रमजान में महिलाओं की भूमिका अहम

इफ्तार-सेहरी बना कमाती हैं अतिरिक्त शबाब

By MRIGENDRA MANI SINGH | February 27, 2026 6:48 PM

अररिया. रमजानुल मुबारक का पहला असरा रहकर का अब बिलकुर अंतिम पड़ाव में है. इस माहे मुबारक में महिलाओं की जिम्मेदारी और ज्यादा बढ़ जाती है. ये बातें आजाद एकेडमी स्कूल अररिया के विज्ञान शिक्षक और इस्लामिक स्कॉलर अरशद अनवर अलिफ ने कही. उन्होंने बताया कि कुरान पाक में अल्लाह पाक ने फरमाया है कि मैने मोमिनों को रमजान का महीना अता किया है, ताकि वो मुत्तकी व परहेजगार बन जाये. अरशद अनवर ने बताया कि इस माहे मुबारक में महिलाएं रोजा, नमाज, इबादत के साथ-साथ घर वालों के लिए इफ्तार और सेहरी बनाकर अतिरिक्त शबाब कमाती हैं. उन्होंने कहा कि महिलाएं अपने नामे अमाल में नेकियों की भरमार कर सकती हैं. घर के कामों के साथ-साथ बच्चों की देखभाल, रोजा, इबादत और कुरान पाक की तिलावत और तरावीह की खास नमाज भी पाबंदी से अता करती हैं. अरशद अनवर ने लोगों से अपील की कि गरीब व जरूरतमंद लोगों की बढ़ चढ़ कर मदद करें. इस माह में किए जाने वाले सभी नेकियों का सवाब सत्तर गुणा बढ़ा दिया जाता है.