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Kalpavas: माघ मास में शुरू हुआ साधना का कल्पवास

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Kalpavas: माघ मास में शुरू हुआ साधना का कल्पवास
माघ मेले में कल्पवास: जहां साधना बनती है जीवन दर्शन
  • डॉ मनोज त्रिपाठी, वाराणसी

Kalpavas: प्रयाग के संगम पर कल्पवास की परंपरा प्राचीन काल से है. इसका उल्लेख वेद और शास्त्रों में भी मिलता है. कल्पवास पौष पूर्णिमा से शुरू होकर माघ पूर्णिमा तक चलता है, जिसकी शुरुआत इस बार 3 जनवरी से हो चुकी है और यह 1 फरवरी तक चलेगा. कल्पवास ऐसी साधना है, जिसके माध्यम से तीर्थराज प्रयाग में कल्पवासी मोक्षदायिनी विहंगम गंगा तट पर हाड़ कंपाने वाली सर्दी में महीने भर के लिए सांसारिक माया-मोह की चिंता छोड़ सिर्फ परलोक का मनोरथ करते हैं.

माघ मेले में कल्पवास का विशेष आध्यात्मिक महत्व

प्रयागराज में माघ मेले में कल्पवास का अत्यधिक महत्व माना गया है. त्रिवेणी के संगम पर बसने वाली अस्थायी आध्यात्मिक नगरी में जप, तप, होम, यज्ञ, धूनी की बयार और संतों के प्रवचन आदि गतिविधियां एक मास तक कल्पवासियों को बांधे रखती हैं. यहां विभिन्न संस्कृतियां, धर्म और विभिन्न विचारधाराओं का भी संगम होता है. विभिन्न प्रांतों से आये तीर्थयात्री आपस में विचार-विमर्श कर ज्ञान का आदान-प्रदान करते हैं. यह ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का प्रतीक है.

कल्पवास का अर्थ और साधना की कठिन प्रक्रिया

कल्पवास का अर्थ है- संगम के तट पर निवास कर वेदाध्ययन और ध्यान करना. पापनाशिनी और मोक्षदायिनी विहंगम गंगा तट पर हाड़ कंपाने वाली सर्दी में पूरे एक महीने तक कल्पवासी तीन बार स्नान, जमीन पर शयन, जप, तप, होम, यज्ञ कर साधु-संतों की धूनी की मनमोहनक सुगंध में प्रवचन का श्रवण, एक समय भोजन या फलाहार कर कल्पवास करेंगे. इस अवधि में कल्पवासी या तीर्थयात्री अन्न, काला तिल, ऊन, वस्त्र एवं बर्तन आदि का दान करते हैं.

महाभारत में वर्णित कल्पवास का अद्भुत फल

महाभारत में कहा गया है कि एक सौ साल तक बिना अन्न ग्रहण किये तपस्या करने का जो फल है, माघ मास में कल्पवास करने भर से प्राप्त हो जाता है. एक प्रसंग में मार्कंडेय धर्मराज युधिष्ठिर से कहते हैं- “राजन प्रयाग तीर्थ सब पापों को नाश करने वाला है. प्रयाग में जो भी व्यक्ति एक महीना, इंद्रियों को वश में करके स्नान-ध्यान, पूजा-पाठ, यज्ञ और संतों के सानिध्य में प्रवचन करने और श्रवण से मोक्ष प्राप्त होता है.

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कल्पवास के दो प्रकार: चंद्रमास और शौर्य मास

कल्पवास दो प्रकार का होता है- पहला, चंद्रमास और दूसरा शौर्य मास का कल्पवास. पौष पूर्णिमा से माघी पूर्णिमा तक चंद्रमास का कल्पवास रहता है और मकर संक्रांति से कुंभ संक्रांति तक शौर्य मास. कल्पवास को धैर्य, अहिंसा और भक्ति के लिए जाना जाता है. पुराणों में ‘प्रयागराज’ को सभी तीर्थो का राजा कहा गया है. अयोध्या, मथुरा, मायापुरी, काशी, कांची, उज्जैन, और द्वारका ये सात परम पवित्र नगरी मानी जाती हैं. ये सातों तीर्थ महाराजाधिराज प्रयाग की पटरानियां हैं. इन्हीं सब कारणों से भूमंडल के समस्त तीर्थो में प्रयागराज सर्वश्रेष्ठ है. यहां माघ मकर में प्रतिवर्ष एक महीने का बड़ा मेला लगता है. मेले में आने वाले करोड़ों श्रद्धालु पतित पावनी गंगा में आस्था की डुबकी लगाते हैं. यहां एक महीने के कल्पवास का बहुत माहात्म्य है. मान्यता है कि स्वर्ग में निवास करने वाले देवता भी दुर्लभ मनुष्य का जन्म पाकर प्रयाग क्षेत्र में कल्पवास करने की इच्छा करते हैं.

