मुख्य बातें:
अररिया से पंकज कुमार की रिपोर्ट
Jeevika Success Story: बिहार सरकार की ‘जीविका’ योजना ग्रामीण इलाकों की महिलाओं के जीवन में किस तरह बदलाव ला रही है, इसका जीवंत उदाहरण अररिया जिले में देखने को मिला है. फारबिसगंज प्रखंड के परवाहा की रहने वाली बिजली देवी आज समाज के लिए एक प्रेरणा बन चुकी हैं. एक समय घोर आर्थिक संकट से जूझने वाली बिजली देवी ने अपने हौसले और प्रशासनिक सहयोग के दम पर अपने परिवार को गरीबी के दलदल से बाहर निकाला है. आज वे खुद का व्यवसाय चलाकर न सिर्फ आत्मनिर्भर हैं, बल्कि अपने पूरे परिवार का भरण-पोषण बेहद शानदार तरीके से कर रही हैं.
संघर्ष के दिन और सिलाई से महज 10,000 की सीमित आय
- सीमित साधन: कुछ समय पहले तक बिजली देवी का परिवार बेहद कम आमदनी के कारण गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहा था. उनके पास आजीविका के रूप में मात्र एक पुरानी सिलाई मशीन थी, जिसके भरोसे वह दिन-रात कपड़े सिलकर किसी तरह गृहस्थी की गाड़ी खींच रही थीं.
- आर्थिक तंगी: उस वक्त उनकी मासिक कमाई मुश्किल से 10,000 रुपये तक हो पाती थी. इस सीमित राशि से बढ़ती महंगाई के दौर में घर का खर्च चलाना और बच्चों की पढ़ाई व अन्य जरूरतें पूरी करना एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी.
जीविका के ‘सावन समूह’ ने बदला जीवन; 65,000 के कर्ज से शुरू की किराना दुकान
बिजली देवी वर्ष 2023 में स्थानीय ‘सावन जीविका स्वयं सहायता समूह’ की सक्रिय सदस्य बनीं. इस मंच से जुड़ने के बाद उन्हें नियमित बचत के महत्व, बैंकिंग ऋण प्रक्रिया और स्वरोजगार की बारीकियों को समझने का मौका मिला. इसके बाद उन्होंने आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लेते हुए समूह से 65,000 रुपये का लोन लिया. इस राशि से उन्होंने गांव में ही एक छोटी किराना दुकान की नींव रखी. अपनी लगन और बेहतरीन वित्तीय अनुशासन का परिचय देते हुए उन्होंने कमाए गए मुनाफे से 45,000 रुपये का कर्ज चुकता भी कर दिया है.
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से लगा पंख; दोगुनी हुई मासिक आय
- सरकारी प्रोत्साहन: किराना दुकान की सफलता के बीच उन्हें ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ के तहत 10,000 रुपये की अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्राप्त हुई. इस नई कार्यशील पूंजी को भी उन्होंने दुकान में नया सामान भरने में लगा दिया.
- कमाई का डबल मॉडल: वर्तमान में उनकी किराना दुकान काफी मजबूत स्थिति में है. इसके साथ ही वह समय निकालकर सिलाई का काम भी जारी रखती हैं. दोनों माध्यमों (किराना व सिलाई) के जुड़ जाने से घर की वित्तीय स्थिति काफी सुदृढ़ हो गई है.
Jeevika Success Story: खुशहाल परिवार और आत्मनिर्भर भविष्य
बिजली देवी के परिवार में उनके पति और दो बेटे (बड़ा बेटा 20 वर्ष और छोटा बेटा 16 वर्ष) हैं. दोनों बच्चे अपनी पढ़ाई के साथ-साथ दुकान के संचालन और प्रबंधन में अपनी मां का पूरा हाथ बंटाते हैं. इस सामूहिक पारिवारिक प्रयास का नतीजा यह है कि जो मासिक आय कभी महज 10,000 रुपये पर सिमट जाती थी, वह आज बढ़कर 18,000 से 20,000 रुपये प्रति माह तक पहुंच चुकी है.
इस बढ़ी हुई आमदनी ने पूरे परिवार का जीवन स्तर बदल दिया है. अब बच्चों की उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य दैनिक जरूरतें बिना किसी रुकावट के आसानी से पूरी हो रही हैं. बिजली देवी भावुक होकर कहती हैं कि जीविका से जुड़ना उनके जीवन का सबसे बेहतरीन फैसला था. आज वे गांव की दूसरी महिलाओं को भी घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर स्वरोजगार अपनाने और स्वावलंबी बनने की राह दिखा रही हैं.
