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Home Sports Cricket Ind vs Eng : क्या दूसरे टी20 में वैभव सूर्यवंशी को मिलेगा मौका? सैमसन के फॉर्म की वजह से बढ़ी डिमांड

Ind vs Eng : क्या दूसरे टी20 में वैभव सूर्यवंशी को मिलेगा मौका? सैमसन के फॉर्म की वजह से बढ़ी डिमांड

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Ind vs Eng : क्या दूसरे टी20 में वैभव सूर्यवंशी को मिलेगा मौका? सैमसन के फॉर्म की वजह से बढ़ी डिमांड
वैभव सूर्यवंशी और ईशान किशन

Vaibhav Suryavanshi debut : वैभव सूर्यवंशी के डेब्यू की बढ़ती मांग के बीच इंग्लैंड के खिलाफ शनिवार को दूसरे टी20 मैच में संजू सैमसन पर अच्छे प्रदर्शन का दबाव रहेगा जो इस दौरे पर लगातार नाकाम साबित हो रहे हैं. पहला मैच बारिश के कारण रद्द हो गया था जिसमें भारत ने अभिषेक शर्मा और कप्तान श्रेयस अय्यर के अर्धशतकों की मदद से सात विकेट पर 189 रन बनाये थे . अगले कुछ मैचों में फोकस सैमसन पर रहेगा कि वह सूर्यवंशी को डेब्यू का मौका दिये जाने की बढ़ती मांग के बीच अपनी उपयोगिता साबित कर पाते हैं या नहीं .

सूर्यवंशी को रोकना अब मुश्किल

सैमसन का प्रदर्शन अगर इसी तरह का रहा तो वैभव सूर्यवंशी को रोकना असंभव होगा क्योंकि उनकी प्रतिभा असाधारण है. अब सैमसन के लिए गलती की कोई गुंजाइश नहीं रह गई है. ऐसे में टी20 विश्व कप का शानदार प्रदर्शन भी टीम में उनकी जगह की गारंटी नहीं हो सकता है. अभिषेक शर्मा ने पिछले तीन मैचों में से दो में 49 और 59 रन बना लिये हैं जिससे सारा दबाव अब सैमसन पर है.बारिश के कारण रद्द हुए पहले मैच में सैमसन ने सात गेंद में एक रन बनाया था और एक बार भी नहीं लगा कि वह आक्रामक खेलने के मूड में हैं . सीम लेती पिचों पर तकनीक के मामले में उनकी कमजोरी सामने आती है . राजस्थान के टोंक के रहने वाले आयरलैंड के गुमनाम से तेज गेंदबाज जय मूंदड़ा ने उनकी कमजोरी का फायदा उठाकर उनका विकेट लिया था.

वैभव को लेकर कोई हड़बड़ी नहीं दिखाना चाहता है टीम मैनेजमेंट

टीम प्रबंधन 15 वर्ष के सूर्यवंशी को लेकर कोई हड़बड़ी नहीं करना चाहता लेकिन अगले कुछ मैचों में उन्हें नहीं उतारा गया तो इस फैसले पर सवाल उठने तय हैं .सैमसन के अलावा तिलक वर्मा को भी मध्यक्रम में तेज खेलना होगा. स्पिनरों के आने के बाद वह तेजी से रन नहीं बना पाते हैं. इस साल 12 टी20 में वह सिर्फ 12 छक्के लगा सके हैं और एक फिनिशर के लिये यह खराब आंकड़ा है. स्पिनरों की मददगार ओल्ड ट्रैफर्ड की पिच पर गेंदबाजी में किसी बदलाव की संभावना नहीं है .इंग्लैंड के पास कप्तान हैरी ब्रूक, फिल साल्ट और टॉम बेंटोन जैसे शानदार बल्लेबाज हैं. इस मैच से पहले हालांकि एक ही यक्षप्रश्न क्रिकेटप्रेमियों के जेहन में है कि सूर्यवंशी को मौका मिलेगा या नहीं?

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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