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Home बिहार आरा आरा में समाहरणालय बना बाइक चोरों का ‘सेफ जोन’, एक हफ्ते में उड़ी 6 मोटरसाइकिलें, कर्मियों में आक्रोश

आरा में समाहरणालय बना बाइक चोरों का ‘सेफ जोन’, एक हफ्ते में उड़ी 6 मोटरसाइकिलें, कर्मियों में आक्रोश

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आरा में समाहरणालय बना बाइक चोरों का ‘सेफ जोन’, एक हफ्ते में उड़ी 6 मोटरसाइकिलें, कर्मियों में आक्रोश
भोजपुर समाहरणालय, आरा

Arrah News:(नरेन्द्र प्रसाद सिंह की रिपोर्ट) जिले के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारियों का मुख्य कार्यालय यानी आरा समाहरणालय परिसर इन दिनों वाहन चोर गिरोह के लिए ‘सॉफ्ट टारगेट’ और सबसे सुरक्षित पॉइंट बन गया है. कलेक्ट्रेट परिसर में जहाँ चौबीसों घंटे सुरक्षाकर्मी और अधिकारियों की आवाजाही रहती है, वहाँ दिनदहाड़े गाड़ियों का गायब होना पुलिस और प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर रहा है. स्थिति यह है कि समाहरणालय के मुख्य द्वारों और दीवारों पर सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद शातिर चोर बिना किसी खौफ के वारदातों को अंजाम देकर रफूचक्कर हो रहे हैं.

आम लोग तो दूर, कलेक्ट्रेट के कर्मचारी भी बन रहे चोरों का शिकार

इस गिरोह के निशाने पर सिर्फ अपनी फरियाद या काम लेकर दूर-दराज से आने वाले जिले के आम नागरिक ही नहीं हैं, बल्कि समाहरणालय में दिन-रात सेवा देने वाले सरकारी कर्मचारी भी अब इस गिरोह के आसान शिकार बन रहे हैं.

ताजा मामला दो दिन पहले का है, जहाँ कलेक्ट्रेट में कार्यरत एक कर्मचारी ने अपनी गाढ़ी कमाई से एक नई चमचमाती मोटरसाइकिल खरीदी थी. कलेक्ट्रेट आने के ठीक दो दिन बाद ही चोरों ने परिसर के अंदर से ही उसकी नई बाइक पर हाथ साफ कर दिया. पीड़ित कर्मचारी ने जब इसकी खोजबीन की, तो गाड़ी का कहीं पता नहीं चला.

एक सप्ताह के भीतर 6 बाइकें पार, सीसीटीवी में कैद हैं फुटेज

स्थानीय सूत्रों और पीड़ितों से मिली जानकारी के अनुसार, समाहरणालय परिसर के भीतर का आलम बेहद चिंताजनक हो चुका है. पिछले महज एक सप्ताह के भीतर कलेक्ट्रेट कैंपस के अंदर से 6 मोटरसाइकिलों की चोरी हो चुकी है. परिसर के बाहर लगभग इतनी ही संख्या में बाइकें समाहरणालय के मुख्य गेट और बाहरी सड़कों के किनारे से भी चोरी की गई हैं.

हैरानी की बात यह है कि ये सारी चोरी की घटनाएं समाहरणालय में लगे सीसीटीवी कैमरों में साफ तौर पर कैद हो चुकी हैं. चोरों की तस्वीरें और उनका हुलिया फुटेज में दिखने के बावजूद, स्थानीय पुलिस द्वारा अब तक इस मामले में कोई ठोस वैज्ञानिक जांच या चोरों की धरपकड़ के लिए सख्त कार्रवाई नहीं की गई है. पुलिस की इस सुस्त कार्यप्रणाली को लेकर कलेक्ट्रेट कर्मियों और स्थानीय नगर वासियों में गहरा आक्रोश व्याप्त है. लोगों ने जिला प्रशासन से अविलंब कलेक्ट्रेट की सुरक्षा बढ़ाने और पार्किंग जोन को सुरक्षित करने की मांग की है.

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मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर पलायन कर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट ( माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय). नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है. नोएडा में टीवी न्यूज में काम करने के बाद हिंदुस्तान ग्रूप होते हुए बिहार, झारखंड की सबसे पसंदीदा अखबार प्रभात खबर में कार्यरत. हां एक बात और... पढ़ने-लिखने की जिज्ञासा कभी खत्म नहीं होगी. साहित्य में बेहद दिलचस्पी.
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