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Home Religion ग्रहण के दौरान मंत्र जाप से खुलते हैं सफलता और शांति के मार्ग

ग्रहण के दौरान मंत्र जाप से खुलते हैं सफलता और शांति के मार्ग

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ग्रहण के दौरान मंत्र जाप से खुलते हैं सफलता और शांति के मार्ग
ग्रहण के दौरान इन मंत्रों का करें जाप

Grahan 2026: साल का पहला सूर्यग्रहण 17 फरवरी 2026 को लगने जा रहा है. ग्रहण काल को ज्योतिष और अध्यात्म दोनों ही दृष्टि से बहुत विशेष माना जाता है. मान्यता है कि ग्रहण के समय मंत्र जप करने से सामान्य समय की तुलना में 100 गुना अधिक फल प्राप्त होता है. यही कारण है कि साधक सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण का बेसब्री से इंतजार करते हैं.

ग्रहण क्या है और क्यों होता है

सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है. जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है, तब सूर्य ग्रहण लगता है. जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, तब चंद्र ग्रहण होता है.

हालांकि यह एक प्राकृतिक घटना है, लेकिन ज्योतिष के अनुसार ग्रहण काल का समय अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है. इस दौरान ग्रहों की ऊर्जा तीव्र हो जाती है, जिसका असर सभी राशियों पर पड़ता है. यह असर किसी के लिए शुभ तो किसी के लिए अशुभ हो सकता है.

ग्रहण काल में किए जाने वाले प्रमुख मंत्र

महामृत्युंजय मंत्र (स्वास्थ्य और रक्षा के लिए): यह मंत्र भगवान शिव को समर्पित है और रोग, भय और संकट से रक्षा करता है.

मंत्र

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्द्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

लाभ

  • गंभीर रोगों से रक्षा
  • मानसिक भय और चिंता में कमी
  • जीवन में सकारात्मक ऊर्जा

चंद्र ग्रहण के समय चंद्र मंत्र: यह मंत्र मन की शांति और भावनात्मक संतुलन के लिए किया जाता है.

मंत्र

ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः

108 बार जप करें

लाभ

  • तनाव और बेचैनी कम होती है
  • नींद और मन की स्थिरता बढ़ती है

सूर्य ग्रहण के समय सूर्य मंत्र:यह मंत्र आत्मबल, आत्मविश्वास और ऊर्जा बढ़ाता है।

मंत्र

ॐ ह्रीं घृणि सूर्य आदित्यः श्रीं।

लाभ

  • आत्मविश्वास में वृद्धि
  • नौकरी, सम्मान और सफलता में मदद

मंगल मंत्र (मानसिक शांति के लिए): यह मंत्र क्रोध, चिड़चिड़ापन और मानसिक अशांति को शांत करता है.

मंत्र

ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः

लाभ

  • मानसिक शांति
  • साहस और आत्मबल में वृद्धि

अध्यात्म में ग्रहण काल का महत्व

अध्यात्म की दृष्टि से ग्रहण काल साधकों के लिए वरदान जैसा माना जाता है. शास्त्रों में बताया गया है कि ग्रहण के समय किया गया मंत्र जप, साधना या तप सामान्य दिनों की अपेक्षा कई गुना अधिक फलदायी होता है. चाहे वह वैदिक मंत्र हों या शाबर मंत्र, ग्रहण काल सभी प्रकार की मंत्र साधना के लिए सर्वोत्तम समय माना गया है. इसी कारण बहुत से साधक लंबे समय से ग्रहण आने की प्रतीक्षा करते हैं, ताकि वे अपने मंत्र को सिद्ध या परिपक्व कर सकें.

सूर्य ग्रहण और मंत्र सिद्धि

शास्त्रों में कहा गया है कि ग्रहण काल को सामान्य पूजा-पाठ के लिए अशुभ माना गया है. इसी वजह से इस समय मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं और देव पूजा नहीं की जाती. लेकिन इसके विपरीत, मंत्र जप और यज्ञ का पुण्य इस समय 100 गुना बढ़ जाता है. यदि कोई साधक सूर्य ग्रहण के समय मंत्र जप करता है, तो उसे विशेष सफलता मिलती है. खासकर शाबर मंत्रों में इस समय जप करने से मंत्र में शीघ्र प्रभाव आता है.

सूर्य ग्रहण के समय मंत्र जप की विधि

  • जिस मंत्र को सिद्ध करना चाहते हैं, उसे पहले अच्छी तरह याद कर लें.
  • ग्रहण शुरू होते ही पूजा स्थान से अलग किसी शांत जगह पर बैठें.
  • सामने घी का दीपक जलाएं.
  • हाथ में थोड़ा जल लेकर संकल्प करें और मंत्र जप शुरू करें.
  • कम से कम सवा घंटे लगातार जप करें या चाहें तो पूरी ग्रहण अवधि तक जप कर सकते हैं.
  • ग्रहण समाप्त होने के बाद पहने हुए कपड़ों सहित स्नान करें.
  • इस विधि से किया गया मंत्र जप अत्यंत फलदायी माना जाता है.

मंत्र सिद्धि के बाद

ग्रहण काल में किए गए मंत्र जप से साधक को मंत्र में सिद्धि मिलती है. इसके बाद वह मंत्र का प्रयोग दूसरों के दुख दूर करने, मानसिक शांति और सकारात्मक कार्यों के लिए कर सकता है. इस प्रकार ग्रहण काल, विशेष रूप से सूर्य ग्रहण, मंत्र साधना के लिए एक दुर्लभ और शक्तिशाली अवसर माना जाता है.

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शौर्य पुंज विशेष रूप से दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों एवं लेखों पर फोकस कर रहे हैं. वो डिजिटल मीडिया जगत के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. पाठकों की रुचि और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वे सरल, सहज और तथ्यपूर्ण धार्मिक एवं ज्योतिषीय कंटेंट तैयार करते हैं. डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ शौर्य खबरों की नब्ज को समझने और जटिल विषयों को आसान भाषा में प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांस लेखन से की थी. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में कार्य करने का अवसर मिला और अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन में काम शुरू किया. यहां उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट और मनोरंजन जगत की प्रमुख खबरों पर लेखन किया. साल 2020 के दौरान उन्होंने लाइफस्टाइल, हेल्थ, एजुकेशन और अन्य नॉन-न्यूज कैटेगरी में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया. Health & Fitness, Beauty & Fashion, Relationship & Family, Food & Recipes, Travel, Astrology & Vastu, Career & Motivation, Festival & Culture जैसे विषयों पर उन्होंने सैकड़ों उपयोगी और जानकारीपूर्ण लेख तैयार किए. शिक्षा शौर्य पुंज का जन्म रांची, झारखंड में हुआ. उनकी प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की. पत्रकारिता की उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें समाचार लेखन के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे के आधार पर तथ्यपूर्ण, संतुलित और प्रभावी कंटेंट तैयार करने में सक्षम बनाती है. विशेषज्ञता के क्षेत्र दैनिक राशिफल साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल ज्योतिषीय उपाय पूजा-पाठ एवं धार्मिक अनुष्ठान व्रत-त्योहार एवं शुभ मुहूर्त वास्तु शास्त्र धार्मिक मान्यताएं एवं परंपराएं लाइफस्टाइल एवं वेलनेस हेल्थ एवं फिटनेस डिजिटल कंटेंट राइटिंग एवं SEO पाठकों तक विश्वसनीय, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाना शौर्य पुंज की लेखन शैली की सबसे बड़ी विशेषता है.
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