Monsoon : चेरापूंजी जैसी बारिश बिहार-झारखंड में क्यों नहीं होती?

Monsoon : बारिश सिर्फ बादलों से नहीं, भूगोल से तय होती है. चेरापूंजी में पहाड़ हवा को ऊपर धकेलते हैं, इसलिए वह वर्षा का 'हॉटस्पॉट' बन गया. बिहार और झारखंड में मानसून आता जरूर है, लेकिन वहां वैसी पहाड़ी पकड़ नहीं है, इसलिए बारिश होती है, पर चेरापूंजी जितनी नहीं.

By Achal Priyadarshy | July 6, 2026 10:46 AM

Monsoon : बरसात का मौसम आते ही अक्सर लोगों के मन में एक सवाल उठता है कि आखिर चेरापूंजी में इतनी ज्यादा बारिश क्यों होती है, जबकि बिहार और झारखंड में मानसून आने के बावजूद वहां जैसी मूसलाधार बारिश नहीं होती? इसका जवाब किसी रहस्य में नहीं, बल्कि भूगोल और प्रकृति के नियमों में छिपा है.

इसे एक आसान उदाहरण से समझिए. मान लीजिए कि आपके सामने तेज रफ्तार से आती हुई हवा है. अगर उसके रास्ते में कोई ऊंची दीवार आ जाए, तो उसे ऊपर उठना ही पड़ेगा. ठीक ऐसा ही चेरापूंजी में होता है. फर्क सिर्फ इतना है कि यहां दीवार की जगह खासी पहाड़ियां हैं और हवा की जगह बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी से भरी मानसूनी हवाएं.

जब ये हवाएं चेरापूंजी की ऊंची पहाड़ियों से टकराती हैं, तो उनके पास आगे बढ़ने का रास्ता नहीं बचता. मजबूर होकर वे तेजी से ऊपर उठती हैं. ऊंचाई पर पहुंचते ही तापमान कम हो जाता है. ठंडी हवा अपने भीतर मौजूद सारी नमी को संभाल नहीं पाती. यही नमी छोटे-छोटे पानी की बूंदों में बदलकर बादल बनाती है और फिर शुरू हो जाती है तेज बारिश. भूगोल की भाषा में इसे ओरोग्राफिक वर्षा (Orographic Rainfall) कहा जाता है, लेकिन सरल भाषा में कहें तो ‘पहाड़ से टकराकर होने वाली बारिश’.

Monsoon : चेरापूंजी जैसी बारिश बिहार-झारखंड में क्यों नहीं होती? 6

चेरापूंजी की खास बात सिर्फ पहाड़ नहीं हैं. वहां की पहाड़ियों की ढलान बहुत खड़ी है. इसलिए हवा बहुत तेजी से ऊपर उठती है और लगातार भारी बारिश होती रहती है. यही कारण है कि चेरापूंजी में हर साल औसतन 11,000 मिलीमीटर से भी अधिक वर्षा दर्ज की जाती है. कई बार तो कुछ दिनों में ही इतनी बारिश हो जाती है, जितनी बिहार या झारखंड के कई इलाकों में पूरे मानसून के दौरान नहीं होती.

प्रभात खबर UPSC स्पेशल : UPSC : एक ख्वाब, कई इम्तिहान

Monsoon : चेरापूंजी जैसी बारिश बिहार-झारखंड में क्यों नहीं होती? 7

Monsoon : अब सवाल आता है कि बिहार और झारखंड में ऐसा क्यों नहीं होता?

इन दोनों राज्यों में भी मानसून बंगाल की खाड़ी से ही आता है. यानी पानी लाने वाली हवा वही होती है, लेकिन रास्ते में उसे चेरापूंजी जैसी ऊंची और लगातार फैली पहाड़ियां नहीं मिलतीं. बिहार का अधिकांश भाग समतल मैदान है, जबकि झारखंड में पठारी क्षेत्र जरूर है, लेकिन वहां की पहाड़ियां इतनी ऊंची और दीवार जैसी नहीं हैं कि हवा को अचानक ऊपर उठने पर मजबूर कर दें.

