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Home Religion फाल्गुन मास की पहली एकादशी कल, जरूर करें इस कथा का पाठ

फाल्गुन मास की पहली एकादशी कल, जरूर करें इस कथा का पाठ

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फाल्गुन मास की पहली एकादशी कल, जरूर करें इस कथा का पाठ
विजया एकादशी व्रत कथा

Vijaya Ekadashi Vrat Katha: विजया एकादशी फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को आती है. यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को रखने से जीवन में हर प्रकार की बाधाओं पर विजय प्राप्त होती है. इसी कारण इसे “विजय दिलाने वाली एकादशी” कहा जाता है.

कल है विजया एकादशी

वैदिक पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में फाल्गुन कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 12 फरवरी को दोपहर 12 बजकर 22 मिनट से शुरू होगी और 13 फरवरी को दोपहर 2 बजकर 25 मिनट तक रहेगी. एकादशी व्रत उदया तिथि के अनुसार रखा जाता है, इसलिए विजया एकादशी का व्रत 13 फरवरी 2026, शुक्रवार को किया जाएगा.

विजया एकादशी व्रत कथा

इस व्रत की कथा द्वापर युग से जुड़ी हुई है. धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से फाल्गुन कृष्ण एकादशी के महत्व के बारे में पूछा. तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें इस व्रत की कथा सुनाई.

श्रीकृष्ण ने बताया कि सबसे पहले नारद मुनि ने ब्रह्माजी से इस एकादशी का महत्व जाना था. इसके बाद उन्होंने यह कथा युधिष्ठिर को सुनाई. कथा के अनुसार त्रेता युग में जब रावण माता सीता का हरण कर लंका ले गया, तब भगवान श्रीराम उन्हें वापस लाने के लिए वानर सेना के साथ लंका की ओर चले.

लंका पहुंचने से पहले उनके सामने विशाल समुद्र आ गया. समुद्र को पार करना बहुत कठिन था. उसमें खतरनाक जीव भी थे जो सेना को नुकसान पहुंचा सकते थे. तब श्रीराम ने अपने भाई लक्ष्मण से उपाय पूछा. लक्ष्मण ने बताया कि यहां से कुछ दूरी पर वकदालभ्य नाम के एक मुनि रहते हैं, वे कोई उपाय बता सकते हैं.

भगवान श्रीराम मुनि के पास गए और अपनी समस्या बताई. मुनि ने कहा कि यदि आप फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत पूरी श्रद्धा से करें और अपनी सेना के साथ उपवास रखें, तो आप समुद्र पार कर लंका पर विजय प्राप्त करेंगे.

मुनि की बात मानकर भगवान श्रीराम और उनकी सेना ने विजया एकादशी का व्रत किया. व्रत के प्रभाव से उन्होंने रामसेतु का निर्माण किया, समुद्र पार किया और अंत में रावण पर विजय प्राप्त की.

विजया एकादशी का धार्मिक महत्व

विजया एकादशी का अर्थ है – विजय दिलाने वाली एकादशी. मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से शत्रुओं पर जीत मिलती है. जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और अधूरे कार्य पूरे होते हैं. यह व्रत नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और सुख-समृद्धि का मार्ग खोलता है. इसलिए इसे पापों से मुक्ति दिलाने वाली एकादशी भी कहा जाता है. जो भक्त सच्चे मन से इस दिन व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु का स्मरण करते हैं, उन्हें जीवन में सफलता और मानसिक शांति प्राप्त होती है.

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शौर्य पुंज विशेष रूप से दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों एवं लेखों पर फोकस कर रहे हैं. वो डिजिटल मीडिया जगत के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. पाठकों की रुचि और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वे सरल, सहज और तथ्यपूर्ण धार्मिक एवं ज्योतिषीय कंटेंट तैयार करते हैं. डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ शौर्य खबरों की नब्ज को समझने और जटिल विषयों को आसान भाषा में प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांस लेखन से की थी. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में कार्य करने का अवसर मिला और अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन में काम शुरू किया. यहां उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट और मनोरंजन जगत की प्रमुख खबरों पर लेखन किया. साल 2020 के दौरान उन्होंने लाइफस्टाइल, हेल्थ, एजुकेशन और अन्य नॉन-न्यूज कैटेगरी में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया. Health & Fitness, Beauty & Fashion, Relationship & Family, Food & Recipes, Travel, Astrology & Vastu, Career & Motivation, Festival & Culture जैसे विषयों पर उन्होंने सैकड़ों उपयोगी और जानकारीपूर्ण लेख तैयार किए. शिक्षा शौर्य पुंज का जन्म रांची, झारखंड में हुआ. उनकी प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की. पत्रकारिता की उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें समाचार लेखन के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे के आधार पर तथ्यपूर्ण, संतुलित और प्रभावी कंटेंट तैयार करने में सक्षम बनाती है. विशेषज्ञता के क्षेत्र दैनिक राशिफल साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल ज्योतिषीय उपाय पूजा-पाठ एवं धार्मिक अनुष्ठान व्रत-त्योहार एवं शुभ मुहूर्त वास्तु शास्त्र धार्मिक मान्यताएं एवं परंपराएं लाइफस्टाइल एवं वेलनेस हेल्थ एवं फिटनेस डिजिटल कंटेंट राइटिंग एवं SEO पाठकों तक विश्वसनीय, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाना शौर्य पुंज की लेखन शैली की सबसे बड़ी विशेषता है.
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