भरगामा में विकास की खुली पोल, 6 साल से अधूरी पड़ी सड़क, पूरे मार्ग में पसरा है कीचड़

Shankarpur Road: अररिया जिले के भरगामा प्रखंड में बुनियादी सुविधाओं की घोर अनदेखी का एक बड़ा मामला सामने आया है. शंकरपुर पंचायत के एक मुख्य मार्ग का निर्माण पिछले छह वर्षों से अधर में लटका हुआ है, जिसके कारण पूरी सड़क टापू और कीचड़ के दलदल में तब्दील हो चुकी है. प्रशासनिक उदासीनता से तंग आकर अब स्थानीय ग्रामीणों का धैर्य जवाब देने लगा है.

By Divyanshu Prashant | June 10, 2026 2:24 PM
भरगामा (अररिया) से राष्ट्र भूषण पिंटू की रिपोर्ट

Shankarpur Road: बिहार सरकार द्वारा ग्रामीण इलाकों को मुख्य सड़कों से जोड़ने के बड़े-बड़े दावों के बीच अररिया जिले के भरगामा प्रखंड से एक बेहद निराशाजनक तस्वीर सामने आई है. प्रखंड की शंकरपुर पंचायत अंतर्गत गजबी वार्ड संख्या-10 में एक अदद पक्की सड़क के लिए ग्रामीण पिछले छह साल से तरस रहे हैं. स्थानीय निवासियों के अनुसार, जगदीश यादव के घर से मुसलमान टोला तक जाने वाली लगभग 1.65 किलोमीटर लंबी इस सड़क का निर्माण छह वर्ष पूर्व ही स्वीकृत होना था, लेकिन लंबा समय बीत जाने के बाद भी आज तक इस दिशा में कोई धरातलीय कार्य नहीं हुआ. नतीजा यह है कि पहली ही मानसूनी बारिश के बाद यह पूरा रास्ता राहगीरों के लिए मुसीबत का सबब बन चुका है.

फारबिसगंज अनुमंडल को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग; पैदल चलना भी हुआ मुहाल

  • दैनिक आवागमन ठप: ग्रामीणों ने बताया कि यह कोई साधारण संपर्क मार्ग नहीं है, बल्कि यह सड़क भरगामा प्रखंड मुख्यालय के साथ-साथ अनुमंडल मुख्यालय फारबिसगंज को जोड़ने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण रास्ता है.
  • कीचड़ और जलजमाव: वर्तमान में इस 1.65 किलोमीटर के दायरे में बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं, जिनमें बारिश का पानी जमा होने से गहरा कीचड़ फैल गया है. स्थिति इतनी विकट है कि दोपहिया वाहनों की बात तो दूर, लोगों का पैदल चलना भी दूभर हो गया है.
  • मरीजों और बच्चों पर आफत: सड़क जर्जर होने के कारण आपातकाल में एम्बुलेंस या ई-रिक्शा गांव के भीतर नहीं आ पाते हैं, जिससे गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने में जान जोखिम में डालनी पड़ती है. इसके अलावा स्कूली बच्चों और किसानों को भी रोजाना इसी दलदल से होकर गुजरना पड़ता है.

आक्रोशित ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों को घेरा; केवल आश्वासन मिलने का आरोप

जनता में भारी असंतोष: व्यवस्था से नाराज होकर गांव के प्रबुद्ध नागरिकों की एक बैठक हुई, जिसमें स्थानीय विधायकों, सांसदों और संबंधित तकनीकी विभाग के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली गई.

ग्रामीणों—डॉ. तनवीर, मो. निजामुद्दीन, मो. रफी, नूर आलम, मुदस्सीर आलम, शाहिद हुसैन, सरफराज, अख्लाकुर रहमान, तौसीफ, अशोक राम, तहसीम, सुचेन यादव, नैयर आलम, अरुण यादव, सफीक, तबरेज, जितेंद्र कुमार, मो. सिराज, मो. अहसान, मो. सलाउद्दीन, मो. मुस्तफा, मो. अब्दुल, मो. इस्माइल, मो. सत्तार एवं मो. रज्जाक ने संयुक्त रूप से कहा कि हर चुनाव में नेता यहाँ आकर पक्की सड़क का वादा करते हैं, लेकिन वोट मिलते ही इस क्षेत्र को अपने हाल पर छोड़ दिया जाता है. कई बार जिला प्रशासन को स्मारपत्र सौंपने के बाद भी केवल कागजी आश्वासन ही हाथ लगा है.

सड़क की वर्तमान प्रशासनिक स्थिति और विभाग का पक्ष नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट है:

प्रभावित क्षेत्र व वार्ड नंबरस्वीकृत सड़क की कुल लंबाईमार्ग का प्रारंभिक व अंतिम बिंदुसमस्या का मुख्य प्रशासनिक कारणग्रामीण क्षेत्र पर पड़ने वाला असर
गजबी, वार्ड संख्या-10
(शंकरपुर पंचायत, भरगामा)
1.65 किलोमीटरजगदीश यादव के घर से
मुसलमान टोला तक
* विभागीय फाइलों में अटका काम
* तकनीकी सर्वे का सीमा विवाद
प्रखंड व फारबिसगंज अनुमंडल मुख्यालय से संपर्क प्रभावित, विकास ठप.

“रानीगंज प्रखंड के तहत हुआ है सर्वे, जल्द मिलेगी स्वीकृति”: कार्यपालक अभियंता

इस पूरे मामले पर जब ग्रामीण कार्य विभाग के अधिकारियों से जवाब मांगा गया, तो एक अलग ही तकनीकी पेंच सामने आया. सड़क निर्माण में हो रही देरी के संबंध में पूछे जाने पर एमएमजी (MMG) के कार्यपालक सहायक अभियंता राजन कुमार ने बताया कि भौगोलिक सीमाओं के फेर में इस सड़क का सर्वे तकनीकी रूप से रानीगंज प्रखंड के अंतर्गत दर्ज किया गया है. उन्होंने आश्वस्त किया कि विभाग को इस मार्ग की जर्जर स्थिति की पूरी जानकारी है और इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) उच्चाधिकारियों को भेजी जा चुकी है. विभाग से अंतिम प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति मिलते ही निविदा (टेंडर) की प्रक्रिया पूरी कर बहुत जल्द सड़क का निर्माण कार्य धरातल पर शुरू करा दिया जाएगा, जिससे ग्रामीणों को इस नारकीय स्थिति से मुक्ति मिल सके.

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