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Home Prabhat Khabar Special UGC New Regulations : यूनिवर्सिटी में अब जाति आधारित भेदभाव पड़ेगा महंगा, झूठी शिकायत दर्ज की तो…

UGC New Regulations : यूनिवर्सिटी में अब जाति आधारित भेदभाव पड़ेगा महंगा, झूठी शिकायत दर्ज की तो…

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UGC New Regulations : यूनिवर्सिटी में अब जाति आधारित भेदभाव पड़ेगा महंगा, झूठी शिकायत दर्ज की तो…
यूजीसी के नये नियम का विरोध

UGC New Regulations : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University Grants Commission of India) ने 13 तारीख को विश्वविद्यालयों में समानता स्थापित करने और जाति के आधार पर होने वाले भेदभाव से निपटने के लिए नये नियम लागू किए हैं. इस नियम के तहत अब सिर्फ एससी–एसटी कैटगरी के लोग ही नहीं बल्कि ओबीसी, दिव्यांग और महिलाएं भी अपने खिलाफ हुई जाति और लिंग आधारित असमानता के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकते हैं. 

नए नियम के लागू होते ही पूरे देश में हंगामा मच गया है, जेनरल कैटेगरी के लोगों का कहना है कि नये नियम के लागू होने से उसका बेजा इस्तेमाल उनके खिलाफ होगा और उनका उत्पीड़न बढ़ेगा. यूजीसी के नये नियमों में ऐसा क्या प्रावधान है जिसकी वजह से जेनरल कैटेगरी के लोग इतने गुस्से में हैं और नये नियमों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं?

यूजीसी के नये नियमों में क्या है खास?

यूजीसी ने 13 जनवरी को जो नये नियम लागू किए हैं, वे 2012 में जारी किए गए नियमों का ही अपडेट है. इन नियमों का उद्देश्य धर्म , जाति, नस्ल, लिंग, जन्म स्थान या दिव्यागंता के आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकना है. इसके लिए समान अवसर केंद्र बनाए जाएंगे, जिसके तहत समता समिति कार्य करेगी. पीड़ित व्यक्ति 24X7 अपनी शिकायत दर्ज करवा पाएगा. अगर वह चाहे तो वह अपनी पहचान भी गोपनीय रख सकता है. समता समिति के सदस्य इस बात का भी ध्यान रखेंगे कि शिकायतकर्ता के खिलाफ बदले की कार्रवाई ना की जाए.

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद यूजीसी ने नियमों में किया बदलाव

 रोहित वेमुला और पायल तड़वी की आत्महत्या से आहत उनकी माताओं ने उच्च शिक्षण संस्थाओं में अनुसूचित जाति और जनजाति के विद्यार्थियों के साथ हो रहे भेदभाव के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. इनकी अपील और देश भर में छात्र–छात्राओं की आत्महत्या के आंकड़ों को देखते हुए 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने असमानता को रोकने के लिए यूजीसी से व्यापक कदम उठाने को कहा था. कोर्ट में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार 2004 से 2024 के बीच सिर्फ आईआईटी में ही 115 विद्यार्थियों ने आत्महत्या की थी. 

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कैसे काम करेगी समता समिति?

यूजीसी के नए नियमों के अनुसार विश्वविद्यालय इस बात को सुनिश्चित करेंगे कि उनके यहां किसी भी तरह की असमानता का माहौल ना रहे. अगर कोई शिकायत समता समिति के पास पहुंचती है, तो वह 24 घंटे के अंदर बैठक करेगी. उसके लिए यह अनिवार्य है कि वह 15 दिनों के अंदर अपनी रिपोर्ट संस्थान के प्रमुख को सौंपेगी और उसके बाद 7 दिनों के अंदर संस्थान के प्रमुख को कार्रवाई करनी होगी. अगर जरूरी हुआ तो पुलिस की मदद भी ली जाएगी. जो भी संस्थान नये नियमों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी, जिसके तहत उच्च शिक्षण संस्थाओं की सूची से हटाना और डिग्री कार्यक्रम चलाने से रोकना शामिल है.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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