गृहस्थ कल्पवासियों का पर्ण कुटी जीवन

इस कल्पवास अवधि में जो भी गृहस्थ कल्पवास का संकल्प लेकर आया है, वह पर्ण कुटी में रहता है. इस दौरान दिन में एक ही बार भोजन किया जाता है तथा मानसिक रूप से धैर्य, अहिंसा और भक्तिभावपूर्ण रहा जाता है. यहां झोपड़ियों (पर्ण कुटी) में रहने वालों की दिनचर्या सुबह गंगा-स्नान के बाद संध्यावंदन से प्रारंभ होती है और देर रात तक प्रवचन और भजन-कीर्तन जैसे आध्यात्मिक कार्यों के साथ समाप्त होती है.

प्रयागे माघ पर्यन्त त्रिवेणी संगमे शुभे।
निवासः पुण्यशीलानां कल्पवासो हि कश्यते॥

  • (पद्मपुराण)

कल्पवास से मोक्ष और जन्म-जन्मांतर से मुक्ति

कल्पवास के संदर्भ में माना गया है कि कल्पवासी को इच्छित फल तो मिलता ही है, उसे जन्म-जन्मांतर के बंधनों से मुक्ति मिल जाती है. महाभारत में कहा गया है कि एक सौ साल तक बिना अन्न ग्रहण किये तपस्या करने का जो फल है, माघ मास में कल्पवास करने भर से प्राप्त हो जाता है. पुराणों में तो यहां तक कहा गया है कि आकाश तथा स्वर्ग में जो देवता हैं, वे भूमि पर जन्म लेने की इच्छा रखते हैं. वे चाहते हैं कि दुर्लभ मनुष्य का जन्म पाकर प्रयाग क्षेत्र में कल्पवास करें.

कल्पवास से सुरक्षित होता है स्वर्ग का मार्ग

महाभारत के एक प्रसंग में मार्कंडेय धर्मराज युधिष्ठिर से कहते हैं कि राजन्‌! प्रयाग तीर्थ सब पापों को नाश करने वाला है. जो भी व्यक्ति प्रयाग में एक महीना, इंद्रियों को वश में करके स्नान-ध्यान और कल्पवास करता है, उसके लिए स्वर्ग का स्थान सुरक्षित हो जाता है.

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शौर्य पुंज विशेष रूप से दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों एवं लेखों पर फोकस कर रहे हैं. वो डिजिटल मीडिया जगत के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. पाठकों की रुचि और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वे सरल, सहज और तथ्यपूर्ण धार्मिक एवं ज्योतिषीय कंटेंट तैयार करते हैं. डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ शौर्य खबरों की नब्ज को समझने और जटिल विषयों को आसान भाषा में प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांस लेखन से की थी. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में कार्य करने का अवसर मिला और अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन में काम शुरू किया. यहां उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट और मनोरंजन जगत की प्रमुख खबरों पर लेखन किया. साल 2020 के दौरान उन्होंने लाइफस्टाइल, हेल्थ, एजुकेशन और अन्य नॉन-न्यूज कैटेगरी में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया. Health & Fitness, Beauty & Fashion, Relationship & Family, Food & Recipes, Travel, Astrology & Vastu, Career & Motivation, Festival & Culture जैसे विषयों पर उन्होंने सैकड़ों उपयोगी और जानकारीपूर्ण लेख तैयार किए. शिक्षा शौर्य पुंज का जन्म रांची, झारखंड में हुआ. उनकी प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की. पत्रकारिता की उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें समाचार लेखन के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे के आधार पर तथ्यपूर्ण, संतुलित और प्रभावी कंटेंट तैयार करने में सक्षम बनाती है. विशेषज्ञता के क्षेत्र दैनिक राशिफल साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल ज्योतिषीय उपाय पूजा-पाठ एवं धार्मिक अनुष्ठान व्रत-त्योहार एवं शुभ मुहूर्त वास्तु शास्त्र धार्मिक मान्यताएं एवं परंपराएं लाइफस्टाइल एवं वेलनेस हेल्थ एवं फिटनेस डिजिटल कंटेंट राइटिंग एवं SEO पाठकों तक विश्वसनीय, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाना शौर्य पुंज की लेखन शैली की सबसे बड़ी विशेषता है.
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