जोगबनी में भारत-नेपाल मुख्य सीमा पर महिला तस्करों का राज: दिनभर लगती है भीड़, कस्टम, SSB और नेपाल पुलिस की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

अररिया जिले के सीमावर्ती शहर जोगबनी स्थित भारत-नेपाल मुख्य सीमा पर इन दिनों सुरक्षा व्यवस्था और चौकसी के दावों की पोल खुलती नजर आ रही है. मुख्य गेट (जयप्रकाश नारायण द्वार) के आसपास दिनभर दर्जनों की संख्या में तस्करी करने वाली महिलाओं का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे न केवल सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि स्थानीय राहगीरों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

By Divyanshu Prashant | May 21, 2026 12:38 PM

मुख्य गेट और कस्टम ऑफिस के आगे लगता है मजमा, सड़क हो रही जाम

सीमांचल के सबसे व्यस्त व्यापारिक रास्तों में से एक जोगबनी मुख्य सीमा पर तस्करों का नेटवर्क बेखौफ होकर काम कर रहा है. प्राप्त जानकारी के अनुसार, दर्जनों की संख्या में तस्कर महिलाएं भारत की ओर से जयप्रकाश नारायण द्वार के पास और कस्टम कार्यालय के ठीक आगे झोले व बैगों में तस्करी का सामान लेकर खुलेआम इकट्ठा रहती हैं. इन महिलाओं की संख्या इतनी अधिक होती है कि इनके जमावड़े के कारण टिकुलिया की ओर जाने वाली मुख्य सड़क पूरी तरह जाम हो जाती है. आश्चर्य की बात यह है कि सीमा पर तैनात कस्टम और सशस्त्र सीमा बल (SSB) के जवान इन पर कोई कानूनी कार्रवाई करना तो दूर, इन्हें मुख्य सड़क से हटाने की जहमत तक नहीं उठाते. दोनों ही एजेंसियां सीमा पर सिर्फ मूकदर्शक बनी रहती हैं.

आम लोगों पर कड़ाई, तस्करों को ढील; सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका संदिग्ध

तस्करी के इस खुले खेल ने सीमा पर तैनात कस्टम, एसएसबी और नेपाल पुलिस की मुस्तैदी और उनकी नीयत पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:

  • नेपाल सरकार के दावों की हवा: नेपाल में नई सरकार के गठन के बाद आम नागरिकों के लिए भारत से अपनी रोज़मर्रा की ज़रूरतों का सामान ले जाने पर भी सख्त प्रतिबंध लगा दिया गया था. लेकिन इसके विपरीत, ये तस्कर महिलाएं बेरोकटोक होकर प्रतिदिन भारी मात्रा में तस्करी का सामान मुख्य सीमा से ही पार करा रही हैं.
  • कस्टम विभाग की सुस्ती: कस्टम विभाग की मुख्य जिम्मेदारी ही सीमा पर सामानों के आयात-निर्यात की गहन जांच करना और अवैध तस्करी को रोकना है. लेकिन तस्करों को देखकर भी आंखें मूंद लेना विभाग के अधिकारियों को कटघरे में खड़ा करता है.
  • एसएसबी की दोहरी नीति: सीमा सुरक्षा बल (SSB) का काम सीमा पर अवांछित भीड़ को रोकना और देश की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि अगर कोई आम नागरिक अपने घरेलू उपयोग का थोड़ा भी सामान लाता है, तो एसएसबी के जवान उन पर कड़ाई से रोक लगाते हैं. लेकिन संगठित रूप से काम कर रहीं इन तस्कर महिलाओं के आगे बल के जवान पूरी तरह बेबस नजर आते हैं.

सांठ-गांठ की आशंका से आम जनता में भारी आक्रोश

मुख्य अंतरराष्ट्रीय सीमा पर खुलेआम चल रहे इस अवैध कारोबार और सुरक्षा बलों की निष्क्रियता को देखकर स्थानीय बुद्धिजीवियों और आम लोगों के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. सीमावर्ती क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि बिना किसी आंतरिक सांठ-गांठ या मिलीभगत के इस तरह मुख्य द्वार से बेधड़क तस्करी होना नामुमकिन है. लोगों ने जिला प्रशासन और सुरक्षा बलों के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि सीमा पर सुरक्षा और जांच व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाए तथा इस ‘गड़बड़झाले’ पर तुरंत रोक लगाई जाए.

जोगबनी (अररिया) से सुदीप भारती की रिपोर्ट: