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Home Sports Cricket WTC 2027 में बड़ा बदलाव, सभी 12 टीमें खेलेंगी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप, टू- टियर सिस्टम का प्लान रद्द

WTC 2027 में बड़ा बदलाव, सभी 12 टीमें खेलेंगी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप, टू- टियर सिस्टम का प्लान रद्द

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WTC 2027 में बड़ा बदलाव, सभी 12 टीमें खेलेंगी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप, टू- टियर सिस्टम का प्लान रद्द
WTC 2027 की साइकल में बदलाव

Changes in WTC 2027 Cycle: टेस्ट क्रिकेट को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है. वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के अगले चक्र, यानी साल 2027 से शुरू होने वाली प्रतियोगिता में अब सभी 12 टेस्ट खेलने वाली टीमें शामिल हो सकती हैं. ये फैसला इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) की हाल ही में हुई बैठक में लिया गया है. लंबे समय से इस बात पर चर्चा हो रही थी कि WTC को दो हिस्सों में बांट दिया जाए यानी एक टॉप डिवीजन और एक नीचे वाला डिवीजन, जिसमें प्रदर्शन के आधार पर टीमों को ऊपर या नीचे भेजा जाए. लेकिन अब ICC ने फिलहाल उस योजना को रोक दिया है और पुरानी व्यवस्था यानी सिंगल-टियर (एक स्तर वाली) प्रतियोगिता को ही जारी रखने का फैसला किया है.

दो डिवीजन का प्लान क्यों नहीं बना?

पिछले एक साल से ICC और कई क्रिकेट बोर्ड्स के बीच टू-टियर सिस्टम को लेकर चर्चा चल रही थी. इसमें यह प्रस्ताव था कि मजबूत टीमें टॉप डिवीजन में खेलें और कमजोर टीमें निचले डिवीजन में. हर चक्र के बाद जो टीमें अच्छा प्रदर्शन करें, उन्हें प्रमोशन मिले और जो कमजोर रहें, उन्हें नीचे भेजा जाए. इस पर काम करने के लिए न्यूजीलैंड के पूर्व क्रिकेटर रोजर टूज की अध्यक्षता में एक वर्किंग कमेटी भी बनाई गई थी. हालांकि, भारत, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी बड़ी टीमों ने इस योजना का विरोध किया. इन देशों को डर था कि अगर किसी खराब दौर में वे निचले डिवीजन में चली गईं, तो उन्हें एक-दूसरे के खिलाफ खेलने का मौका नहीं मिलेगा. इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड के सीईओ रिचर्ड थॉम्पसन ने तो साफ कहा था कि अगर हम मुश्किल दौर में हों और डिवीजन-2 में चले जाएं, तो क्या हम इंडिया और ऑस्ट्रेलिया के साथ नहीं खेल पाएंगे? यह टेस्ट क्रिकेट के लिए ठीक नहीं होगा.

सभी 12 टीमें खेलेंगी WTC

ICC ने अब तय किया है कि वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में सिर्फ 9 नहीं, बल्कि सभी 12 फुल-मेम्बर टीमें हिस्सा लेंगी. इसका मतलब है कि अब अफगानिस्तान, आयरलैंड और जिम्बाब्वे जैसी टीमों को भी टेस्ट चैंपियनशिप का हिस्सा बनने का मौका मिलेगा. यह फैसला टेस्ट क्रिकेट को ज्यादा वैश्विक बनाने और हर देश को बराबरी के मौके देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. नई व्यवस्था के तहत हर टीम को अगले WTC चक्र में तय संख्या में टेस्ट मैच खेलने होंगे. हालांकि, इन मैचों की मेजबानी के लिए किसी भी देश को अतिरिक्त फंडिंग नहीं दी जाएगी. इससे यह साफ है कि बोर्ड्स को अपने खर्च खुद उठाने होंगे, लेकिन उन्हें खेलने के अवसर जरूर बढ़ेंगे.

छोटी टीमों को मिलेगा बड़ा मौका

इस फैसले से सबसे ज्यादा फायदा अफगानिस्तान और आयरलैंड जैसी नई टेस्ट टीमों को होगा. अब तक इन टीमों को बड़े देशों के खिलाफ बहुत कम टेस्ट मैच खेलने का मौका मिलता था. WTC में शामिल होने से उन्हें नियमित रूप से भारत, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया जैसी टीमों से भिड़ने का अवसर मिलेगा. इससे न केवल उनके खिलाड़ियों को अनुभव मिलेगा, बल्कि उनके देश में टेस्ट क्रिकेट की लोकप्रियता भी बढ़ेगी. एक बोर्ड डायरेक्टर ने बताया कि इससे यह सुनिश्चित होगा कि हर टीम टेस्ट क्रिकेट खेले. जो देश इस फॉर्मेट में आगे बढ़ना चाहते हैं, उन्हें ज्यादा मौके मिलेंगे. और बड़ी टीमें भी अब इन देशों के खिलाफ खेलने के लिए प्रोत्साहित होंगी.

बिग थ्री की बड़ी चिंता 

WTC में बदलाव न करने के पीछे एक और बड़ा कारण बिग थ्री यानी भारत, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया का दबदबा भी है. इन तीनों देशों की सीरीज से ICC को सबसे ज्यादा राजस्व मिलता है. अगर इनमें से कोई टीम डिवीजन-2 में चली जाती, तो उनकी आपसी सीरीजों से होने वाली आय पर असर पड़ता. इसलिए ICC को भी आर्थिक दृष्टि से यह मॉडल ठीक नहीं लगा. साथ ही, छोटे बोर्ड्स को लेकर भी चिंता थी कि उन्हें बड़े देशों की मेजबानी के लिए पर्याप्त फंड नहीं मिलेगा. इसलिए फिलहाल ICC ने तय किया है कि दो डिवीजन वाला मॉडल बाद में देखा जाएगा, लेकिन अभी के लिए सभी 12 टीमें एक ही टियर में रहेंगी.

ODI सुपर लीग की वापसी की तैयारी

ICC सिर्फ टेस्ट फॉर्मेट ही नहीं, बल्कि वनडे क्रिकेट को भी मजबूत करने की कोशिश कर रहा है. खबर है कि 2023 वर्ल्ड कप के बाद बंद की गई ODI सुपर लीग को फिर से शुरू किया जा सकता है. इस लीग में 13 टीमें हिस्सा लेंगी और हर टीम को बराबर मौके दिए जाएंगे. इससे वनडे क्रिकेट को भी एक ठोस संरचना मिलेगी और यह फॉर्मेट अपनी प्रासंगिकता बनाए रख सकेगा.

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