औरंगाबाद. सदर अस्पताल के जन्म प्रमाण पत्र काउंटर पर अनियमितता और लापरवाही बरते जाने का मामला सुर्खियों में है. जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए दूर-दराज से पहुंचे लोगों को घंटों काउंटर के बाहर इंतजार करना पड़ता है, जबकि संबंधित कर्मी अक्सर काउंटर से गायब रहते हैं. बुधवार को प्रभात खबर की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच-पड़ताल की तो स्थिति बेहद चिंताजनक पायी गयी. अस्पताल परिसर में दर्जनों लोगों की भीड़ जमा थी. लोग काउंटर खुलने और कर्मियों के आने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन लंबे समय तक कोई कर्मी वहां मौजूद नहीं मिला. लोगों ने नाराजगी जताते हुए इसका जमकर विरोध भी किया. कई लोगों ने बताया कि वे पिछले दो वर्षों से जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया है. पीड़ितों का आरोप है कि उन्होंने छह-छह बार फॉर्म भरकर जमा किया, लेकिन हर बार कर्मियों द्वारा फॉर्म गायब या भूल जाने की बात कह दी जाती है. जब प्रमाणपत्र की मांग की जाती है, तो दोबारा फॉर्म भरने को कह दिया जाता है. इस प्रक्रिया में लोगों का समय, पैसा और ऊर्जा तीनों बर्बाद हो रहा हैं. सूत्रों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में इस अनियमितता को लेकर करीब आधे दर्जन कर्मियों को हटाया गया है और कुछ की नौकरी भी जा चुकी है. इसके बावजूद व्यवस्था में कोई ठोस सुधार नजर नहीं आ रहा है. सबसे गंभीर आरोप पैसे लेकर प्रमाण पत्र बनाने का है. कई लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जब काउंटर पर भीड़ कम होती है या कोई व्यक्ति अकेला होता है, तो हजारों रुपये की मांग की जाती है. पैसे देने के बावजूद भी प्रमाण पत्र समय पर नहीं बनता. जब काउंटर पर कर्मियों की अनुपस्थिति को लेकर सवाल किया जाता है, तो विभागीय कार्य में व्यस्त होने का हवाला दे दिया जाता है. इस कारण आम लोगों को रोजाना अस्पताल का चक्कर लगाना पड़ता है. दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों के लिए यह और भी परेशानी का कारण बन रहा है.