अररिया में 55% कम बारिश ने बढ़ाई किसानों की टेंशन, पीले पड़ने लगे धान के बिचड़े
Araria Weather News: अररिया जिले में सामान्य से 55% कम बारिश से धान की रोपनी प्रभावित. बिचड़े पीले पड़ने लगे, किसान 7-8 जुलाई की बारिश का इंतजार कर रहे हैं.
अररिया से पंकज कुमार की रिपोर्ट
Araria Weather News: अररिया में इस बार मानसून की धीमी चाल ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. जुलाई का पहला सप्ताह खत्म होने को है, लेकिन आसमान से उम्मीद के मुताबिक बारिश नहीं हुई. नतीजा यह है कि खेत सूखे पड़े हैं, धान की रोपनी की रफ्तार थम गई है और मेहनत से तैयार किए गए बिचड़े अब पीले पड़ने लगे हैं.
धान उत्पादन के लिए पहचाने जाने वाले अररिया में इस समय हर किसान की नजर आसमान पर टिकी है. जिनके पास सिंचाई के साधन हैं, वे बढ़ती लागत के बावजूद किसी तरह रोपनी करा रहे हैं. वहीं छोटे और सीमांत किसान अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि उनके लिए डीजल पंप से सिंचाई कर खेती करना आसान नहीं है.
बारिश की कमी ने रोक दी धान रोपनी की रफ्तार
अररिया जिले में सामान्य वर्षों के दौरान जुलाई के पहले सप्ताह तक धान की रोपनी तेज गति से चलती है. लेकिन इस बार मानसून की बेरुखी के कारण अधिकांश खेतों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंच सका.
कई किसानों ने नर्सरी तैयार कर ली है, लेकिन खेतों में पानी नहीं होने से बिचड़ों की रोपाई नहीं हो पा रही. लगातार इंतजार के कारण कई जगहों पर धान के बिचड़े पीले पड़ने लगे हैं, जिससे किसानों की मेहनत पर संकट गहराता दिख रहा है.
55 प्रतिशत कम बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें
मौसम के ताजा आंकड़ों के अनुसार जिले में अब तक सामान्य से करीब 55 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है. इसका सीधा असर खरीफ खेती पर पड़ा है.
हालांकि मौसम विभाग ने 7 और 8 जुलाई को अररिया सहित सीमांचल के कुछ जिलों में अच्छी बारिश की संभावना जताई है. इस पूर्वानुमान से किसानों के बीच नई उम्मीद जगी है कि यदि समय पर बारिश हुई तो रोपनी में तेजी आ सकती है.
Araria Weather News: डीजल पंप से सिंचाई ने बढ़ाया खेती का खर्च
बारिश नहीं होने के कारण कई किसान डीजल पंप से खेतों में पानी पहुंचाकर रोपनी कराने को मजबूर हैं. इससे खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है.
डीजल, मजदूरी और सिंचाई पर बढ़ रहे खर्च ने छोटे और सीमांत किसानों की चिंता और बढ़ा दी है. किसानों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक भी अच्छी बारिश नहीं हुई तो खरीफ खेती और महंगी हो जाएगी.
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देर से रोपनी का असर पैदावार पर भी पड़ सकता है
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि धान की रोपनी में जितनी अधिक देरी होगी, उत्पादन पर उसका उतना ही अधिक असर पड़ेगा. देर से लगाई गई फसल की बढ़वार प्रभावित होती है और पैदावार घटने की आशंका रहती है.
देश के कई हिस्सों में कमजोर मानसून का असर खरीफ फसलों पर दिखाई दे रहा है. ऐसे में अररिया जैसे कृषि प्रधान जिले में समय पर बारिश नहीं होना किसानों के साथ-साथ स्थानीय कृषि अर्थव्यवस्था के लिए भी चिंता का विषय बन गया है.
अब अगले कुछ दिनों की बारिश पर टिकी उम्मीद
कृषि विभाग किसानों को उपलब्ध सिंचाई संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार खेती की योजना बनाने की सलाह दे रहा है.
फिलहाल जिले के किसानों की उम्मीदें 7 और 8 जुलाई की संभावित बारिश पर टिकी हैं. यदि अच्छी वर्षा होती है तो धान की रोपनी को रफ्तार मिलेगी और फसल को नया जीवन मिलेगा. लेकिन यदि मानसून की बेरुखी जारी रही तो इसका असर सिर्फ उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि किसानों की आय और पूरे जिले की कृषि व्यवस्था पर भी पड़ेगा.
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