इस कारण नमी वाली हवा पूरे इलाके में फैल जाती है. वह धीरे-धीरे ऊपर उठती है और अलग-अलग स्थानों पर सामान्य बारिश कराती है. इसलिए यहां वर्षा होती तो अच्छी है, लेकिन किसी एक जगह पर अत्यधिक मात्रा में नहीं होती.

बिहार में एक और कारण समुद्र से दूरी भी है. बंगाल की खाड़ी से निकलने वाली हवाएं जब तक बिहार पहुंचती हैं, तब तक रास्ते में काफी बारिश कर चुकी होती हैं. इससे उनके भीतर मौजूद नमी कुछ कम हो जाती है. इसलिए बिहार में बारिश तो होती है, लेकिन चेरापूंजी जैसी लगातार और बेहद तेज वर्षा नहीं हो पाती.

झारखंड की स्थिति थोड़ी अलग है. वहां जंगल, छोटे-बड़े पहाड़ और पठारी इलाके होने के कारण कई स्थानों पर अच्छी बारिश होती है. खासकर नेतरहाट, रांची और आसपास के इलाकों में वर्षा अपेक्षाकृत अधिक होती है. लेकिन वहां भी चेरापूंजी जैसी भौगोलिक परिस्थितियां मौजूद नहीं हैं. इसलिए वहां की बारिश सीमित रहती है.

Monsoon : चेरापूंजी जैसी बारिश बिहार-झारखंड में क्यों नहीं होती? 8

बिहार में मानसून का रास्ता भी समझना जरूरी है. बंगाल की खाड़ी से आने वाली मानसूनी हवाएं सबसे पहले पश्चिम बंगाल पहुंचती हैं. वहां से वे उत्तर और उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ते हुए बिहार में प्रवेश करती हैं. गंगा का विशाल मैदान पूरी तरह खुला है, इसलिए हवाएं आसानी से पूरे राज्य में फैल जाती हैं. परिणामस्वरूप बारिश भी अलग-अलग जिलों में बंट जाती है. कहीं ज्यादा होती है, कहीं कम, लेकिन किसी एक स्थान पर चेरापूंजी जैसी रिकॉर्ड तोड़ बारिश नहीं होती.

यही वजह है कि चेरापूंजी को दुनिया के सबसे अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में गिना जाता है, जबकि बिहार और झारखंड मानसूनी क्षेत्र होने के बावजूद सामान्य या मध्यम वर्षा वाले प्रदेश माने जाते हैं.

PM MODI की आगामी इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड (11-16 July 2026) पर प्रभात खबर स्पेशल Geopolitics & IR कवरेज करेगा. जुड़ें रहें.

Monsoon : चेरापूंजी जैसी बारिश बिहार-झारखंड में क्यों नहीं होती? 9

निष्कर्ष: लाख पते की बात

संक्षेप में कहा जाए तो बारिश केवल बादलों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि यह इस बात पर भी निर्भर करती है कि रास्ते में हवा को कैसी भौगोलिक परिस्थितियां मिलती हैं. जहां ऊंचे पहाड़ नमी से भरी हवाओं को रोककर ऊपर उठने के लिए मजबूर करते हैं, वहां अत्यधिक वर्षा होती है. जहां खुले मैदान होते हैं, वहां वही हवाएं फैल जाती हैं और बारिश भी व्यापक क्षेत्र में सामान्य रूप से बंट जाती है. यही प्राकृतिक अंतर चेरापूंजी और बिहार-झारखंड की बारिश के बीच सबसे बड़ा कारण है.

Monsoon : चेरापूंजी जैसी बारिश बिहार-झारखंड में क्यों नहीं होती? 10

यह भी पढ़ें : क्या कर रहे हो पाकिस्तान : पहले बसंत मनाए, फिर ‘बाबरी मस्जिद चौक’ का नाम ‘जैन मंदिर चौक’ कर दिए…

यह भी पढ़ें : Bharat Tiwari : विवाद पर विश्लेषण, UPSC स्टाइल में