[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home बिहार औरंगाबाद खुदवां में विकास की बाट जोह रहा प्राचीन गौरी शंकर मठ

खुदवां में विकास की बाट जोह रहा प्राचीन गौरी शंकर मठ

0
खुदवां में विकास की बाट जोह रहा प्राचीन गौरी शंकर मठ

औरंगाबाद सदर. ओबरा प्रखंड मुख्यालय से करीब 18 किलोमीटर दूर पुनपुन नदी तट पर स्थित खुदवा गांव का प्राचीन गौरी शंकर मठ इन दिनों लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. लगभग 500 वर्ष पुरानी दिव्य गौरी शंकर की प्रतिमा यहां स्थापित है, जो अद्भुत है. स्थानीय मान्यता है कि यहां मनोकामना मांगने वाले भक्तों की सारी इच्छाएं पूरी होती हैं. मनोकामना पूर्ण होने पर श्रद्धालु पुनः आकर रुद्राभिषेक करते है और बाबा को धन्यवाद अर्पित करते है. मठ परिसर में भगवान वेंकटेश और भगवान विष्णु की दुर्लभ काले पत्थर की प्राचीन प्रतिमाएं भी मौजूद हैं, जो इस धरोहर को और अधिक महत्व प्रदान करती हैं. यह संपूर्ण स्थल अपनी शांति, स्वच्छता व रमणीय वातावरण के लिए भी प्रसिद्ध है. वर्तमान में मठ का संचालन महंत रमेश दास जी द्वारा किया जा रहा है. ग्रामीणों के अनुसार इस मठ की सेवा एवं देखरेख बिहार केसरी पहलवान बलदेव नागा साधु ने करीब 50 वर्षों तक की. वृद्धावस्था में मुक्ति की कामना से वे अयोध्या की ओर प्रस्थान किये.

मठ के पास जमीन, गोशाला व घोड़ा

ग्रामीण बताते हैं कि गौरी शंकर मठ के नाम पर करीब 32 बीघा जमीन, गोशाला और घोड़े मौजूद है. छठ पूजा, मकर संक्रांति और बिसवा पर्व पर यहां विशाल मेले लगते हैं, जिसमें हजारों श्रद्धालु पुनपुन नदी में स्नान कर दान–धर्म और दर्शन का लाभ लेते हैं.

विकास पर नहीं दिया जा रहा ध्यान

सबसे बड़ी बात है कि आज भी यह पवित्र स्थल पर्यटकों की पहुंच से अछूता व नजरों से ओझल है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी महत्वपूर्ण धरोहर होने के बाद भी न तो जिला प्रशासन और न ही जनप्रतिनिधियों का पर्याप्त ध्यान इसके विकास पर नहीं दिया जा रहा है. जबकि, यह स्थल पर्यटन के रूप में विकसित हो तो क्षेत्र की पहचान, सम्मान और रोजगार दोनों बढ़ेंगे.

धरोहर का हो संरक्षण : आचार्य नारायण

आचार्य नारायण जी ने जिला प्रशासन से अपील की है कि इस दिव्य एवं अलौकिक धरोहर को संरक्षित कर इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाये, ताकि लोग यहां पहुंच सकें.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel