‘बच्चों को तालीम देंगे तभी बदलेगा समाज’, यूथ विजन 2026 सम्मेलन में शिक्षा पर जोर
Araria News: क्या सिर्फ डिग्री ही नहीं, बल्कि दीनी और आधुनिक शिक्षा का संतुलन भी बच्चों के भविष्य को मजबूत बना सकता है? अररिया में आयोजित 'यूथ विजन 2026' सम्मेलन में यही संदेश गूंजा. वक्ताओं ने कहा कि अगर आज बच्चों की शिक्षा पर ध्यान नहीं दिया गया तो समाज का विकास अधूरा रह जाएगा.
फारबिसगंज (अररिया) से मो. कलीम उद्दीन की रिपोर्ट
Araria News: अररिया जिले के फारबिसगंज में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से इरसा फाउंडेशन ने सुन्नी स्टूडेंट्स फेडरेशन (SSF) के तत्वावधान में ‘यूथ विजन 2026’ विषय पर एक दिवसीय सम्मेलन का आयोजन किया. सम्मेलन में जिले के विभिन्न प्रखंडों से पहुंचे उलेमा, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवाओं ने शिक्षा को समाज के विकास की सबसे मजबूत नींव बताया. वक्ताओं ने अभिभावकों से बच्चों की स्कूली और दीनी शिक्षा दोनों पर समान रूप से ध्यान देने की अपील की.
शिक्षा को बदलाव का सबसे बड़ा माध्यम बताया गया
फारबिसगंज के जुम्मन चौक स्थित जुम्मन ताहिर अंसारी मंजिल के सभागार में आयोजित इस सम्मेलन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए. कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना और युवाओं को बेहतर भविष्य के लिए प्रेरित करना था.
वक्ताओं ने कहा कि आज के दौर में शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव और आत्मनिर्भरता की सबसे मजबूत ताकत है.
Araria News: ‘बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान दें’
सम्मेलन के मुख्य अतिथि और सुन्नी स्टूडेंट्स फेडरेशन के राष्ट्रीय सचिव डॉ. शरीफ ने कहा कि किसी भी समाज का विकास शिक्षा के बिना संभव नहीं है.
उन्होंने कहा कि अभिभावकों को बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए. बच्चे केवल आलिम या मुफ्ती ही नहीं, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर, प्रशासनिक अधिकारी और अन्य क्षेत्रों में भी आगे बढ़ सकते हैं, बशर्ते उन्हें सही शिक्षा और मार्गदर्शन मिले.
डॉ. शरीफ ने बताया कि एसएसएफ पूरे देश में बच्चों की स्कूली और दीनी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चला रहा है.
दीनी और आधुनिक शिक्षा दोनों जरूरी
विशिष्ट अतिथि मुफ्ती गुलाम अहमद रजा ने कहा कि बच्चों को केवल धार्मिक शिक्षा या केवल आधुनिक शिक्षा तक सीमित नहीं रखना चाहिए.
उन्होंने कहा कि जब दीनी तालीम के साथ दुनियावी शिक्षा भी मिलेगी, तभी बच्चे जीवन के हर क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकेंगे और समाज का बेहतर नेतृत्व कर पाएंगे.
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जिलेभर से पहुंचे उलेमा और समाजसेवी
सम्मेलन में अररिया जिले के विभिन्न प्रखंडों से उलेमा, शिक्षकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया. कार्यक्रम में आए अतिथियों का स्वागत बुके और माल्यार्पण कर किया गया.
इस अवसर पर एसएसएफ के कोऑर्डिनेटर ओवेश मुस्तफा, मोहम्मद ताहिर, मौलाना मुफ्ती कमर शक्काफी, मौलाना असलम जमाली, समाजसेवी जाबिर अंसारी, इजहार अंसारी, वाहिद अंसारी सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे.
समाज में शिक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने की अपील
कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने कहा कि ऐसे सम्मेलन केवल चर्चा का मंच नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत हैं.
उन्होंने लोगों से अपील की कि हर बच्चे को नियमित रूप से स्कूल और मदरसा भेजें, क्योंकि शिक्षित समाज ही मजबूत और विकसित समाज की पहचान होता है. उपस्थित लोगों ने भी शिक्षा को लेकर इस तरह के जागरूकता कार्यक्रमों की सराहना की और इन्हें लगातार आयोजित करने की जरूरत बताई.
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