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Home Religion Makar Sankranti Ki Katha: क्यों मनाई जाती है मकर संक्रांति? जानिए इससे जुड़ी पौराणिक कथा

Makar Sankranti Ki Katha: क्यों मनाई जाती है मकर संक्रांति? जानिए इससे जुड़ी पौराणिक कथा

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Makar Sankranti Ki Katha: क्यों मनाई जाती है मकर संक्रांति? जानिए इससे जुड़ी पौराणिक कथा
मकर संक्रांति की कथा

Makar Sankranti Ki Katha: मकर संक्रांति हर वर्ष माघ महीने में मनाई जाती है. यह पर्व सूर्य देव के धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करने के अवसर पर मनाया जाता है. देश के अलग-अलग हिस्सों में इस त्योहार को पोंगल, माघी, उत्तरायण और तिल संक्रांति जैसे नामों से भी जाना जाता है. यह पर्व शीत ऋतु के समापन और बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक माना जाता है. मकर संक्रांति के दिन स्नान, दान, पूजा-पाठ और अन्य शुभ कार्यों की शुरुआत करना अत्यंत शुभ माना जाता है. आज इस लेख में हम मकर संक्रांति से जुड़ी पौराणिक कथा के बारे में जानेंगे और समझेंगे कि इस महान पर्व की शुरुआत कैसे हुई.

मकर संक्रांति से जुड़ी पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्रकाश और तेज के दाता सूर्य देव की दो पत्नियां थीं. उनकी पहली पत्नी का नाम संज्ञा और दूसरी पत्नी का नाम छाया था. पहली पत्नी संज्ञा से सूर्य देव को दो संतानें प्राप्त हुईं—यम और यमी. वहीं दूसरी पत्नी छाया से उन्हें एक पुत्र हुआ, जिन्हें शनिदेव के नाम से जाना जाता है.

माता छाया ने दिया सूर्यदेव को श्राप

जब शनिदेव का जन्म हुआ, तब उनका रंग काला था. यह देखकर सूर्य देव क्रोधित हो गए और उन्होंने शनिदेव को अपनाने से इंकार कर दिया. सूर्य देव का कहना था कि उनका पुत्र काला नहीं हो सकता. इस कारण धीरे-धीरे सूर्य देव का व्यवहार शनिदेव और उनकी माता छाया के प्रति कठोर होता गया. अंत में सूर्य देव ने माता छाया और शनिदेव को अपने से अलग कर दिया. जिस स्थान पर वे रहने लगे, उसे कुंभ कहा गया. सूर्य देव के इस व्यवहार से दुखी होकर माता छाया ने उन्हें कुष्ठ रोग का श्राप दे दिया.

सूर्य देव ने शनिदेव के घर को जला

इस श्राप से क्रोधित होकर सूर्य देव ने माता छाया और शनिदेव के घर को जला दिया. बाद में सूर्य देव की पहली पत्नी संज्ञा से उत्पन्न पुत्र यम ने सूर्य देव को श्राप से मुक्त कराया. साथ ही यम ने सूर्य देव से आग्रह किया कि वे माता छाया और शनिदेव के साथ अच्छा व्यवहार करें. पुत्र की बात सुनकर सूर्य देव को अपनी गलती का एहसास हुआ और वे शनिदेव से मिलने उनके घर पहुंचे. लेकिन वहां उन्होंने देखा कि सब कुछ जलकर राख हो चुका है.

शनिदेव ने तिल से किया पिता का स्वागत

अपने पिता को देखकर शनिदेव अत्यंत प्रसन्न हुए. उन्होंने कोई शिकायत नहीं की और काले तिल से सूर्य देव का स्वागत किया. पुत्र के इस प्रेम और सम्मान को देखकर सूर्य देव बहुत प्रसन्न हुए. उन्होंने शनिदेव को एक नया घर प्रदान किया, जिसे मकर कहा गया. साथ ही सूर्य देव ने शनिदेव को कुंभ और मकर—दोनों राशियों का स्वामी बना दिया.

सूर्य देव का वरदान

सूर्य देव ने वरदान दिया कि जब भी वे शनिदेव के घर आएंगे, वहां धन-धान्य और खुशहाली बनी रहेगी. उन्होंने यह भी कहा कि मकर संक्रांति के दिन जो व्यक्ति सूर्य देव को काले तिल अर्पित करेगा, उसके जीवन में सुख-समृद्धि की कभी कमी नहीं होगी. इसी कारण सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश को मकर संक्रांति के रूप में मनाया जाता है.

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नेहा कुमारी प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. वे धर्म, ज्योतिष, राशिफल, व्रत-त्योहार, पौराणिक कथाओं और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं. उनकी विशेष रुचि धार्मिक परंपराओं, ज्योतिषीय विश्लेषण और दैनिक राशिफल को सरल, सटीक और पाठक-हितैषी भाषा में प्रस्तुत करने में है. नेहा का उद्देश्य पाठकों तक विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी पहुंचाना है, ताकि वे धर्म, संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों को आसानी से समझ सकें. उनकी लेखन शैली शोध-आधारित, सरल और स्पष्ट है, जो जटिल विषयों को भी सहज और रोचक बना देती है. वे राशिफल, ग्रह-गोचर, व्रत-त्योहार, धार्मिक मान्यताओं, वास्तु, पौराणिक प्रसंगों और भारतीय रीति-रिवाजों से संबंधित विषयों पर नियमित रूप से लेख लिखती हैं. डिजिटल पत्रकारिता में उनकी रुचि पाठकों की जरूरतों को समझते हुए जानकारीपूर्ण, SEO-अनुकूल और प्रभावी कंटेंट तैयार करने में है.
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