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Home Religion सावधान! लग गया है साल का पहला सूर्य ग्रहण, जानें ‘रिंग ऑफ फायर’ का साया कब होगा समाप्त

सावधान! लग गया है साल का पहला सूर्य ग्रहण, जानें ‘रिंग ऑफ फायर’ का साया कब होगा समाप्त

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सावधान! लग गया है साल का पहला सूर्य ग्रहण, जानें ‘रिंग ऑफ फायर’ का साया कब होगा समाप्त
सूर्य ग्रहण 2026

Surya Grahan 2026: आज साल का पहला सूर्य ग्रहण शुरू हो चुका है, जिसका प्रभाव शाम 7 बजकर 57 मिनट तक बना रहेगा. ‘रिंग ऑफ फायर’ की यह खगोलीय घटना अपने चरम पर शाम 5 बजकर 42 मिनट के आसपास होगी, जिसके बाद धीरे-धीरे ग्रहण का साया समाप्त होगा. वर्ष 2026 में कुल दो बार सूर्य ग्रहण का खगोलीय दृश्य देखने को मिलेगा. यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, क्योंकि यह मुख्य रूप से अंटार्कटिका और दक्षिणी गोलार्ध में दिखेगा. आप इसे NASA के यूट्यूब चैनल, अन्य खगोलीय वेबसाइटों और लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए ऑनलाइन देख सकते हैं, जहां ‘रिंग ऑफ फायर’ का दृश्य दिखेगा.

यहां जानें सूर्य ग्रहण से जुड़ी खास बातें.

हिंदू पंचांग के अनुसार पहला सूर्य ग्रहण आज 17 फरवरी 2026 को लग चुका है, यह ग्रहण वलयाकार है, जिसे आम भाषा में ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है,  जबकि दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 को होगा. हालांकि इस साल के दोनों सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे. ग्रहण के दौरान सूतक काल, समय और सावधानियों को लेकर विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जाती है. आमतौर पर ग्रहण शुरू होने से करीब 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू माना जाता है. आइए जानते हैं पहले सूर्य ग्रहण से जुड़ी खास बातें.

क्यों खास है 2026 का पहला सूर्य ग्रहण?

इस साल का पहला सूर्य ग्रहण खास इसलिए है क्योंकि यह वलयाकार ग्रहण है. इस प्रकार के ग्रहण में सूर्य पूरी तरह नहीं ढकता, बल्कि उसके चारों ओर एक चमकदार घेरा दिखाई देता है, जिसे ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है.

वलयाकार सूर्य ग्रहण कैसे बनता है?

जब चंद्रमा पृथ्वी से कुछ ज्यादा दूरी पर होता है और सूर्य व पृथ्वी के बीच से गुजरता है, तब वह सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाता. ऐसे में सूर्य का बाहरी हिस्सा चमकती हुई अंगूठी जैसा दिखता है. इसी स्थिति को वलयाकार सूर्य ग्रहण कहा जाता है.

सूर्य ग्रहण का समय

यह ग्रहण दोपहर 3 बजकर 26 मिनट से शुरू है और शाम 7 बजकर 57 मिनट तक रहेगा. इस तरह इसकी कुल अवधि लगभग 4 घंटे 32 मिनट की होगी.

क्या भारत में सूतक काल मान्य होगा?

ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार सूर्य ग्रहण से लगभग 12 घंटे पहले सूतक काल लग जाता है और ग्रहण समाप्त होने तक रहता है. लेकिन चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा.

सूतक काल में क्या न करें?

सूतक काल के दौरान पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान करने से बचना चाहिए. साथ ही देवी-देवताओं की मूर्तियों को स्पर्श करना भी उचित नहीं माना जाता.

कहां दिखाई देगा यह ग्रहण?

यह सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से अंटार्कटिका और दक्षिणी महासागर के आसपास के क्षेत्रों में दिखाई देगा. इसके अलावा चिली, अर्जेंटीना के उत्तरी हिस्सों और दक्षिण-पूर्वी अफ्रीका के कुछ इलाकों में मौसम साफ रहने पर यह आंशिक रूप से देखा जा सकेगा.

ग्रहण के दौरान सावधानियां

जहां ग्रहण दिखाई देगा, वहां सूतक लगभग 12 घंटे पहले शुरू हो जाएगा. इस दौरान वृद्ध और बीमार लोगों को छोड़कर अन्य लोगों को भोजन करने से बचने की सलाह दी जाती है. गर्भवती महिलाओं को फल-सब्जी काटने या किसी नुकीली चीज़ का इस्तेमाल करने से परहेज करना चाहिए. साथ ही ग्रहण के समय भगवान की मूर्ति को स्पर्श न करें और गर्भवती महिलाओं को ग्रहण देखने या अनावश्यक बाहर जाने से बचना चाहिए.

यह भी पढ़ें: Surya Grahan 2026: सूर्य ग्रहण पर बनेगी ‘पंचग्रही योग’, इन 4 राशियों के लिए बढ़ेगी सकती है मुश्किलें

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नेहा कुमारी प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. वे धर्म, ज्योतिष, राशिफल, व्रत-त्योहार, पौराणिक कथाओं और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं. उनकी विशेष रुचि धार्मिक परंपराओं, ज्योतिषीय विश्लेषण और दैनिक राशिफल को सरल, सटीक और पाठक-हितैषी भाषा में प्रस्तुत करने में है. नेहा का उद्देश्य पाठकों तक विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी पहुंचाना है, ताकि वे धर्म, संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों को आसानी से समझ सकें. उनकी लेखन शैली शोध-आधारित, सरल और स्पष्ट है, जो जटिल विषयों को भी सहज और रोचक बना देती है. वे राशिफल, ग्रह-गोचर, व्रत-त्योहार, धार्मिक मान्यताओं, वास्तु, पौराणिक प्रसंगों और भारतीय रीति-रिवाजों से संबंधित विषयों पर नियमित रूप से लेख लिखती हैं. डिजिटल पत्रकारिता में उनकी रुचि पाठकों की जरूरतों को समझते हुए जानकारीपूर्ण, SEO-अनुकूल और प्रभावी कंटेंट तैयार करने में है.
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