछे जाने पर एडीएम अजीत कुमार ने बताया कि मामले की जांच करवाने के साथ-साथ अविलंब सफाई का कार्य आरंभ करवाया जायेगा.

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