कहां से कहां तक है मिडिल ईस्ट; 16 देश रखते हैं दुनिया को बर्बाद करने की हैसियत

Middle East : मिडिल ईस्ट यह शब्द आप सबने सुना होगा, अपने देश में मिडिल ईस्ट को खाड़ी क्षेत्र भी कहा जाता है. क्या आप यह जानते हैं कि मिडिल ईस्ट किसे कहते हैं और इसका महत्व क्या है? अगर नहीं तो यह आलेख पढ़ना आपके लिए बहुत जरूरी है, यह क्षेत्र धार्मिक दृष्टिकोण से भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि विश्व के तीन प्रमुख धर्म ईसाई, इस्लाम और यहूदी का जन्म इसी क्षेत्र में हुआ है.

By Rajneesh Anand | March 8, 2026 6:56 AM

Middle East : 28 फरवरी को जैसे ही अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त हमला शुरू किया, पूरे देश में खलबली मच गई है. पूरा विश्व यह जानना चाहता है कि आखिर मिडिल ईस्ट में शुरू हुआ यह युद्ध कब खत्म होगा, क्योंकि इस युद्ध से पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है. अमेरिका और इजरायल के हमलों का ईरान ने जवाब देना शुरू किया और शुरुआत में इजरायल पर मिसाइल दागे और बाद में अपने पड़ोसी मुल्कों पर भी हमला किया, जिनपर उसे यह शंका है कि वे अमेरिका के साथ खड़े हैं. ईरान मिडिल ईस्ट का एक प्रमुख देश है और उसपर हुए हमले से पूरे मिडिल ईस्ट में अशांति है. हमला शुरू हुए अभी महज 7 दिन ही हुए हैं, अगर यह युद्ध और 7 दिन खिंच गया, तो पूरे विश्व में पेट्रोल, डीजल और गैस के दाम अप्रत्याशित तरीके से बढ़ सकते हैं.

किसे कहते हैं मिडिल ईस्ट?

जब भी विश्व के किसी भी कोने में ऊर्जा यानी पेट्रोल और गैस की चर्चा होती है मिडिल ईस्ट की भी चर्चा होती है. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आखिर मिडिल ईस्ट किसे कहते हैं और मिडिल ईस्ट है क्या? मिडिल ईस्ट शब्द यूरोपीय दृष्टिकोण से गढ़ा गया शब्द है, जो एक भौगोलिक क्षेत्र को बताने के लिए प्रयोग में लाया गया है. 19वी– 20वीं सदी की शुरुआत में ब्रिटिश उपनिवेशवाद जब अपने चरम पर था तो इन लोगों ने विश्व को अपने दृष्टिकोण से नाम दिया. उसी क्रम में यूरोप और एशिया के बीच स्थित इलाके को मिडिल ईस्ट का नाम दिया दिया. इस इलाके में पश्चिमी एशिया और उत्तरी अफ्रीका के कुछ हिस्से शामिल हैं. यह भूभाग यूरोप, एशिया और अफ्रीका तीनों महाद्वीपों के बीच स्थित है, इसलिए इसे Geopolitical crossroads भी कहा जाता है.


मिडिल ईस्ट में कौन-कौन से देश आते हैं?

मिडिल ईस्ट में आने वाले प्रमुख देश इस प्रकार हैं–

  • सऊदी अरब
  • संयुक्त अरब अमीरात
  • कतर
  • कुवैत
  • ओमान
  • बहरीन
  • यमन
  • इजरायल
  • फिलिस्तीन
  • जाॅर्डन
  • लेबनान
  • सीरिया
  • इराक
  • ईरान
  • मिस्र
  • तुर्किए

मिडिल ईस्ट का क्यों है इतना महत्व?

मिडिल ईस्ट अपनी भौगोलिक स्थिति की वजह से इतना महत्वपूर्ण है. यह क्षेत्र तीन महाद्वीपों यूरोप, एशिया और अफ्रीका के बीच व्यापार और समुद्री मार्गों का केंद्र है. यहां तेल और गैस के भंडार हैं और उन्हें बाहर भेजने के लिए कई महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग भी हैं, जैसे–

  • होर्मुज जलडमरूमध्य
  • स्वेज नहर
  • बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य

चूंकि यह दुनिया का सबसे प्रमुख समुद्री मार्ग है, जिससे होकर दुनिया के सबसे अधिक तेल का परिवहन होता है. इस वजह से अगर यहां युद्ध की स्थिति बनती है या टकराव होता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होती है.

विभिन्न विषयों पर एक्सप्लेनर और विशेष आलेख पढ़ने के लिए क्लिक करें

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है मिडिल ईस्ट या खाड़ी क्षेत्र

खाड़ी क्षेत्र मिडिल ईस्ट का एक हिस्सा है और फारस की खाड़ी की वजह से इस क्षेत्र को खाड़ी क्षेत्र कहा जाता है. इसमें सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत, बहरीन,ओमान, ईरान और इराक जैसे देश आते हैं. इन देशों में भारत से हजारों लोग रोजगार के लिए जाते हैं. साथ ही इन देशों से भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का 60 प्रतिशत आयात करता है, इस वजह से भारत के लिए खाड़ी क्षेत्र बहुत महत्वपूर्ण है.

ये भी पढ़ें : –मिडिल ईस्ट में युद्ध से भारत में बढ़ेगी महंगाई, तेल-गैस के अलावा इन उद्योगों पर संकट

कौन हैं अयातुल्ला अलीरेजा अराफी, जिन्हें बनाया गया है ईरान का कार्यवाहक सुप्रीम लीडर