[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home Religion Ahoi Ashtami Vrat katha: अहोई अष्टमी आज, करें इस कथा का पाठ, मां पार्वती की बरसेगी कृपा

Ahoi Ashtami Vrat katha: अहोई अष्टमी आज, करें इस कथा का पाठ, मां पार्वती की बरसेगी कृपा

0
Ahoi Ashtami Vrat katha: अहोई अष्टमी आज, करें इस कथा का पाठ, मां पार्वती की बरसेगी कृपा
Ahoi Mata Vrat katha

Ahoi Ashtami Vrat katha: आज 13 अक्टूबर 2025 को अहोई अष्टमी का व्रत रखा जा रहा है. अहोई अष्टमी के दिन महिलाएं अपने बच्चों की दीर्घायु और सुख के लिए निर्जला उपवास रखती हैं और अहोई माता की पूजा करती हैं. शाम के समय तारे दिखाई देने पर कथा सुनी जाती है और तारों को जल अर्पित कर व्रत खोला जाता है. कई स्थानों पर तारे निकलने के बाद ही माता की आराधना शुरू होती है. पूजा से पहले स्थान को स्वच्छ किया जाता है, चौक बनाया जाता है और जल से भरा कलश चौकी पर रखकर विधि-विधान से पूजा की जाती है. अंत में अहोई माता की कथा सुनने के बाद यह प्रार्थना की जाती है कि जैसे माता ने संतान की रक्षा की, वैसे ही सभी बच्चों की रक्षा करें और उन्हें सुखी रखें.

अहोई अष्टमी व्रत कथा

प्राचीन काल में एक साहूकार था, जिसके सात बेटे और सात बहुएँ थीं. इस साहूकार की एक बेटी भी थी जो दीपावली के अवसर पर ससुराल से मायके आई थी. दीपावली पर घर को लीपने के लिए सातों बहुएँ मिट्टी लाने जंगल में गईं तो ननद भी उनके साथ जंगल की ओर चल पड़ी. साहूकार की बेटी जहाँ से मिट्टी ले रही थी उसी स्थान पर स्याहु (साही) अपने सात बेटों से साथ रहती थी. मिट्टी खोदते हुए गलती से साहूकार की बेटी की खुरपी से स्याहू का एक बच्चा मर गया. स्याहू इस पर क्रोधित होकर बोली मैं तुम्हारी कोख बाँधूँगी. स्याहू की यह बात सुनकर साहूकार की बेटी अपनी सातों भाभियों से एक एक करके विनती करती हैं कि वह उसके बदले अपनी कोख बंधवा लें. सबसे छोटी भाभी ननद के बदले अपनी कोख बंधवाने के लिए तैयार हो जाती है. इसके बाद छोटी भाभी के जो भी बच्चे थे वह सभी सात दिन बाद मर जाते हैं. सात पुत्रों की इस प्रकार मृत्यु होने के बाद उसने पंडित को बुलवाकर इसका कारण पूछा. पंडित ने सुरही गाय की सेवा करने की सलाह दी. सुरही सेवा से प्रसन्न होती है और उसे स्याहु के पास ले जाती है. रास्ते में थक जाने पर दोनों आराम करने लगते हैं. अचानक साहूकार की छोटी बहू की नजर एक ओर जाती है. वह देखती है कि एक सांप गरूड़ पंखनी के बच्चे को डंसने जा रहा है और इसलिए वह साँप को मार देती है. इतने में गरूड़ पंखनी वहाँ आ जाती है और खून बिखरा हुआ देखकर उसे लगता है कि छोटी बहू ने उसके बच्चे को मार दिया है. इस पर वह छोटी बहू को चोंच मारना शुरू कर देती है. छोटी बहू इस पर कहती है कि उसने तो उसके बच्चे की जान बचाई है. गरूड़ पंखनी इस पर खुश होती है और सुरही सहित उन्हें स्याहु के पास पहुँचा देती है. स्याहु छोटी बहू की सेवा से प्रसन्न होकर उसे सात पुत्र और सात बहुएँ होने का अशीर्वाद देती है. स्याहु के आशीर्वाद से छोटी बहू का घर पुत्र और पुत्र की वधुओं से हरा भरा हो जाता है. अहोई अष्टमी का अर्थ एक प्रकार से यह भी होता है “अनहोनी को होनी बनाना” जैसे साहूकार की छोटी बहू ने कर दिखाया.

अहोई माता की पूजा कब की जाती है?

पूजा शाम के समय तारे दिखाई देने के बाद की जाती है.

व्रत कैसे खोला जाता है?

कथा सुनने और तारों को जल अर्पित करने के बाद व्रत खोला जाता है.

पूजा में क्या-क्या चीजें जरूरी होती हैं?

पूजा स्थान को साफ कर चौक बनाते हैं, जल से भरा कलश रखते हैं और अहोई माता की प्रतिमा या चित्र की पूजा की जाती है.

कौन हैं अहोई माता?

अहोई माता, मां पार्वती का स्वरूप है, जो संतानों की रक्षक देवी हैं. इस दिन महिलाएं अपनी संतान की दीर्घायु, सुख और समृद्धि के लिए अहोई माता की श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करती हैं और निर्जला व्रत रखती हैं.

Also Read: 13 या 14 अक्टूबर, यहां से जानें कब रखा जाएगा अहोई अष्टमी का व्रत

Also Read: Ahoi Ashtam Aarti

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल मान्यताओं और परंपरागत जानकारियों पर आधारित है. प्रभात खबर किसी भी तरह की मान्यता या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है.

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel